Pragya Missing Mystery: केदारनाथ यात्रा से लौटते समय नंदा देवी एक्सप्रेस ट्रेन से अचानक लापता हुईं 29 वर्षीय प्रज्ञा सिंह आखिरकार पांच दिन बाद बिहार के बेगूसराय में सुरक्षित मिल गई हैं। पुलिस उन्हें अपने साथ हरिद्वार जिले के लक्सर थाने लेकर पहुंची है, जहां उनसे लगातार पूछताछ की जा रही है। इस दौरान प्रज्ञा का परिवार भी थाने में मौजूद है और पूरे मामले की सच्चाई जानने का इंतजार कर रहा है।
पुलिस ने कई टीम बनाकर शुरू की थी तलाश
देहरादून ग्रामीण के एसपी शेखर चंद्र सुयाल के मुताबिक, प्रज्ञा के गायब होने की सूचना मिलने के बाद लक्सर थाने में गुमशुदगी दर्ज की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अलग-अलग टीमें बनाई थीं। जांच के दौरान सर्विलांस, सीसीटीवी फुटेज और ट्रेन के पूरे रूट की मदद ली गई।
एसपी ने बताया कि बुधवार शाम प्रज्ञा ने एक नए मोबाइल नंबर से अपने परिवार से संपर्क किया। इसके बाद पुलिस ने तुरंत उनकी लोकेशन ट्रेस की, जो बिहार के बेगूसराय में मिली। पुलिस टीम वहां पहुंची और उन्हें सुरक्षित वापस ले आई।

शुरुआती पूछताछ में क्या बोलीं प्रज्ञा
पुलिस के अनुसार, शुरुआती पूछताछ में प्रज्ञा ने बताया है कि वह किसी बात से नाराज होकर अपनी मर्जी से चली गई थीं। उन्होंने फिलहाल किसी दबाव, धमकी या किसी तीसरे व्यक्ति की भूमिका से इनकार किया है।
एसपी शेखर चंद्र सुयाल ने कहा कि प्रज्ञा और उनके पति की शादी कुछ समय पहले ही हुई थी। अब पुलिस उनके विस्तृत बयान दर्ज करेगी, जिसके बाद पूरे मामले की वास्तविक स्थिति साफ हो सकेगी।उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस की पहली प्राथमिकता प्रज्ञा को सुरक्षित ढूंढना था, जो पूरी हो चुकी है। अब आगे की कानूनी प्रक्रिया और पूछताछ जारी है।
Pragya Missing Mystery: परिवार ने ली राहत की सांस
प्रज्ञा के भाई विभूम ने फोन पर बातचीत में बताया कि उनकी बहन फिलहाल स्वस्थ नजर आ रही हैं। हालांकि, अभी पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है, इसलिए परिवार को उनसे खुलकर बात करने का मौका नहीं मिला है।
लेकिन अब भी सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि आखिर प्रज्ञा ट्रेन से कैसे गायब हुईं और बिहार तक किन हालात में पहुंचीं। पुलिस अब उनके बयान के आधार पर पूरे घटनाक्रम को जोड़ने की कोशिश कर रही है।
रात में अचानक सीट से गायब हो गई थीं प्रज्ञा
प्रज्ञा सिंह 5 मई की रात अपने पति मनीष अग्रहरि के साथ देहरादून से गाजियाबाद जा रही नंदा देवी एक्सप्रेस में सफर कर रही थीं। मनीष के मुताबिक, हरिद्वार तक दोनों के बीच सामान्य बातचीत हुई थी, जिसके बाद उन्हें नींद आ गई।
मनीष ने बताया कि जब रात में मुजफ्फरनगर के पास उनकी आंख खुली तो प्रज्ञा सीट पर नहीं थीं। पहले उन्हें लगा कि वह वॉशरूम गई होंगी या किसी दूसरी बोगी में होंगी, लेकिन काफी देर तक तलाश करने के बाद भी उनका कोई पता नहीं चला।इसके बाद मनीष ने पूरी ट्रेन में उन्हें ढूंढने की कोशिश की।

