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N Chandrasekaran के बाद कौन संभालेगा Tata Group की कमान? TV Narendran का नाम चर्चा में

टाटा के नए चेयरमैन की रेस में TV नरेंद्रन

TV Narendran: भारत के बड़े और प्रतिष्ठित कारोबारी समूहों में शामिल टाटा ग्रुप में जल्द ही नेतृत्व में बदलाव देखने को मिल सकता है। टाटा सन्स के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने संकेत दिया है कि फरवरी 2027 में उनका मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद वह चेयरमैन के पद पर नया कार्यकाल नहीं लेंगे। इसके बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि टाटा ग्रुप की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाएगी?इसी बीच टाटा स्टील के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर टीवी नरेंद्रन का नाम संभावित उत्तराधिकारी के तौर पर कारोबारी जगत में चर्चा में है। हालांकि, अभी तक उनके नाम पर कोई आधिकारिक फैसला या घोषणा नहीं हुई है। अगले चेयरमैन के चयन की प्रक्रिया अभी जारी है।

उत्तराधिकारी की तलाश क्यों शुरू हुई?

एन चंद्रशेखरन के संकेतों के बाद टाटा ग्रुप के मुख्यालय बॉम्बे हाउस में नए चेयरमैन को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। टाटा सन्स में नेतृत्व का फैसला केवल किसी एक व्यक्ति की पसंद के आधार पर नहीं होता।टाटा ट्रस्ट के पास टाटा सन्स की करीब दो-तिहाई हिस्सेदारी है। ऐसे में नए चेयरमैन के चयन में ट्रस्ट की भूमिका बेहद अहम होगी। टाटा ग्रुप की कंपनियों और ट्रस्ट से जुड़े हितधारकों के बीच गवर्नेंस और उत्तराधिकार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के बीच नए चेयरमैन का चुनाव एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है।

TV नरेंद्रन क्यों हैं चर्चा में?

टीवी नरेंद्रन टाटा ग्रुप के सबसे अनुभवी वरिष्ठ अधिकारियों में से एक हैं। वह इस समय टाटा स्टील के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। टाटा ग्रुप में उनका लंबा अनुभव और बड़े कारोबार को संभालने की क्षमता उनकी प्रमुख खूबियों में गिनी जाती है।नरेंद्रन ने एनआईटी त्रिची से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और इसके बाद IIM कलकत्ता से मैनेजमेंट की शिक्षा हासिल की। वह 1988 में टाटा स्टील के जरिए टाटा ग्रुप से जुड़े थे। इस तरह टाटा ग्रुप के साथ उनका संबंध करीब चार दशक पुराना है।

करीब चार दशक का अनुभव

टाटा स्टील में लंबे करियर के दौरान नरेंद्रन ने सेल्स, मार्केटिंग, इंटरनेशनल बिजनेस और मैनेजमेंट से जुड़े कई अहम पदों पर काम किया। उनके करियर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थाईलैंड में भी गुजरा, जहां उन्होंने दक्षिण-पूर्व एशिया में टाटा स्टील के कारोबार को मजबूत करने में भूमिका निभाई।इसके बाद उन्होंने भारत में टाटा स्टील के कारोबार की जिम्मेदारी संभाली और साल 2013 में कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर बने। टाटा ग्रुप के भीतर इतने लंबे समय तक अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाने का अनुभव उन्हें संभावित चेयरमैन के तौर पर मजबूत दावेदारों में शामिल करता है।

मुश्किल दौर में टाटा स्टील की कमान

नरेंद्रन के नेतृत्व में टाटा स्टील को कई चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। जिस समय उन्होंने कंपनी की जिम्मेदारी संभाली, उस दौरान स्टील इंडस्ट्री में काफी उतार-चढ़ाव था। कंपनी पर कर्ज का दबाव था और अंतरराष्ट्रीय अधिग्रहणों से जुड़ी कई चुनौतियां भी सामने थीं।उनके नेतृत्व में कंपनी ने कर्ज घटाने, कैश फ्लो को बेहतर करने और वैल्यू-एडेड स्टील उत्पादों पर ज्यादा ध्यान देने की दिशा में काम किया। यूरोप में टाटा स्टील के कारोबार से जुड़ी मुश्किल परिस्थितियों को भी उनके कार्यकाल के दौरान संभाला गया।इसी अनुभव के कारण नरेंद्रन को बड़े और जटिल औद्योगिक कारोबार को संभालने वाला अनुभवी अधिकारी माना जाता है।

