Rare Disease: गुजरात के अहमदाबाद में रहने वाले 26 वर्षीय जावेद की जिंदगी एक ऐसी दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी से जूझ रही है, जिसने बचपन से ही उसके शरीर को धीरे-धीरे जकड़ लिया। कभी सामान्य बच्चों की तरह खेलने वाला जावेद आज बिना सहारे बिस्तर से भी नहीं उठ पाता। उसके शरीर के लगभग सभी जोड़ टेढ़े हो चुके हैं और हर दिन असहनीय दर्द के साथ गुजरता है। चिकित्सकों के अनुसार उसे मार्कियो सिंड्रोम नामक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी है, जिसका उपचार बेहद महंगी एंजाइम चिकित्सा से ही संभव है। इस उपचार पर हर वर्ष लगभग चार करोड़ रुपये का खर्च आता है, जो परिवार की आर्थिक क्षमता से कहीं अधिक है।
खेलते-खेलते शुरू हुई परेशानी, फिर कभी सामान्य नहीं हो पाया
जावेद बचपन में अन्य बच्चों की तरह स्कूल जाता और खेलकूद में हिस्सा लेता था। एक दिन खेलते समय वह अचानक गिर पड़ा और दोबारा अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो सका। शुरुआत में चिकित्सकों ने सामान्य मांसपेशियों की समस्या बताकर दवा दी, जबकि परिवार ने धार्मिक उपाय और मालिश का भी सहारा लिया। लेकिन समय के साथ उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई और शरीर के जोड़ों में सूजन तथा दर्द बढ़ता चला गया।
Rare Disease: जांच में सामने आई दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी
कई वर्षों तक अलग-अलग चिकित्सकों से इलाज कराने के बाद आनुवंशिक जांच कराई गई। रिपोर्ट में पता चला कि जावेद मार्कियो सिंड्रोम से पीड़ित है। इस बीमारी में शरीर के कुछ आवश्यक एंजाइम नहीं बन पाते, जिससे विशेष प्रकार के तत्व शरीर के जोड़ों, आंखों, हृदय और अन्य अंगों में जमा होने लगते हैं। इसके कारण हड्डियां टेढ़ी होने लगती हैं, जोड़ जाम हो जाते हैं और समय के साथ चलना-फिरना लगभग असंभव हो जाता है।
करीबी रिश्ते में विवाह को बताया गया प्रमुख कारण
जावेद के माता-पिता ने बताया कि उनका विवाह करीबी रिश्तेदारी में हुआ था। कई विशेषज्ञ चिकित्सकों ने उन्हें समझाया कि ऐसे विवाहों में बच्चों में आनुवंशिक बीमारियों का खतरा अधिक होता है। परिवार की दूसरी संतान हिब्बा में भी यही बीमारी पाई गई है, जबकि जुड़वा बेटे की जांच सामान्य रही। चिकित्सकों का कहना है कि माता-पिता दोनों से दोषपूर्ण जीन मिलने पर इस प्रकार की बीमारी विकसित हो सकती है।

Rare Disease: चार करोड़ रुपये सालाना इलाज, परिवार के लिए असंभव चुनौती
चिकित्सकों ने परिवार को एंजाइम चिकित्सा कराने की सलाह दी है, जिससे बीमारी की रफ्तार कुछ हद तक कम की जा सकती है। हालांकि इस उपचार का वार्षिक खर्च लगभग चार करोड़ रुपये है। परिवार अब तक इलाज और जांच पर लाखों रुपये खर्च कर चुका है, लेकिन इतनी बड़ी राशि जुटा पाना उनके लिए संभव नहीं है। जावेद आज भी हर छोटे-बड़े काम के लिए अपने माता-पिता पर निर्भर है।
विशेषज्ञों ने दी आनुवंशिक जांच और जागरूकता की सलाह
विशेषज्ञों के अनुसार मार्कियो सिंड्रोम एक अत्यंत दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें शरीर आवश्यक एंजाइम नहीं बना पाता। इससे हड्डियों का विकास प्रभावित होता है और हृदय, आंखों तथा फेफड़ों पर भी गंभीर असर पड़ सकता है। चिकित्सकों का कहना है कि जिन परिवारों में करीबी रिश्तेदारी में विवाह की परंपरा है, उन्हें विवाह से पहले आनुवंशिक परामर्श और आवश्यक जांच अवश्य करानी चाहिए। इससे कई गंभीर आनुवंशिक बीमारियों के जोखिम को समय रहते समझा और कम किया जा सकता है।
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