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रूस ने आर्कटिक में तैनात किया परमाणु युद्धपोत ‘एडमिरल नखिमोव’, NATO और अमेरिका को बड़ा संदेश?

Russia news: यूक्रेन के साथ जारी युद्ध के बीच रूस ने अपना सबसे शक्तिशाली परमाणु ऊर्जा से संचालित युद्धपोत ‘एडमिरल नखिमोव’ आर्कटिक क्षेत्र में स्थित सेवेरोमोर्स्क नौसैनिक अड्डे पर तैनात कर दिया है। रक्षा विशेषज्ञ इस कदम को रूस की रणनीतिक तैयारी और पश्चिमी देशों, खासकर NATO और अमेरिका, के लिए एक अहम संकेत के रूप में देख रहे हैं।

यूक्रेन के बढ़ते ड्रोन हमलों के बीच बड़ा फैसला

रूस की यह तैनाती ऐसे समय हुई है जब यूक्रेन ने रूस के भीतर लंबी दूरी के ड्रोन हमलों की रफ्तार तेज कर दी है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने हाल ही में रूस पर दबाव बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर ड्रोन अभियान को मंजूरी दी है। रूस के रक्षा मंत्रालय का दावा है कि उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने हाल के दिनों में सैकड़ों यूक्रेनी ड्रोन को मार गिराया। वहीं, कुछ हमलों में तेल रिफाइनरी समेत कई अहम ठिकानों को नुकसान पहुंचा है और लोगों की मौत की भी खबर है।

Russia news: क्यों अहम है सेवेरोमोर्स्क?

आर्कटिक सर्कल के ऊपर स्थित सेवेरोमोर्स्क रूस के नॉर्दर्न फ्लीट का मुख्यालय है। यहां रूस की परमाणु हथियारों से लैस बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां तैनात रहती हैं। यह बेस रूस की समुद्री परमाणु सुरक्षा रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। इसकी भौगोलिक स्थिति रूस को बैरेंट्स सागर और नॉर्थ अटलांटिक तक तेज़ी से पहुंचने की सुविधा देती है। साथ ही, GIUK (ग्रीनलैंड-आइसलैंड-यूके) गैप के करीब होने के कारण यह NATO की गतिविधियों पर नजर रखने के लिहाज से भी बेहद अहम है।

Russia news: ‘एडमिरल नखिमोव’ क्यों है खास?

लंबे समय तक आधुनिकीकरण और मरम्मत के बाद सेवा में लौटे एडमिरल नखिमोव को दुनिया के सबसे शक्तिशाली युद्धपोतों में गिना जाता है। इसमें एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम, एंटी-शिप मिसाइलें और एंटी-सबमरीन क्षमताएं मौजूद हैं। इसकी भूमिका रूस की परमाणु पनडुब्बियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और किसी भी संभावित सैन्य खतरे का जवाब देना है।

अमेरिका पर भी जताई नाराजगी

रूस ने हाल ही में अमेरिका पर आरोप लगाया कि दोनों देशों के बीच हुई कुछ रणनीतिक समझ को लागू नहीं किया गया। वहीं, कुछ रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि मॉस्को को यह भी लगता है कि यूक्रेन के हमलों में पश्चिमी देशों की अप्रत्यक्ष मदद मिल रही है।

क्या पुतिन का यह रणनीतिक संदेश है?

Russia news: ऑस्ट्रियाई रक्षा विश्लेषक गेरहार्ड मैंगॉट के अनुसार, रूस की यह तैनाती केवल सैन्य तैयारी नहीं बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी हो सकती है। उनका मानना है कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यह दिखाना चाहते हैं कि रूस के पास अभी भी रणनीतिक बढ़त बनाए रखने के पर्याप्त विकल्प मौजूद हैं। हालांकि, रूस ने आधिकारिक तौर पर इस तैनाती को किसी विशेष देश के खिलाफ कदम नहीं बताया है।

 

 

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