रात 1 बजे परिवार को मिली जानकारी
प्रज्ञा के भाई विभूम के अनुसार, रात करीब 1 बजे मनीष ने फोन कर परिवार को बताया कि प्रज्ञा अचानक ट्रेन से गायब हो गई हैं। इसके बाद मनीष मुजफ्फरनगर स्टेशन पर उतरे और रेलवे पुलिस से मदद मांगी।
परिवार का आरोप था कि स्टेशन पर सीसीटीवी फुटेज देखने की कोशिश की गई, लेकिन कैमरे बंद मिले। बाद में रुड़की स्टेशन पर भी कैमरे काम नहीं कर रहे थे, जिससे मामले की जांच और उलझ गई।
लक्सर के आसपास मिली थी आखिरी लोकेशन
परिवार के मुताबिक, प्रज्ञा के मोबाइल फोन की आखिरी लोकेशन लक्सर के पास मिली थी। बताया गया कि इस इलाके में ट्रेन एक मोड़ पर धीमी हो जाती है। इसी के बाद परिवार ने लक्सर थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
विभूम ने बताया कि 6 मई की रात करीब 2 बजे से पूरा परिवार लगातार प्रज्ञा की तलाश में लगा हुआ था। पुलिस भी अलग-अलग जगहों पर जांच कर रही थी, लेकिन कई दिनों तक कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई।
रेलवे ट्रैक पर पैदल चलकर भी की गई तलाश
प्रज्ञा की तलाश में परिवार ने रुड़की से मुजफ्फरनगर के बीच रेलवे ट्रैक पर पैदल चलकर भी खोजबीन की। पुलिस के साथ कई किलोमीटर तक सर्च ऑपरेशन चलाया गया, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।परिवार लगातार पुलिस अधिकारियों से मिलकर तेजी से कार्रवाई की मांग कर रहा था।
मनीष ने दोनों वॉशरूम चेक किए और आसपास के डिब्बों में भी पूछताछ की, लेकिन प्रज्ञा का कहीं पता नहीं चला। उनका मोबाइल फोन भी बंद आ रहा था।जब ट्रेन अगले स्टेशन पर रुकी तो वहां भी खोजबीन की गई, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। इसके बाद रेलवे पुलिस को सूचना दी गई और बाद में मामला रुड़की थाने को ट्रांसफर कर दिया गया।

सीसीटीवी बंद होने से बढ़ी पुलिस की मुश्किल
इस केस में पुलिस के सामने सबसे बड़ी परेशानी यह रही कि रुड़की और मुजफ्फरनगर रेलवे स्टेशन के सीसीटीवी कैमरों से कोई फुटेज नहीं मिल सकी।मनीष का आरोप था कि दोनों स्टेशनों के कैमरे खराब थे। इसी वजह से यह भी साफ नहीं हो पाया कि प्रज्ञा ट्रेन से उतरी थीं या नहीं।
किसी अनहोनी की आशंका को देखते हुए पुलिस ने रेलवे ट्रैक और आसपास के इलाकों में भी लंबे समय तक सर्च ऑपरेशन चलाया, लेकिन वहां भी कोई जानकारी नहीं मिली।
कॉल डिटेल और चैट से भी नहीं मिला सुराग
जांच के दौरान पुलिस ने प्रज्ञा की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), मैसेज और व्हाट्सऐप चैट की भी जांच की। हालांकि, इनमें किसी तरह की संदिग्ध गतिविधि सामने नहीं आई।यही कारण था कि यह मामला धीरे-धीरे एक ब्लाइंड केस बनता जा रहा था। प्रज्ञा की तलाश में उत्तराखंड पुलिस, रेलवे पुलिस और अन्य एजेंसियों की टीमें लगातार काम कर रही थीं।

छह दिन बाद बेगूसराय में मिलीं प्रज्ञा
लगातार छह दिन तक तलाश के बाद पुलिस को सूचना मिली कि प्रज्ञा बिहार के बेगूसराय में मौजूद हैं। इसके बाद पुलिस टीम वहां पहुंची और उन्हें सुरक्षित बरामद कर लिया गया।पति मनीष ने बताया कि पुलिस ने उन्हें इसकी जानकारी दे दी है और अब प्रज्ञा को लक्सर लाया गया है। उनका कहना है कि पूछताछ पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी।
फिलहाल पुलिस प्रज्ञा से लगातार सवाल-जवाब कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि उनके विस्तृत बयान के बाद ही यह साफ होगा कि वह अपनी मर्जी से गई थीं, किसी दबाव में थीं या इसके पीछे कोई और वजह थी।
ढाई महीने पहले ही हुई थी लव मैरिज
परिवार के अनुसार, मनीष अग्रहरि पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, जबकि प्रज्ञा गृहिणी थीं। दोनों ने फरवरी 2026 में प्रेम विवाह किया था।परिवार का कहना है कि शादी के बाद दोनों खुश थे और पहली बार साथ में धार्मिक यात्रा पर गए थे।विभूम के मुताबिक, बहन के लापता होने के बाद से मनीष लगातार उसकी तलाश में जुटे हुए थे। वह खुद पुलिस के साथ अलग-अलग जगहों पर जाकर खोजबीन कर रहे थे।
परिवार का कहना है कि अगर दोनों के बीच कोई विवाद या तनाव होता तो इसकी जानकारी जरूर होती। फिलहाल उन्हें अब भी समझ नहीं आ रहा कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि प्रज्ञा अचानक ट्रेन से गायब हो गईं।
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