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RSS रजिस्ट्रेशन विवाद, कर्नाटक मंत्री ने फंडिंग और संपत्ति का मांगा ब्योरा; बढ़ा राजनीतिक दबाव

RSS News : 100 साल से भी ज्यादा पुराना संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अब रजिस्ट्रेशन को लेकर चर्चा में आ गया है। कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे RSS पर रजिस्ट्रेशन करवाने का दबाव बना रहे हैं। खरगे का कहना है कि RSS को अपना रजिस्ट्रेशन करवाना चाहिए और अपनी फंडिंग, कमाई, खर्च और संपत्ति का ब्योरा देना चाहिए। RSS की स्थापना 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी। इसकी स्थापना महाराष्ट्र के नागपुर में हुई थी। RSS खुद को सांस्कृति संगठन बताता है।उसका मकसद हिंदू संस्कृति और हिंदू एकता को बढ़ावा देना है।

उसका कहना है कि संघ में हिंदू शब्द का प्रयोग उपासना, पंथ, मजहब या रिलीजन के नाते नहीं होता है, इसलिए यह धार्मिक संगठन नहीं है। संघ के सदस्यों को स्वयंसेवक कहा जाता है। संघ में शामिल होने के लिए कोई रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं पड़ती। कोई भी व्यक्ति शाखा में जाकर स्वयंसेवक बन सकता है।

RSS की मजबूती

2014 में मोदी सरकार आने के बाद से संघ काफी मजबूत हुआ है। संघ की हर दिन लगने वाली शाखाओं की संख्या काफी बढ़ गई है।
अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (ABPS) संघ की फैसले लेने की सर्वोच्च संस्था है। ABPS की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2015 तक संघ की 51,330 शाखाएं लगती थीं।शाखा वह जगह है, जहां RSS के सदस्य रोज मिलते हैं और उन्हें वैचारिक और शारीरिक रूप से प्रशिक्षित किया जाता है।

सालभर क्या करता है संघ?

शाखा आने वाले स्वयंसेवकों को RSS प्रशिक्षित भी करता है। इसे ‘संघ शिक्षा वर्ग’ कहते हैं। 2025-26 में संघ ने 63 सामान्य और 29 विशेष शिक्षा वर्ग आयोजित किए थे. सामान्य वर्ग में 40 साल से कम उम्र के स्वयंसेवर और विशेष वर्ग में 40 से 65 साल की उम्र के स्वयंसेवक हिस्सा लेते हैं। पिछले साल 92 शिक्षा वर्ग आयोजित हुए थे, जिनमें 16,227 स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया था। शिक्षा वर्ग के अलावा विकास वर्ग भी करवाए जाते हैं।

कहां तक फैला है RSS?

आज के समय में संघ लगभग सभी राज्यों में है। उसकी शाखाओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है । हालांकि, संघ में कितने स्वयंसेवक हैं, इसका डेटा नहीं है। संघ खुद को दुनिया का सबसे बड़ा वॉलेंटियर संगठन कहता है।

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Written By : Anushka