Seema Khanna Controversy: चुनाव आयोग की आईटी प्रमुख सीमा खन्ना को लेकर उठे विवाद के बीच आयोग ने नया कार्य आवंटन आदेश जारी किया है। हालांकि, आयोग ने स्पष्ट किया है कि सीमा खन्ना की रिपोर्टिंग व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है। नए आदेश के मुताबिक, उनके जिम्मे वाले विभागों से जुड़ी फाइलें अब वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त पवन कुमार शर्मा के माध्यम से भेजी जाएंगी। यह आदेश 4 नवंबर को जारी किया गया और तत्काल प्रभाव से लागू हो गया।
Seema Khanna Controversy: सीमा खन्ना को लेकर क्या है नया आदेश?
नए आदेश के तहत सीमा खन्ना के पास मौजूद विभागों से संबंधित फाइलें वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त पवन कुमार शर्मा के जरिए भेजी जाएंगी। हालांकि, चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने NDTV को बताया कि इसे किसी बड़े प्रशासनिक बदलाव के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। अधिकारी के मुताबिक, महानिदेशक (IT) स्तर के अधिकारी पहले भी डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर (DEC) स्तर के अधिकारी को रिपोर्ट करते रहे हैं। मौजूदा व्यवस्था में भी यही स्थिति बनी हुई है। आयोग ने साफ किया है कि सीमा खन्ना की रिपोर्टिंग व्यवस्था पहले जैसी ही है।
Seema Khanna Controversy: पहले के आदेश को लेकर क्यों खड़ा हुआ था विवाद?
यह नया आदेश ऐसे समय आया है, जब चुनाव आयोग में कार्य आवंटन को लेकर पहले जारी एक आदेश पर विवाद हुआ था। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त विवेक जोशी तथा सुखबीर सिंह संधू ने कथित तौर पर उस व्यवस्था पर आपत्ति जताई थी। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में बताया था कि आयोग के भीतर कार्य आवंटन की व्यवस्था 23 सितंबर 2025 के आदेश के अनुसार ही चल रही है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि 28 जुलाई 2026 को जारी आदेश कभी लागू नहीं किया गया था।
दोनों चुनाव आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव को लिखा था पत्र
आयोग के हलफनामे के मुताबिक, 28 जुलाई 2026 का आदेश प्रतिनियुक्ति पर तैनात अतिरिक्त सचिव रैंक के एक आईएएस अधिकारी ने जारी किया था। इसके अगले दिन यानी 29 जुलाई को दोनों चुनाव आयुक्तों ने अलग-अलग पत्र लिखकर कैबिनेट सचिव के सामने अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। हलफनामे में कहा गया कि 30 जुलाई 2026 को दोनों चुनाव आयुक्तों के संयुक्त निर्देश के बाद 28 जुलाई वाला आदेश प्रभावी नहीं रहा और उसे लागू नहीं किया गया।
चुनाव आयोग ने पहले भी दी थी सफाई
सितंबर में जब यह मामला मीडिया में सामने आया था, तब चुनाव आयोग ने प्रेस नोट जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की थी। आयोग ने कहा था कि चुनाव आयुक्तों की ओर से कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र आयोग की किसी नीति या आईटी डिवीजन से जुड़े फैसले को लेकर नहीं था। आयोग के अनुसार, यह मामला प्रतिनियुक्ति पर तैनात एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित था। आयोग ने यह भी कहा था कि संबंधित अधिकारी की ओर से जारी कार्य पुनर्वितरण आदेश व्यवहार में लागू नहीं किए गए थे और आईटी डिवीजन पर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर की निगरानी कभी नहीं हटाई गई थी।
मतदाता सूची के SSR कार्यक्रम का भी ऐलान
इस बीच चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) कार्यक्रम की भी घोषणा की है। इसका उद्देश्य उन लोगों को मतदाता सूची में शामिल करना है, जो विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान छूट गए थे या पहली बार मतदान के पात्र बने हैं।
आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक:
– मतदाता सूची का मसौदा 30 नवंबर तक प्रकाशित होगा।
– दावे और आपत्तियां 12 दिसंबर तक दर्ज कराई जा सकेंगी।
– दावों और आपत्तियों का निस्तारण 16 जनवरी 2027 तक होगा।
– अंतिम मतदाता सूची 21 जनवरी 2027 को प्रकाशित की जाएगी।
SIR को लेकर पहले भी विवादों में रहा है सीमा खन्ना का नाम
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को लेकर पिछले साल से राजनीतिक विवाद जारी है। विपक्ष के कई नेताओं ने मतदाता सूची से नाम काटे जाने के आरोपों के बीच सीमा खन्ना का नाम उठाया था। इनमें पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी शामिल हैं।हालांकि, चुनाव आयोग का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट 27 मई 2026 को इस प्रक्रिया को बरकरार रख चुका है। आयोग के मुताबिक, मतदाता सूची को अधिक सटीक और अपडेटेड बनाने के लिए यह अभियान चलाया जा रहा है।