चेयरमैन की जिम्मेदारी सिर्फ कंपनी चलाना नहीं

टाटा सन्स का चेयरमैन किसी एक कंपनी का CEO नहीं होता। टाटा ग्रुप के तहत ऑटोमोबाइल, IT, स्टील, एयरलाइन, रिटेल, पावर, इलेक्ट्रॉनिक्स और फाइनेंशियल सर्विसेज जैसे कई अलग-अलग क्षेत्र आते हैं।इसलिए चेयरमैन की जिम्मेदारी काफी व्यापक होती है। इसमें ग्रुप की रणनीति तैयार करना, पूंजी का सही इस्तेमाल तय करना, निवेश से जुड़े बड़े फैसले लेना और पूरे समूह को संस्थागत स्तर पर नेतृत्व देना शामिल है।ऐसे पद के लिए अलग-अलग कारोबारों की समझ और बड़े फैसले लेने की क्षमता जरूरी होती है। इस मामले में नरेंद्रन का अनुभव महत्वपूर्ण माना जाता है। उन्होंने भारत के अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजारों, मैन्युफैक्चरिंग, श्रम संबंधों और रेगुलेटरी चुनौतियों को भी करीब से समझा है।

टाटा की संस्कृति की समझ भी अहम

टाटा ग्रुप के लिए केवल मुनाफा और कारोबारी प्रदर्शन ही महत्वपूर्ण नहीं है। समूह की अपनी संस्थागत संस्कृति और गवर्नेंस व्यवस्था भी है। इसलिए नए चेयरमैन के लिए टाटा ग्रुप की कार्यशैली, मूल्यों और आंतरिक व्यवस्था को समझना भी जरूरी होगा।नरेंद्रन लंबे समय से टाटा ग्रुप का हिस्सा हैं। उन्हें समूह की संस्कृति, अलग-अलग कंपनियों और आंतरिक कामकाज की अच्छी जानकारी है। यही वजह है कि उनका नाम संभावित उत्तराधिकारी के तौर पर चर्चा में आया है।एन चंद्रशेखरन भी टाटा ग्रुप के लंबे समय से अंदरूनी सदस्य रहे हैं। उन्होंने TCS में लंबा करियर बनाने के बाद 2017 में टाटा सन्स की कमान संभाली थी। ऐसे में नरेंद्रन का प्रोफाइल भी समूह के भीतर से ही नेतृत्व जारी रखने की सोच के अनुरूप माना जा सकता है।

क्या नरेंद्रन ही होंगे अगले चेयरमैन?

फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। टाटा सन्स ने अभी तक अगले चेयरमैन के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। नरेंद्रन का नाम केवल उन संभावित उम्मीदवारों में शामिल है, जिनकी चर्चा कारोबारी हलकों में हो रही है।उत्तराधिकार की दौड़ में दूसरे नामों की भी चर्चा हो सकती है। इसलिए अभी नरेंद्रन को पक्का उम्मीदवार मानना सही नहीं होगा।इसके अलावा नए चेयरमैन के चयन में उम्र और संभावित कार्यकाल जैसे पहलुओं पर भी विचार किया जा सकता है। टाटा ग्रुप को ऐसा नेतृत्व चाहिए होगा, जो लंबे समय तक समूह की रणनीति को आगे बढ़ाने में सक्षम हो।

नए चेयरमैन के सामने बड़ी चुनौतियां

टाटा ग्रुप के अगले चेयरमैन के सामने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होंगी। समूह इस समय एयर इंडिया को बेहतर स्थिति में लाने, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे नए क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने, टाटा कैपिटल की रणनीति और TCS की ग्रोथ जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर काम कर रहा है।नए चेयरमैन को एक तरफ नए कारोबारों में होने वाले बड़े निवेश को संभालना होगा, वहीं दूसरी ओर समूह की अलग-अलग कंपनियों के बीच पूंजी का सही और प्रभावी इस्तेमाल भी सुनिश्चित करना होगा।यानी टाटा ग्रुप के अगले चेयरमैन के लिए केवल लंबे अनुभव का होना ही पर्याप्त नहीं होगा। उन्हें बदलते कारोबारी माहौल को समझते हुए समूह की मौजूदा ताकत को बनाए रखने और नए क्षेत्रों में विकास की रणनीति को आगे बढ़ाने की चुनौती भी संभालनी होगी।

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