1963 का चुनाव, जाति की राजनीति और लोहिया से संवाद: दीनदयाल उपाध्याय के राजनीतिक जीवन की रोचक कहानी

दीनदयाल उपाध्याय का राजनीतिक जीवन कई महत्वपूर्ण प्रसंगों से जुड़ा रहा। 1963 के चुनाव में जाति को मुद्दा न बनाने से लेकर लोहिया के साथ संवाद, गैरकांग्रेसवाद, सत्ता और विचारधारा पर उनकी सोच तथा एकात्म मानववाद तक, उनका सफर अलग पहचान रखता है।

दलबदल की राजनीति: ‘आया राम, गया राम’ से लेकर एंटी-डिफेक्शन कानून तक का पूरा सच

भारत में आज दलबदल विरोधी कानून लोकतंत्र को स्थिर बनाए रखने का एक अहम आधार माना जाता है, लेकिन इसके पीछे एक लंबा और उथल-पुथल भरा इतिहास रहा है। लगातार अस्थिरता और दलबदल की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए 1968 में एक समिति का गठन किया गया, जिसने इस पर सख्त कानून बनाने की सिफारिश की।