Khaleda Zia: खालिदा जिया के निधन पर मोहम्मद यूनुस ने जताया शोक, बोले-राष्ट्र ने एक महान अभिभावक को खो दिया

खालिदा जिया का निधन

Khaleda Zia: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की अध्यक्ष खालिदा जिया के निधन पर अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस ने मंगलवार को गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि खालिदा जिया के जाने से देश ने लोकतंत्र की एक मजबूत संरक्षक और अनुभवी नेता खो दी है। राजनीतिक योगदान … Read more

Khaleda Zia: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का 80 वर्ष की उम्र में निधन

खालिदा जिया का निधन

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बीएनपी की चेयरपर्सन बेगम खालिदा जिया का मंगलवार सुबह ढाका में निधन हो गया। लंबे समय से बीमार चल रहीं खालिदा जिया के निधन को देश की राजनीति में एक युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है। उनके नेतृत्व और योगदान को राजनीतिक दलों व समर्थकों ने भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

बांग्लादेश में फिर भड़की हिंसा, तारिक रहमान की 17 साल बाद वापसी से बढ़ी सियासी हलचल

बांग्लादेश में बीते कुछ दिनों से एक बार फिर हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। देश के कई प्रमुख इलाकों में हिंसा, आगजनी और हमलों की घटनाएं सामने आ रही हैं। बांग्लादेश में अगला आम चुनाव 12 फरवरी 2026 को प्रस्तावित है। अगस्त 2024 में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा था।

बांग्लादेश में शरीफ उस्मान हादी को अंतिम विदाई, हजारों लोगों ने नम आंखों से दी श्रद्धांजलि

बांग्लादेश में शनिवार को इंक़िलाब मोंचो के संयोजक शरीफ उस्मान हादी को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। उनके नमाज़-ए-जनाज़ा में भारी संख्या में लोग शामिल हुए और दिवंगत नेता के लिए दुआएं की गईं। शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद पूरे बांग्लादेश में विरोध-प्रदर्शन और हिंसा की घटनाएं तेज हो गईं, जिसके चलते सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई है।

Bangladesh news: बांग्लादेश, शेख हसीना विरोधी नेता शरीफ उस्मान हादी की सिंगापुर में मौत

बांग्लादेश में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ हिंसक आंदोलन की अगुवाई करने वाले प्रमुख विपक्षी नेता शरीफ उस्मान हादी का गुरुवार को निधन हो गया। शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद बांग्लादेश में राजनीतिक तनाव और बढ़ने की आशंका है, खासकर ऐसे समय में जब चुनाव नजदीक हैं। जुलाई विद्रोह के समर्थकों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है और वे इसे “लोकतंत्र पर हमला” बता रहे हैं।