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प्रियंका गांधी की टिप्पणी पर विवाद, शिक्षाविदों ने प्रो. वी. कामकोटि के समर्थन में उठाई आवाज

Priyanka Gandhi

Priyanka Gandhi: कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा द्वारा आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटि पर की गई टिप्पणी को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रियंका गांधी ने एक बयान में प्रो. कामकोटि को ‘गोमूत्र विशेषज्ञ’ कहा था, जिसके बाद देशभर के कई शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों और विश्वविद्यालयों के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने इसका विरोध किया है। शिक्षाविदों का कहना है कि किसी भी अकादमिक या वैज्ञानिक से असहमति हो सकती है, लेकिन सार्वजनिक मंच पर उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली भाषा का प्रयोग उचित नहीं है। उन्होंने सम्मानजनक संवाद और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने की अपील की है।

शिक्षाविदों ने लिखा खुला पत्र, गरिमा बनाए रखने की अपील

देश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों से जुड़े शिक्षाविदों ने प्रियंका गांधी को खुला पत्र लिखकर कहा कि सार्वजनिक जीवन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अकादमिक गरिमा और सम्मानजनक संवाद बनाए रखना आवश्यक है। उनका कहना है कि किसी विद्वान के विचारों से असहमति होना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है, लेकिन व्यक्तिगत टिप्पणी या उपहास उचित नहीं माना जा सकता। शिक्षाविदों ने कहा कि ऐसे बयान शिक्षा और शोध से जुड़े लोगों के सम्मान को प्रभावित करते हैं और इससे स्वस्थ अकादमिक वातावरण पर भी असर पड़ सकता है।

Priyanka Gandhi: प्रो. कामकोटि की उपलब्धियों का किया उल्लेख

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद स्थित एमडीआई की निदेशक जयंति रंजन ने कहा कि प्रो. वी. कामकोटि देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों में शामिल हैं और उनका शोध कार्य उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने कहा कि लोगों को किसी भी टिप्पणी से पहले संबंधित व्यक्ति के योगदान और उपलब्धियों की जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रो. कामकोटि ने शिक्षा, अनुसंधान और तकनीकी विकास के क्षेत्र में लंबे समय तक काम किया है। उनके अनुसार भारत की शैक्षणिक विरासत और शोध कार्यों पर गर्व किया जाना चाहिए, न कि उनका उपहास उड़ाया जाना चाहिए।

अकादमिक बहस और व्यक्तिगत टिप्पणी में अंतर

आईआईटी खड़गपुर के निदेशक प्रो. सुमन चक्रवर्ती ने कहा कि किसी वैज्ञानिक या शिक्षाविद के विचारों की आलोचना पूरी तरह स्वीकार्य है, लेकिन वह आलोचना शोध, शिक्षा या पेशेवर विषयों तक सीमित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत टिप्पणियां अकादमिक गरिमा के अनुरूप नहीं हैं। रीवा स्थित महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति प्रो. शुभा तिवारी ने भी कहा कि वैज्ञानिक सोच का मतलब हर विषय के पक्ष और विपक्ष को तर्क के आधार पर सुनना है। यदि किसी बात से असहमति हो तो उसका उत्तर तथ्यों और शोध के आधार पर दिया जाना चाहिए।

Priyanka Gandhi: सम्मानजनक संवाद की आवश्यकता पर जोर

भोपाल के एलएनसीटी विश्वविद्यालय के कुलपति नरेंद्र कुमार थापक ने कहा कि संविधान हर व्यक्ति की गरिमा और सम्मान की रक्षा करने की बात करता है। इसलिए सार्वजनिक जीवन में किसी भी व्यक्ति के प्रति सम्मानजनक भाषा का प्रयोग होना चाहिए। उदयपुर के मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कैलाश डागा ने भी प्रो. कामकोटि का समर्थन करते हुए कहा कि देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रो. वी. कामकोटि जैसे विद्वान ने शिक्षा और शोध के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, इसलिए उन पर की गई व्यक्तिगत टिप्पणी उचित नहीं मानी जा सकती।

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