Ram mandir: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला अब और गंभीर होता जा रहा है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की शुरुआती जांच में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और निर्माण प्रभारी गोपाल राव समेत 17 लोगों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। सूत्रों के अनुसार, जांच रिपोर्ट में इनके खिलाफ FIR दर्ज करने की सिफारिश की गई है। हालांकि आरोपों के बीच चंपत राय मंगलवार को श्रीराम जन्मभूमि परिसर में बने शेषावतार मंदिर के ध्वजारोहण कार्यक्रम में शामिल हुए, लेकिन उन्होंने मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
SIT जांच में क्या मिला?
जांच के दौरान SIT को दानपात्रों की चाबियां रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के पास मिलीं। टीम ने ऐसे करीब 150 कर्मचारियों और सेवादारों को चिह्नित किया है, जिनकी आर्थिक स्थिति रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अचानक बेहतर हुई। जांच में कुछ लोगों के पास महंगी गाड़ियां और अन्य संपत्तियां मिलने की बात भी सामने आई है, जिससे संदेह और गहरा गया है।
Ram mandir: 200 करोड़ से ज्यादा की गड़बड़ी का अंदेशा
सूत्रों के मुताबिक, अब तक पांच आरोपियों की निशानदेही पर करीब 2 करोड़ रुपये की रिकवरी हो चुकी है। शुरुआती आकलन में चढ़ावे में 200 करोड़ रुपये से अधिक की कथित हेराफेरी की आशंका जताई जा रही है। SIT ने पिछले पांच वर्षों के चढ़ावे का विशेष ऑडिट कराने और पूरे वित्तीय रिकॉर्ड की दोबारा जांच कराने की भी सिफारिश की है।
Ram mandir: केजरीवाल ने SIT पर उठाए सवाल
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस जांच को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि बिना FIR के SIT गठन की वैधता पर सवाल उठते हैं और इस टीम के पास न तो समन जारी करने का अधिकार है और न ही गिरफ्तारी का। केजरीवाल ने मांग की कि मामले की जांच CBI और ED जैसी एजेंसियों को सौंपी जानी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
विहिप ने भी FIR की मांग की
विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने भी मामले को गंभीर बताते हुए तत्काल FIR दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि करोड़ों रामभक्तों की आस्था से जुड़े इस मामले को केवल आंतरिक जांच तक सीमित नहीं रखा जा सकता। दोषियों की पहचान और कार्रवाई के लिए नियमित पुलिस जांच जरूरी है, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।
पीएमओ तक पहुंची SIT रिपोर्ट
13 जून को गठित SIT ने 23 जून को अपनी 20 पन्नों की शुरुआती रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी थी। सूत्रों के अनुसार, यह रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक भी भेजी गई है। रिपोर्ट में ट्रस्ट के पुनर्गठन, किसी वरिष्ठ अधिकारी को मंदिर का CEO नियुक्त करने और वित्तीय निगरानी को मजबूत करने जैसे सुझाव दिए गए हैं।
ऑडिट रिपोर्ट ने पहले ही जताई थी चिंता
Ram mandir: इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रस्ट के गठन के कुछ समय बाद एक निजी ऑडिट फर्म ने इसकी कार्यप्रणाली को “बेहद गैर-पेशेवर” बताया था। रिपोर्ट में चंदे के रिकॉर्ड, गहनों की सूची, बैंक मिलान और डेटा सुरक्षा जैसी व्यवस्थाओं में गंभीर कमियों की ओर इशारा किया गया था। नवंबर 2025 तक ट्रस्ट को 4575 करोड़ रुपये से अधिक नकद दान मिलने का दावा किया गया है, ऐसे में चढ़ावे के प्रबंधन पर उठ रहे सवाल अब राष्ट्रीय बहस का विषय बन गए हैं।
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