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Tuesday Special: राम भक्त हनुमान को क्यों माना जाता है शिव का 11वां रुद्रावतार? जानें धार्मिक मान्यता

Tuesday Special : सनातन धर्म में मंगलवार का दिन भगवान हनुमान की पूजा के लिए विशेष माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन बजरंगबली की आराधना करने से संकट दूर होते हैं, मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में आने वाली बाधाएं समाप्त होती हैं. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान हनुमान को भगवान शिव का 11वां रुद्रावतार माना जाता है. उनके जन्म से जुड़ी कई कथाएं प्रचलित हैं, जिनका उल्लेख विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में मिलता है.

एक पौराणिक कथा के अनुसार, दुर्वासा ऋषि के श्राप से मुक्ति पाने के लिए माता अंजना ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की. उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें अपनी संतान के रूप में जन्म लेने का वरदान दिया.

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कथा के अनुसार, एक दिन माता अंजना भगवान शिव की आराधना कर रही थीं. उसी समय अग्नि देव उनके सामने प्रकट हुए और उन्हें खीर से भरा एक पात्र दिया. इसी दौरान एक पक्षी खीर लेकर उड़ गया. दूसरी ओर माता अंजना तपस्या में लीन थीं और उनके हाथ से खीर गिर गई. उन्होंने उसे भगवान शिव का प्रसाद मानकर ग्रहण किया. इसके बाद उनके गर्भ से भगवान हनुमान का जन्म हुआ.

पवन देव से जुड़ी दूसरी कथा

एक अन्य मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के बाद भगवान शिव ने भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार के दर्शन की इच्छा जताई. भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया, जिसे देखकर भगवान शिव का दिव्य तेज प्रकट हुआ. पवन देव ने उसी तेज को माता अंजना के गर्भ में स्थापित किया. इसी कारण हनुमान जी को पवनपुत्र कहा जाता है और उन्हें भगवान शिव का 11वां रुद्रावतार माना जाता है.

धार्मिक ग्रंथों में मिलता है उल्लेख

हनुमान जी के जन्म की कथा का वर्णन आनंद रामायण में मिलता है. वहीं, भगवान शिव के 11वें रुद्रावतार के रूप में उनके अवतार का उल्लेख शिव पुराण में भी किया गया है. इन्हीं पौराणिक मान्यताओं के आधार पर भगवान हनुमान को शक्ति, भक्ति, साहस और समर्पण का प्रतीक माना जाता है.

(Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। Khabar Indiatv किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है।)

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