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राम माधव की वापसी और सुनील बंसल की बहाली, भाजपा में मजबूत हुई RSS की पकड़?

Ram Madhav Return:

Ram Madhav Return: भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने करीब आठ महीने की देरी के बाद अपनी नई टीम का ऐलान कर दिया है। नई टीम में राम माधव की वापसी सबसे चौंकाने वाले फैसलों में से एक मानी जा रही है। उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। इसके साथ ही RSS से जुड़े कई पुराने चेहरों को भी अहम पदों पर बरकरार रखा गया है। जानकारों के मुताबिक, इन नियुक्तियों से भाजपा संगठन में RSS की भूमिका और प्रभाव को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।

Ram Madhav Return: छह साल बाद भाजपा संगठन में राम माधव की वापसी-

RSS के प्रचारक रह चुके राम माधव करीब छह साल बाद भाजपा संगठन में वापस आए हैं। उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। यह भाजपा में उनकी दूसरी पारी है। सूत्रों के मुताबिक, उन्हें नई जिम्मेदारी देने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। 2024 में जब राम माधव को RSS से दोबारा भाजपा में भेजा गया था, तब संघ की ओर से उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिए जाने की बात कही गई थी।

Ram Madhav Return: सुनील बंसल को भी संगठन में बड़ी जिम्मेदारी-

RSS से जुड़े सुनील बंसल को राष्ट्रीय महासचिव के पद पर बरकरार रखा गया है। उत्तर प्रदेश में भाजपा की लगातार चार चुनावी जीत में उनकी अहम भूमिका रही है। बंसल ने तेलंगाना, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में भी भाजपा के संगठन को मजबूत करने और चुनावी सफलता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बंगाल में भाजपा की बड़ी चुनावी जीत में भी उनका योगदान माना जाता है।

बीएल संतोष और दो अन्य प्रचारक भी बने रहेंगे-

भाजपा के संगठन महासचिव बीएल संतोष भी अपने पद पर बने रहेंगे। इसके अलावा RSS के दो अन्य प्रचारक शिव प्रकाश और सौदान सिंह भी संगठन में सह-महामंत्री की जिम्मेदारी संभालते रहेंगे। इन नियुक्तियों को भाजपा और RSS के बीच संगठनात्मक तालमेल के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

2014 के बाद भाजपा में बढ़ा था राम माधव का प्रभाव-

राम माधव ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत RSS प्रचारक के तौर पर की थी। वह लंबे समय तक संघ के राष्ट्रीय प्रवक्ता और अखिल भारतीय सह-प्रचार प्रमुख रहे। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद RSS ने उन्हें भाजपा संगठन में भेजा था। इसके बाद उन्हें राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया। उन्होंने पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर में भाजपा के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जम्मू-कश्मीर में गठबंधन सरकार बनाने में निभाई अहम भूमिका-

जम्मू-कश्मीर में भाजपा और PDP की गठबंधन सरकार बनाने में राम माधव को प्रमुख रणनीतिकार माना जाता है। हालांकि बाद में भाजपा ने गठबंधन से अलग होने का फैसला किया। सितंबर 2020 में तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की नई टीम में राम माधव को राष्ट्रीय महासचिव पद से हटा दिया गया था। इसके बाद वह फिर RSS के काम में सक्रिय हो गए और संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य बने।

राजनीति के साथ कूटनीति में भी अनुभव-

राम माधव की पकड़ सिर्फ भाजपा संगठन तक सीमित नहीं रही है। वह अंतरराष्ट्रीय संबंधों और कूटनीति से जुड़े मामलों में भी सक्रिय रहे हैं। वह इंडिया फाउंडेशन जैसे थिंक टैंक से भी जुड़े रहे हैं और कूटनीतिक विषयों पर कई कार्यक्रमों में भाग लेते रहे हैं।

क्या राम माधव को आगे मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी-

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का पद आमतौर पर वरिष्ठ नेताओं को दिया जाता है और यह हमेशा संगठन में सबसे सक्रिय पद नहीं माना जाता। हालांकि राम माधव के पुराने संगठनात्मक अनुभव को देखते हुए यह संभावना जताई जा रही है कि आने वाले समय में उन्हें भाजपा में कोई बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। राम माधव की वापसी, सुनील बंसल की भूमिका और RSS पृष्ठभूमि वाले नेताओं की निरंतरता ने भाजपा के नए संगठनात्मक ढांचे में संघ के प्रभाव को लेकर राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है

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