क्या IVF और टेस्ट ट्यूब बेबी अलग हैं? एक्सपर्ट से जानें पूरी सच्चाई

Health Tips:

Health Tips: लगातार कई वर्षों तक बिना किसी गर्भनिरोधक के प्रयास करने के बाद भी यदि गर्भधारण नहीं होता, तो डॉक्टर कुछ मामलों में IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) की सलाह देते हैं। आम लोगों के बीच इसे अक्सर टेस्ट ट्यूब बेबी भी कहा जाता है। लेकिन क्या IVF और टेस्ट ट्यूब बेबी दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं? इस सवाल का जवाब IVF विशेषज्ञ डॉ. ऋषिकेश पाई ने दिया है।

Health Tips: क्या IVF और टेस्ट ट्यूब बेबी अलग हैं-

डॉ. ऋषिकेश पाई के अनुसार, IVF और टेस्ट ट्यूब बेबी एक ही प्रक्रिया के दो नाम हैं। मेडिकल भाषा में इसे IVF कहा जाता है, जबकि आम बोलचाल में लोग इसे टेस्ट ट्यूब बेबी कहते हैं। दोनों के बीच कोई तकनीकी अंतर नहीं है। उन्होंने बताया कि पहले फर्टिलाइजेशन प्रक्रिया को समझाने के लिए “टेस्ट ट्यूब बेबी” शब्द का इस्तेमाल किया जाता था। हालांकि, आज यह प्रक्रिया आधुनिक लैब, इनक्यूबेटर और एम्ब्रायोलॉजी सिस्टम में की जाती है, न कि किसी टेस्ट ट्यूब में।

Health Tips: क्या होता है IVF-

IVF एक Assisted Reproductive Technology (ART) है। इसमें महिला के अंडाणु (Eggs) और पुरुष के शुक्राणु (Sperm) को लैब में मिलाकर भ्रूण (Embryo) तैयार किया जाता है। इसके बाद स्वस्थ भ्रूण को महिला के गर्भाशय में ट्रांसफर किया जाता है, जहां आगे गर्भावस्था सामान्य तरीके से विकसित होती है।

किन लोगों को पड़ सकती है IVF की जरूरत-

डॉक्टर मरीज की स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर IVF की सलाह देते हैं। आमतौर पर इन स्थितियों में इसकी जरूरत पड़ सकती है—

– महिलाओं की फैलोपियन ट्यूब ब्लॉक या क्षतिग्रस्त होना।
– एंडोमेट्रियोसिस की समस्या।
– पुरुषों में स्पर्म काउंट या स्पर्म की गुणवत्ता कम होना।
– बढ़ती उम्र के कारण अंडाणुओं की संख्या और गुणवत्ता में कमी।
– PCOS जैसी समस्या के कारण अंडाणु बनने में दिक्कत।
– कैंसर के इलाज के बाद गर्भधारण की योजना।

कैसे पूरी होती है IVF की प्रक्रिया-

IVF कई चरणों में पूरी होती है। सबसे पहले महिला और पुरुष के मेडिकल टेस्ट किए जाते हैं। इसके बाद महिला को हार्मोनल इंजेक्शन देकर अंडाणु विकसित किए जाते हैं। अंडाणु निकालने के बाद लैब में उन्हें शुक्राणु के साथ फर्टिलाइज किया जाता है। स्वस्थ भ्रूण तैयार होने पर उसे गर्भाशय में ट्रांसफर किया जाता है। करीब 10 से 14 दिन बाद ब्लड टेस्ट के जरिए गर्भधारण की पुष्टि की जाती है।

किन बातों पर निर्भर करती है सफलता-

डॉ. पाई के अनुसार, IVF की सफलता महिला की उम्र, अंडाणुओं और शुक्राणुओं की गुणवत्ता, गर्भाशय की स्थिति, ओवरी रिजर्व, मोटापा और फर्टिलिटी सेंटर की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। सामान्य तौर पर 35 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं में सफलता की संभावना अधिक होती है

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 Health Tips:

Health Tips: कोविड के बाद फिटनेस को लेकर लोगों में जागरूकता काफी बढ़ी है। कई लोग रोजाना घंटों जिम में पसीना बहाते हैं, लेकिन इसके बावजूद शरीर में मनचाहा बदलाव नहीं दिखता। यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, फरीदाबाद के इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. राजीव चौधरी के अनुसार, केवल ज्यादा देर तक एक्सरसाइज करना ही फिटनेस की गारंटी नहीं है। इसके पीछे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं।

1. पूरे दिन एक्टिव न रहना-

डॉक्टर के अनुसार, सिर्फ जिम में वर्कआउट करना काफी नहीं है। पूरे दिन छोटी-छोटी शारीरिक गतिविधियां जैसे पैदल चलना, सीढ़ियां चढ़ना और घरेलू काम करना भी कैलोरी बर्न करने में मदद करते हैं। यदि बाकी समय शरीर निष्क्रिय रहता है, तो फिटनेस का असर कम हो सकता है।

2. क्रैश डाइट करना-

जल्दी वजन घटाने के लिए कई लोग क्रैश डाइट अपनाते हैं। इससे शरीर को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिलते और ऊर्जा का स्तर गिर जाता है। संतुलित आहार, पर्याप्त प्रोटीन, फाइबर, हेल्दी फैट और विटामिन लेना फिटनेस के लिए जरूरी है।

3. तनाव और नींद की कमी-

लगातार तनाव और पर्याप्त नींद न लेने से हार्मोन प्रभावित होते हैं, जिससे मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ सकता है। इसका असर वजन घटाने और फिटनेस दोनों पर पड़ता है। अच्छी नींद और तनाव नियंत्रण फिट रहने के लिए बेहद जरूरी हैं।

4. एक ही तरह की एक्सरसाइज करना-

यदि आप हमेशा एक ही तरह का वर्कआउट करते हैं, तो शरीर धीरे-धीरे उसका आदी हो जाता है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि रूटीन में स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, कार्डियो और हाई-इंटेंसिटी एक्सरसाइज को शामिल करें, ताकि पूरे शरीर का संतुलित विकास हो सके।

5. जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज करना-

ओवर एक्सरसाइज करने से शरीर को रिकवरी का समय नहीं मिल पाता। इससे थकान, जोड़ों में दर्द, मसल्स डैमेज और अगले दिन वर्कआउट करने में परेशानी हो सकती है। इसलिए शरीर की क्षमता के अनुसार ही व्यायाम करना चाहिए।

Health Tips: अच्छे रिजल्ट के लिए क्या करें

डॉक्टर के मुताबिक, ऐसा फिटनेस रूटीन अपनाएं जिसे लंबे समय तक नियमित रूप से फॉलो किया जा सके। एक्सरसाइज के साथ संतुलित आहार लें, पर्याप्त प्रोटीन और फाइबर का सेवन करें, तनाव कम रखें और पर्याप्त नींद लें। अलग-अलग तरह की एक्सरसाइज को भी अपनी दिनचर्या में शामिल करें।

Health Tips: कब लें डॉक्टर की सलाह-

यदि 3 से 6 महीने तक नियमित एक्सरसाइज और संतुलित आहार अपनाने के बाद भी कोई बदलाव न दिखे, तो डॉक्टर से सलाह लें। इसके पीछे थायराइड, पीसीओएस, इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा अत्यधिक थकान, लगातार वजन बढ़ना, बाल झड़ना या महिलाओं में पीरियड्स की अनियमितता जैसे लक्षण दिखें तो चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए

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