1963 का चुनाव, जाति की राजनीति और लोहिया से संवाद: दीनदयाल उपाध्याय के राजनीतिक जीवन की अनसुनी कहानी

दीनदयाल उपाध्याय का राजनीतिक जीवन कई महत्वपूर्ण प्रसंगों से जुड़ा रहा। 1963 के चुनाव में जाति को मुद्दा न बनाने से लेकर लोहिया के साथ संवाद, गैरकांग्रेसवाद, सत्ता और विचारधारा पर उनकी सोच तथा एकात्म मानववाद तक, उनका सफर अलग पहचान रखता है।