UP Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की आहट तेज होते ही राज्य की राजनीति भी पूरी तरह चुनावी मोड में नजर आने लगी है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में जमीनी स्तर पर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है, वहीं प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की चुनावी गतिविधियां अभी अपेक्षाकृत धीमी दिखाई दे रही हैं।
सीएम योगी ने किया सीधे जनता से संवाद
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले दो महीनों के भीतर प्रदेश के 100 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंच बनाते हुए व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया है। इस दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश के सभी 18 मंडलों का दौरा किया, विकास परियोजनाओं की समीक्षा की, करोड़ों रुपये की योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया तथा जनसभाओं के माध्यम से सीधे जनता से संवाद स्थापित किया। महज 45 दिनों के भीतर योगी आदित्यनाथ ने पूर्वांचल, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, अवध, ब्रज और बुंदेलखंड सहित लगभग पूरे प्रदेश का दौरा किया। बिजनौर, गाजियाबाद, आगरा, झांसी, मैनपुरी, वाराणसी और गोरखपुर जैसे प्रमुख जिलों में उनकी सभाएं और कार्यक्रम आयोजित हुए। सरकार की कोशिश साफ दिखाई दे रही है कि चुनाव से पहले विकास और सुशासन के एजेंडे को जनता तक मजबूती से पहुंचाया जाए।
UP Election 2027: एक रैली कर थक गए अखिलेश?
मुख्यमंत्री की सक्रियता केवल जनसभाओं तक सीमित नहीं रही। कानून-व्यवस्था की समीक्षा बैठकें, सरकारी योजनाओं की मॉनिटरिंग, संगठनात्मक कार्यक्रमों में भागीदारी, विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात और नियमित ‘जनता दर्शन’ के जरिए वे लगातार सरकार, संगठन और आम जनता के बीच अपनी मौजूदगी बनाए हुए हैं। वहीं, समाजवादी पार्टी की बात करें तो पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपनी आखिरी बड़ी सार्वजनिक रैली मार्च में गाजियाबाद के दादरी क्षेत्र में की थी, जिसे पार्टी के 2027 चुनाव अभियान की शुरुआत माना गया था। हालांकि इसके बाद करीब चार महीने बीत चुके हैं, लेकिन उनकी ओर से कोई बड़ी जनसभा आयोजित नहीं की गई है। इस दौरान उनकी राजनीतिक सक्रियता प्रेस कॉन्फ्रेंस, सोशल मीडिया पोस्ट और नेताओं के निजी कार्यक्रमों तक अधिक सीमित दिखाई दी।
जनसंपर्क अभियानों से दूर नजर आ रही मायावती
अगर चुनावी रैलियों और जमीनी मौजूदगी के लिहाज से तुलना करें तो फिलहाल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव के अभियान में स्पष्ट अंतर नजर आता है। भाजपा जहां लगातार बूथ स्तर तक पहुंच बनाने की रणनीति पर काम कर रही है, वहीं समाजवादी पार्टी की बड़ी चुनावी सभाओं का इंतजार अभी भी बना हुआ है। दूसरी ओर, बहुजन समाज पार्टी भी फिलहाल बड़े जनसंपर्क अभियानों से दूर दिखाई दे रही है। पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की उत्तर प्रदेश में आखिरी बड़ी रैली पिछले वर्ष 9 अक्टूबर को लखनऊ स्थित कांशीराम स्मारक स्थल पर आयोजित हुई थी। उसके बाद से पार्टी की ओर से अधिकतर राजनीतिक संदेश सोशल मीडिया और आधिकारिक बयानों के जरिए ही सामने आए हैं।
चुनाव की तैयारियों के इस शुरुआती चरण में भाजपा की आक्रामक चुनावी रणनीति और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की लगातार जमीनी मौजूदगी ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। अब राजनीतिक नजरें इस बात पर टिकी हैं कि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी अपनी चुनावी सक्रियता कब तेज करती हैं और जनता के बीच बड़े स्तर पर अभियान की शुरुआत कब करती हैं।
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