Trump hellhole statement: डोनाल्ड ट्रम्प ने एक विवादित पोस्ट शेयर कर नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस पोस्ट में भारत और चीन को ‘हेल होल’ (नरक का द्वार) बताया गया है। यह सामग्री अमेरिकी लेखक और रेडियो होस्ट माइकल सैवेज के वीडियो और पत्र से ली गई है।
बर्थराइट सिटिजनशिप पर उठाए सवाल
पोस्ट में अमेरिका के जन्म आधारित नागरिकता कानून (Birthright Citizenship) की आलोचना की गई है। इसमें कहा गया है कि प्रवासी अमेरिका आकर बच्चों को जन्म देते हैं और इसके आधार पर नागरिकता हासिल कर पूरे परिवार को वहां बसाने की कोशिश करते हैं।
सैवेज ने सुझाव दिया कि इस कानून पर फैसला अदालतों के बजाय देशव्यापी वोटिंग से होना चाहिए।
Trump hellhole statement: विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया
भारत की ओर से इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए रणधीर जायसवाल ने कहा कि सरकार ने इससे जुड़ी रिपोर्ट्स देखी हैं और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
Trump hellhole statement: पुराने वीडियो का टेक्स्ट शेयर
बताया जा रहा है कि यह वीडियो 1 अप्रैल को यूट्यूब पर लाइव स्ट्रीम किया गया था, जिसे ट्रम्प ने बाद में अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर चार पन्नों के टेक्स्ट के रूप में साझा किया।
टेक सेक्टर में भारत-चीन का जिक्र
चिट्ठी में कैलिफोर्निया के टेक सेक्टर का जिक्र करते हुए दावा किया गया कि वहां नौकरियों में भारतीय और चीनी लोगों का प्रभाव बढ़ रहा है, जिससे अन्य लोगों के अवसर कम हो रहे हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
प्रवासी नीतियों और संगठनों पर निशाना
पत्र में प्रवासी अधिकारों के लिए काम करने वाले American Civil Liberties Union पर भी आरोप लगाए गए हैं कि वह अवैध प्रवासियों के पक्ष में नीतियों का समर्थन करता है।
जन्म आधारित नागरिकता का इतिहास
अमेरिका में जन्म के आधार पर नागरिकता (Right of Soil) 1868 में 14वें संशोधन के तहत लागू हुई थी। इसका उद्देश्य उस समय गुलामी झेल चुके लोगों को नागरिकता देना था। हालांकि, आज के संदर्भ में इस कानून को लेकर अमेरिका में बहस तेज होती जा रही है, खासकर ‘बर्थ टूरिज्म’ को लेकर।
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