Student Protest Case: NEET-UG पेपर लीक के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर समेत देश के कई हिस्सों में हुए प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम आदेश जारी किया है। अदालत ने निर्देश दिया है कि उन सभी छात्रों को तुरंत रिहा किया जाए, जिन्हें पुलिस हिरासत में लिया गया है या गिरफ्तार किया गया है और जिनके खिलाफ पहले से कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल प्रदर्शन के दौरान दर्ज किए गए मामलों के आधार पर ऐसे छात्रों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाएगी, जिनका कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।
CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश
NEET प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, असम, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और केरल सरकारों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने इन राज्यों से जवाब मांगा है।इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित जगहों के CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश दिया है, ताकि मामले की निष्पक्ष जांच की जा सके।
पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप
सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने कहा कि अलग-अलग याचिकाओं में पुलिस कार्रवाई को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं।CJI ने बताया कि एक मामले में कथित तौर पर पेलेट गन के इस्तेमाल से 19 वर्षीय युवक की आंखों की रोशनी चली गई। इसके अलावा इलेक्ट्रिक बैटन के इस्तेमाल के आरोप भी सामने आए हैं।उन्होंने कहा कि एक युवती को गंभीर चोटों के कारण ICU में भर्ती करना पड़ा। वहीं, कील लगी लाठियों के इस्तेमाल से जानलेवा चोट पहुंचाने के आरोप भी लगाए गए हैं।अदालत में यह भी बताया गया कि मीडिया से जुड़े एक व्यक्ति पर हमला किया गया, जिसके साथ बेरहमी से मारपीट करने का आरोप है। इसके अलावा सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों द्वारा हिंसा करने और एक महिला को बिना किसी उकसावे के पुलिसकर्मी द्वारा थप्पड़ मारने के आरोप भी लगाए गए हैं।CJI ने कहा कि पुलिस की कथित अत्यधिक कार्रवाई को लेकर एक अलग याचिका भी दाखिल की गई है।
निर्दोष लोगों पर अत्याचार करने वालों पर होगी कार्रवाई
CJI ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति ने अपनी सीमा पार की है और निर्दोष लोगों के साथ अत्याचार किया है, तो कानून उसके खिलाफ उचित कार्रवाई करेगा।हालांकि, इसके लिए पूरी प्रक्रिया स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी होनी जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर किसी की जिम्मेदारी तय नहीं की जाती है, तो ऐसी जांच का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।CJI ने स्पष्ट किया कि पूरे मामले की जांच होनी चाहिए और यह जांच पूरी तरह स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जानी चाहिए। जांच की व्यवस्था और टीम के गठन को लेकर फैसला बाद में बताया जाएगा।
सरकार की ओर से क्या कहा गया?
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि हिंसा में करीब 250 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। कई पुलिसकर्मियों को टांके भी लगाने पड़े हैं।उन्होंने कहा कि मामले की सच्चाई सामने आनी चाहिए। तुषार मेहता ने दावा किया कि इतनी हिंसा छात्र नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि कुछ बाहरी लोग या उपद्रवी प्रदर्शन में शामिल हो सकते हैं।उन्होंने अदालत को बताया कि सरकार के पास इससे जुड़ा डेटा मौजूद है, जिसे वह पेश करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शन में ऐसे लोग भी मौजूद थे जिन पर हत्या, दुष्कर्म और NDPS जैसे गंभीर मामले दर्ज हैं। इसलिए मामले की स्वतंत्र जांच जरूरी है।
CJI ने स्वतंत्र जांच की जरूरत बताई
CJI ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट अपने स्तर पर तथ्यों से जुड़े हर पहलू की जांच नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि अगर सबसे संतुलित भाषा में कहा जाए तो इस मामले में स्वतंत्र जांच की जरूरत का प्रथम दृष्टया आधार मौजूद है।उन्होंने कहा कि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है।
वकीलों ने भी रखी अपनी बात
अधिवक्ता मैथ्यूज नेदुमपरा ने CJI की टिप्पणी का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यह एक संतुलित और व्यावहारिक दृष्टिकोण है। उन्होंने कहा कि वह घायल लोगों के साथ हैं, लेकिन अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट की भी कुछ सीमाएं हैं।वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने कहा कि मामले से जुड़े सभी सबूत और दस्तावेज सुरक्षित रखने का आदेश पहले ही दिया जा चुका है और यह व्यवस्था आगे भी जारी रहनी चाहिए।
छात्रों के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप
याचिकाकर्ताओं ने अदालत में कई सबूत पेश किए और आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने छात्रों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया।उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत मिले अधिकारों का हनन हुआ और छात्रों पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया गया। अदालत अब इस मामले में आगे की कार्रवाई और जांच की प्रक्रिया तय करेगी।








