Sharmila Dhankar: हरियाणा के रेवाड़ी जिले के छिठरोली गांव में जन्मी शरमीला धनकर की जिंदगी बचपन से ही चुनौतियों से घिरी रही। महज दो साल की उम्र में तेज बुखार के बाद उन्हें पोलियो हो गया, जिससे उनका बायां पैर प्रभावित हो गया। 18 साल की उम्र में उनकी शादी ऐसे परिवार में हुई, जहां उन्हें वर्षों तक घरेलू हिंसा और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। उन्होंने कई बार हार मानने का सोचा, लेकिन जिंदगी से लड़ने का हौसला नहीं छोड़ा।
34 की उम्र में मिला साथ, जिसने बदल दी पूरी जिंदगी
पहली शादी टूटने के बाद शरमीला ने अपने बच्चों की परवरिश के लिए आया सहित कई छोटे-बड़े काम किए। फिर उनकी जिंदगी में अजीत सिंह आए, जो उनके दूसरे पति बने। 34 साल की उम्र में अजीत ने उन्हें पैरा एथलेटिक्स में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया। 2020 में उन्होंने कोच टेकचंद के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण शुरू किया और महज एक साल के भीतर राष्ट्रीय चैंपियन बन गईं। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत का नाम रोशन किया।

40 की उम्र में रचा इतिहास
ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 40 वर्षीय शरमीला ने महिला शॉट पुट F57 स्पर्धा में 9.81 मीटर के सीज़न बेस्ट थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीत लिया। इसके साथ ही वह कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की पहली पैरा एथलेटिक्स स्वर्ण पदक विजेता बनीं। उनकी यह जीत केवल एक मेडल नहीं, बल्कि उन तमाम महिलाओं के लिए उम्मीद का संदेश है, जो मुश्किल हालात में भी अपने सपनों को जिंदा रखती हैं।
शिल्पा शायला ने भी बढ़ाया भारत का मान
शरमीला की ऐतिहासिक जीत के साथ भारत को इसी स्पर्धा में एक और पदक मिला। शिल्पा के. शायला ने 7.26 मीटर के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ कांस्य पदक अपने नाम किया। बाद में आधिकारिक समीक्षा के बाद उन्हें कांस्य पदक मिला और पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स के पैरा एथलेटिक्स में भारत ने एक ही स्पर्धा में दो पदक जीतकर नया इतिहास रच दिया।
Written by: Mahi Modi
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