Ram Mandir Donation Scam: अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। इस मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों में सबसे ज्यादा चर्चा राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव की हो रही है, जिसे इस कथित चोरी का मुख्य सूत्रधार माना जा रहा है। टिन्नू यादव कभी श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव रहे चंपत राय का बेहद करीबी और उनका पूर्व ड्राइवर रहा है। इसी वजह से पुलिस की जांच का फोकस भी लगातार उसी पर बना हुआ है।इसी सिलसिले में 29 जून को पुलिस ने चंपत राय से कई घंटों तक पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान चंपत राय ने साफ कहा कि उन्हें टिन्नू यादव से इस तरह के किसी भी गलत काम की बिल्कुल उम्मीद नहीं थी। उन्होंने बताया कि टिन्नू लंबे समय से उनके साथ जुड़ा हुआ था, लेकिन उस पर कभी ऐसा संदेह नहीं हुआ।
जांच में टिन्नू यादव की भूमिका सबसे अहम
पुलिस जांच के मुताबिक, चढ़ावे की गिनती से लेकर नकदी को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने की पूरी व्यवस्था पर टिन्नू यादव की नजर रहती थी। मंदिर परिसर में उसे विशेष पहुंच प्राप्त थी और वह उन चुनिंदा लोगों में शामिल था जिन्हें परिसर के भीतर बिना किसी रोक-टोक के आने-जाने की अनुमति थी। इतना ही नहीं, उसकी बुलेट मोटरसाइकिल को भी मंदिर परिसर के अंदर पार्क करने की इजाजत मिली हुई थी।जांच एजेंसियों का दावा है कि अब तक की बरामदगी में सबसे बड़ी रकम भी टिन्नू यादव के पास से मिली है। पुलिस के अनुसार, उसके पास से करीब 15 लाख रुपये नकद बरामद किए गए, जबकि उसके रिश्तेदार मनीष यादव से मिली रकम को जोड़ने पर यह आंकड़ा लगभग 23 लाख रुपये तक पहुंच जाता है। अब तक सभी आरोपियों से करीब 80 लाख रुपये की नकदी बरामद की जा चुकी है।
Ram Mandir Donation Scam: चंपत राय से कई अहम सवाल, चोरी में भूमिका से किया इनकार
पूरे मामले को लेकर बढ़ते राजनीतिक विवाद और विपक्ष के आरोपों के बीच पुलिस ने चंपत राय से विस्तार से पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक, उनसे मंदिर परिसर में कर्मचारियों की नियुक्ति, सुरक्षा व्यवस्था और चढ़ावे के प्रबंधन से जुड़े कई सवाल पूछे गए। हालांकि चंपत राय ने चोरी में अपनी किसी भी भूमिका से साफ इनकार किया।उन्होंने पुलिस को बताया कि जैसे ही उन्हें संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली, उन्होंने तुरंत कार्रवाई करते हुए संदिग्ध लोगों को पकड़वाने में सहयोग किया और मामले की एफआईआर दर्ज कराई। उनका कहना था कि चोरी की जानकारी मिलते ही उन्होंने जांच एजेंसियों का पूरा साथ दिया।
Ram Mandir Donation Scam: करीबियों की नियुक्ति पर भी उठे सवाल
पूछताछ के दौरान पुलिस ने यह भी जानने की कोशिश की कि आखिर टिन्नू यादव और उसके करीबी लोगों को मंदिर परिसर के इतने संवेदनशील कार्यों में कैसे लगाया गया। इस पर चंपत राय ने कहा कि जरूरतमंद लोगों को रोजगार देने के उद्देश्य से उन्हें काम दिया गया था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नियुक्तियों का फैसला केवल उनका नहीं था, बल्कि ट्रस्ट के अन्य सदस्यों की भी इसमें भूमिका रही थी।
गिरफ्तार आरोपी जेल भेजे गए, जांच का दायरा लगातार बढ़ा
इस मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों को अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। वहीं पुलिस ने जांच को और व्यापक करते हुए ट्रस्ट के पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा, पदाधिकारी गोपाल राव सहित करीब 70 लोगों को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किए हैं। इनमें कई अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल बताए जा रहे हैं।सूत्रों के अनुसार, मामले की तह तक पहुंचने के लिए पुलिस लगभग 140 गवाहों के बयान दर्ज करने की तैयारी कर रही है। राम मंदिर जैसे आस्था के केंद्र से जुड़े इस संवेदनशील मामले पर पूरे देश की नजर बनी हुई है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई नए पहलू सामने आने की संभावना भी जताई जा रही है।








