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Supreme Court: दिव्यांगों के लिए नियमों को और सशक्त बनाने पर विचार करे केंद्र, राज्यों को भी दिए सख्त निर्देश

 Supreme Court:

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिव्यांग व्यक्तियों के लिए सार्वजनिक स्थानों और सेवाओं तक पहुंच को अधिक आसान और बाधारहित बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार को ड्राफ्ट नियमों पर विशेषज्ञों और याचिकाकर्ताओं के सुझावों पर गंभीरता से विचार करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि नियमों को अंतिम रूप देने से पहले उन्हें और अधिक प्रभावी, त्रुटिहीन तथा लागू करने योग्य बनाया जाना चाहिए।

Supreme Court: ड्राफ्ट नियमों में सुधार के सुझावों पर करें विचार-

जस्टिस जेबी पार्डीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा कि ड्राफ्ट नियमों को आधिकारिक गजट में अधिसूचित करने से पहले विशेषज्ञों और याचिकाकर्ताओं की ओर से दिए गए सुझावों की समीक्षा की जाए। अदालत का मानना है कि इससे दिव्यांग अधिकार अधिनियम (RPWD Act) के उद्देश्य को बेहतर तरीके से लागू किया जा सकेगा।

Supreme Court: राज्यों को चार सप्ताह में राज्य आयुक्त नियुक्त करने का आदेश-

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी गंभीर चिंता जताई कि दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, अंडमान-निकोबार समेत 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अभी तक आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम के तहत राज्य आयुक्तों की नियुक्ति नहीं हुई है। पीठ ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम की धारा 79 के तहत चार सप्ताह के भीतर राज्य आयुक्तों की नियुक्ति सुनिश्चित करें। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस आदेश का सख्ती से पालन किया जाएगा और किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

केंद्र को दो आयुक्त नियुक्त करने का भी निर्देश-

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को भी निर्देश दिया कि वह मुख्य आयुक्त की सहायता के लिए चार सप्ताह के भीतर दो आयुक्तों की नियुक्ति करे, ताकि दिव्यांग व्यक्तियों के पुनर्वास और उनके अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित किया जा सके।

जनवरी में होगी अगली सुनवाई-

यह मामला वर्ष 2025 में राजीव रतूरी द्वारा दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई अगले वर्ष जनवरी में तय की है

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