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28 अगस्त को रक्षाबंधन: भाई न हो तो इष्टदेव को बांधें राखी, रक्षासूत्र के साथ पढ़ें राजा बलि का मंत्र

रक्षासूत्र बांधने का सही मंत्र और नियम

Raksha Bandhan Rituals: शुक्रवार, 28 अगस्त को रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा। इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं रहेगा। ऐसे में बहनें पूरे दिन अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। इस दिन राखी बांधने के साथ रक्षासूत्र का मंत्र पढ़ने की भी परंपरा है। मान्यता है कि मंत्र के साथ रक्षासूत्र बांधने से भाई को नकारात्मकता और परेशानियों से बचाने में मदद मिलती है।इस साल रक्षाबंधन के दिन चंद्र ग्रहण भी पड़ रहा है, लेकिन यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए इसका सूतक भी मान्य नहीं होगा। ऐसे में पूरे दिन धार्मिक और शुभ कार्य किए जा सकेंगे।

Raksha Bandhan Rituals: रक्षासूत्र सिर्फ भाई-बहन तक सीमित नहीं

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, रक्षासूत्र को केवल भाई-बहन के रिश्ते से जोड़कर नहीं देखा जाता। यह सुरक्षा, मंगलकामना और शुभता का प्रतीक भी माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, रक्षासूत्र धारण करने से मन में सकारात्मक विचार आते हैं और मानसिक शांति प्राप्त होती है।आमतौर पर रक्षाबंधन पर बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है। हालांकि, इस परंपरा का दायरा इससे कहीं बड़ा है। गुरु अपने शिष्य को रक्षासूत्र बांध सकते हैं और पत्नी भी अपने पति की कलाई पर इसे बांध सकती है।पौराणिक मान्यता के अनुसार, युद्ध के समय देवराज इंद्र की पत्नी शचि ने उनकी कलाई पर रक्षासूत्र बांधा था। इसके बाद से रक्षासूत्र को संकट से सुरक्षा और शुभता से जोड़कर देखा जाने लगा।

राखी नहीं है तो इन चीजों से बांधें रक्षासूत्र

अगर आपके पास बाजार से खरीदी हुई राखी या रक्षासूत्र नहीं है, तो रक्षाबंधन मनाने के लिए परेशान होने की जरूरत नहीं है। रेशमी धागे को भी भाई की कलाई पर राखी की तरह बांधा जा सकता है।अगर रेशमी धागा भी उपलब्ध नहीं है, तो पूजा में इस्तेमाल होने वाला लाल धागा रक्षासूत्र के रूप में बांधा जा सकता है। वहीं, अगर इनमें से कोई भी चीज घर में मौजूद नहीं है, तो भाई के माथे पर तिलक लगाकर उसके अच्छे स्वास्थ्य, सुख और उज्ज्वल भविष्य की कामना की जा सकती है। इस तरह भी रक्षाबंधन की परंपरा निभाई जा सकती है।

भाई नहीं है तो इष्टदेव को बांधें राखी

जिन महिलाओं का कोई भाई नहीं है, वे रक्षाबंधन पर अपने इष्टदेव को रक्षासूत्र बांध सकती हैं। भगवान गणेश, देवी दुर्गा, हनुमान जी, श्रीकृष्ण, श्रीराम, भगवान शिव या जिस देवी-देवता को व्यक्ति अपना आराध्य मानता है, उन्हें राखी बांधकर अपनी श्रद्धा प्रकट की जा सकती है।यह परंपरा केवल महिलाओं तक सीमित नहीं है। पुरुष भी अपने इष्टदेव को रक्षासूत्र बांध सकते हैं। इसे भगवान के प्रति आस्था जताने और अपनी सुरक्षा के लिए प्रार्थना करने का माध्यम माना जाता है।

Raksha Bandhan Rituals: रक्षासूत्र बांधते समय पढ़ें यह मंत्र

रक्षाबंधन पर रक्षासूत्र बांधते समय राजा बलि से जुड़े एक मंत्र का जाप करने की परंपरा है। मंत्र इस प्रकार है:

येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।

इस मंत्र का भावार्थ है कि जिस तरह शक्तिशाली दैत्यराज बलि को रक्षासूत्र के माध्यम से बांधा गया था, उसी तरह यह रक्षा सूत्र भी सुरक्षा और शुभता का प्रतीक बने।जब बहन भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधती है, तो वह उसके स्वस्थ, सुखी और सुरक्षित जीवन की कामना करती है।

रक्षाबंधन से जुड़ी पौराणिक कथा

रक्षाबंधन को लेकर कई धार्मिक कथाएं प्रचलित हैं। इनमें राजा बलि और भगवान विष्णु से जुड़ी कथा को विशेष महत्व दिया जाता है।मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण करके दैत्यराज बलि से तीन पग भूमि मांगी थी। राजा बलि ने उनकी मांग स्वीकार कर ली। इसके बाद वामन रूप में भगवान विष्णु ने अपने दो कदमों में पूरी पृथ्वी और आकाश को नाप लिया।जब तीसरा कदम रखने के लिए कोई स्थान नहीं बचा, तब राजा बलि ने अपना सिर भगवान विष्णु के सामने कर दिया। उनकी दानशीलता और समर्पण से भगवान विष्णु प्रसन्न हुए। उन्होंने राजा बलि को पाताल लोक का राजा बना दिया और उससे वरदान मांगने के लिए कहा।राजा बलि ने भगवान विष्णु से ऐसा वरदान मांगा कि वे स्वयं पाताल लोक में रहकर उनकी रक्षा करें। भगवान विष्णु ने बलि की इच्छा स्वीकार कर ली और पाताल लोक में रहने लगे।

भगवान विष्णु को वापस लाने के लिए लक्ष्मी ने बांधी राखी

काफी समय बीत जाने के बाद भी जब भगवान विष्णु वैकुंठ वापस नहीं लौटे, तो देवी लक्ष्मी को इसकी जानकारी हुई। इसके बाद वे भगवान विष्णु को वापस लाने के लिए पाताल लोक पहुंचीं।पौराणिक कथा के अनुसार, देवी लक्ष्मी ने राजा बलि से कहा कि उनका कोई भाई नहीं है और वे उन्हें रक्षासूत्र बांधकर अपना भाई बनाना चाहती हैं। राजा बलि इसके लिए तैयार हो गए। इसके बाद देवी लक्ष्मी ने उनकी कलाई पर रक्षासूत्र बांधा।रक्षासूत्र बंधने के बाद राजा बलि ने अपनी बहन महालक्ष्मी से उपहार मांगने के लिए कहा। तब देवी लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को उनके दिए हुए वरदान से मुक्त करके वैकुंठ लौटने देने की इच्छा जताई।राजा बलि ने अपना वचन निभाया और भगवान विष्णु को पाताल लोक से मुक्त कर दिया। इसी कथा को रक्षाबंधन की परंपरा से जोड़कर देखा जाता है।

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