Tiger Shroff: टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग के मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद मुंबई पुलिस और राजस्थान पुलिस के बीच क्रेडिट को लेकर चर्चा तेज हो गई है। वारदात मुंबई में हुई, लेकिन आरोपियों को राजस्थान के कोटा में गिरफ्तार किया गया। इस कार्रवाई में दोनों राज्यों की पुलिस की अहम भूमिका रही। जहां मुंबई पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी जांच के आधार पर आरोपियों की लोकेशन का पता लगाया, वहीं राजस्थान पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए उन्हें ट्रेन से पकड़ लिया। इस बीच, मुंबई पुलिस कमिश्नर देवेन भारती की एक टिप्पणी ने क्रेडिट वॉर की चर्चा को और हवा दे दी है।
Tiger Shroff: मुंबई में वारदात, कोटा में हुई गिरफ्तारी-
टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग की घटना के बाद मुंबई पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगाले और आरोपियों की पहचान करने के साथ उनकी गतिविधियों पर नजर रखी। जांच के दौरान मुंबई पुलिस को जानकारी मिली कि आरोपी ट्रेन से जा रहे हैं। इसके बाद मुंबई पुलिस ने राजस्थान पुलिस के साथ जरूरी जानकारी साझा की। इसमें आरोपियों के चेहरे, उनकी ट्रेन और कोच से जुड़ी जानकारी शामिल थी। इन इनपुट के आधार पर राजस्थान पुलिस ने कोटा में कार्रवाई की तैयारी की और आरोपियों को पकड़ने के लिए ट्रेन की तलाशी शुरू की।
Tiger Shroff: राजस्थान पुलिस ने 15 मिनट में कैसे पकड़े आरोपी-
राजस्थान पुलिस की एसपी तेजस्विनी के मुताबिक, मुंबई पुलिस से जानकारी मिलने के बाद कोटा पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की। उनकी टीम ने महज 15 मिनट में पूरी ट्रेन की जांच की और आरोपियों को पकड़ लिया। आरोपी ट्रेन के जनरल कोच में सवार थे, जहां यात्रियों की भीड़ के कारण उन्हें पहचानना चुनौतीपूर्ण हो सकता था। इसके बावजूद पुलिस ने स्टेशन के प्रवेश और निकास द्वारों पर निगरानी रखी। इस कार्रवाई में रेलवे पुलिस का भी सहयोग मिला। राजस्थान पुलिस की तत्परता के चलते आरोपियों को कोटा में गिरफ्तार किया जा सका। इस तरह मुंबई पुलिस की जांच और राजस्थान पुलिस की जमीनी कार्रवाई ने गिरफ्तारी में अहम भूमिका निभाई।
कोटा की एसपी तेजस्विनी ने क्या कहा-
राजस्थान पुलिस की एसपी तेजस्विनी ने कार्रवाई को लेकर कहा कि अलग-अलग राज्यों की पुलिस के बीच समन्वय बेहद जरूरी है। मुंबई पुलिस से जानकारी मिलने के बाद उनकी टीम ने तेजी से काम किया और पूरी ट्रेन की जांच की। उन्होंने राजस्थान पुलिस को पेशेवर बताते हुए कहा कि उनकी टीम अपना काम बखूबी करती है। एसपी के इस बयान को राजस्थान पुलिस की त्वरित कार्रवाई की उपलब्धि के तौर पर देखा गया। हालांकि, उनके बयान में सीधे तौर पर क्रेडिट को लेकर कोई दावा नहीं किया गया, लेकिन इसे कार्रवाई में राजस्थान पुलिस की भूमिका को प्रमुखता देने के रूप में देखा गया।
मुंबई पुलिस कमिश्नर देवेन भारती ने क्या कहा-
राजस्थान पुलिस की कार्रवाई को लेकर चर्चा के बीच मुंबई पुलिस कमिश्नर देवेन भारती की एक टिप्पणी सामने आई। उन्होंने एक वॉट्सऐप ग्रुप में लिखा, “सफलता के कई बाप होते हैं, असफलता का कोई नहीं होता।” उनकी इस टिप्पणी को टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में गिरफ्तारी का श्रेय लेने को लेकर चल रही चर्चा से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, इस बयान में उन्होंने किसी पुलिस बल का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया। देवेन भारती की टिप्पणी के बाद यह सवाल उठने लगा कि जब किसी मामले में दो राज्यों की पुलिस मिलकर काम करती हैं, तो सफलता का श्रेय किसे मिलना चाहिए।
मुंबई पुलिस की भूमिका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता-
इस पूरे मामले में मुंबई पुलिस की भूमिका भी अहम रही। फायरिंग की घटना मुंबई में हुई थी, इसलिए शुरुआती जांच, सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल और आरोपियों की गतिविधियों का पता लगाने की जिम्मेदारी मुंबई पुलिस के पास थी। मुंबई पुलिस ने ही आरोपियों की पहचान और उनकी यात्रा से जुड़ी जानकारी जुटाकर राजस्थान पुलिस के साथ साझा की। इसी इनपुट के आधार पर कोटा पुलिस को आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिली। दूसरी ओर, राजस्थान पुलिस ने मिली जानकारी पर तुरंत कार्रवाई की और ट्रेन की तलाशी लेकर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। ऐसे में इस कार्रवाई को किसी एक पुलिस बल की सफलता मानने के बजाय दोनों राज्यों के बीच बेहतर तालमेल का परिणाम माना जा सकता है।
क्रेडिट की जंग कितनी जायज-
अपराधियों को पकड़ना पुलिस की जिम्मेदारी है। जब किसी मामले में अलग-अलग राज्यों की पुलिस मिलकर काम करती है, तो जांच से लेकर गिरफ्तारी तक हर स्तर पर सभी की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में मुंबई पुलिस ने आरोपियों का पता लगाने के लिए जांच और ट्रैकिंग की, जबकि राजस्थान पुलिस ने कोटा में तेजी से कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार किया। रेलवे पुलिस ने भी इस प्रक्रिया में सहयोग दिया। ऐसे में गिरफ्तारी का पूरा श्रेय किसी एक पुलिस बल को देना उचित नहीं होगा। पुलिस के बीच समन्वय और समय पर कार्रवाई ही इस मामले में सफलता की प्रमुख वजह रही। ऐसे संवेदनशील मामले में क्रेडिट को लेकर बयानबाजी के बजाय जांच और कानून-व्यवस्था पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है।
यह भी पढ़े- 2017 से पहले और अब का यूपी… CM योगी ने गिनाए बदलाव, जानिए विकास के दावों की पूरी कहानी
