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जयंत चौधरी पर ‘चवन्‍नी’ वाली अखिलेश की टिप्पणी पर भड़कीं मायावती बोली- ‘सपा गिरगिट की तरह रंग बदल लेती…’

Mayawati lashes out Akhilesh over remarks regarding Jayant Chaudhary

UP Election 2027: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से आरएलडी और जयंत चौधरी को लेकर दिए गए बयान ‘हमने इनको चवन्नी से रुपया बना दिया है’ पर निशाना साधा है। मायावती की ओर से अखिलेश यादव के इस बयान को अहंकारी व अलोकतांत्रिक बताया गया है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर मायावती ने लिखा कि जैसा कि सर्वविदित है कि समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख द्वारा अपनी पुरानी सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय लोकदल व उस पार्टी के नेता केंद्रीय मंत्री के बारे में यह सार्वजनिक बयान देना कि ’हमने इनको चवन्नी से रुपया बना दिया है’, यह कहना पूर्णतः अमर्यादित, अशोभनीय व अति-शर्मनाक है तथा इस प्रकार की अहंकारी व अलोकतांत्रिक बयानबाजी के लिये उन्हें उस पार्टी से व उनके नेता से ही नहीं बल्कि स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह के परिवार का अपमान करने हेतु पूरे जाट समाज से भी अविलम्ब माफी मांगनी चाहिए तो यह उचित होगा। वैसे देश की राजनीति में सपा का चाल, चरित्र व चेहरा अपने विरोधी पार्टियों के लिये ही नहीं बल्कि अपने सहयोगियों के लिये भी हमेशा से राजनीतिक संकीर्णता व जातिवादी द्वेष आदि से ग्रसित ज्यादातर अप्रिय और अविश्वसनीय ही रहा है, जिस कारण इसका राजनीतिक एवं चुनावी लाभ भी अक्सर मौकों पर भाजपा ही उठाती रही है और सेक्युलर ताकतें कमजोर होती रहीं हैं।

मायावती की ओर से आगे लिखा गया, इस पार्टी के इसी प्रकार के अति-अहंकारी स्वभाव के कारण पहले सन् 1993 में, यू.पी. में मुलायम सिंह यादव के साथ सपा व बसपा का बना गठबन्धन जल्दी ही टूट गया, जिसके फलस्वरूप 2 जून 1995 को मेरी हत्या करने के षड्यन्त्र के तहत मेरे विरुद्ध कुख्यात लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस कांड हुआ। और फिर आगे चलकर इनके बेटे अखिलेश यादव द्वारा, इनके पिता की तरह पुरानी गलतियों को फिर से ना दोहराने का आश्वासन देते हुए, लोकसभा का चुनावी गठबंधन हुआ जो चुनाव का नतीजा इनके अनुरूप ना आने की वजह से कुछ समय के बाद ही बसपा के प्रति इनके अहंकारी व स्वार्थी आदि रवैये के कारण फिर यह गठबन्धन भी टूट गया, क्योंकि परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अंबेडकर के आत्म-सम्मान व स्वाभिमान के कारवां वाली पार्टी बसपा व उसकी नेतृत्व ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की सर्वसमाज हितैषी अंबेडकरवादी नीतियों व सिद्धांतों से कदापि विमुख नहीं हो सकती है।

बसप सुप्रीमो ने लिखा कि अब संक्षेप में यही कहना है कि यह पार्टी (सपा) गठबंधन के मामले में केवल अपना काम निकालना जानती है, और अपना काम निकलते ही फिर यह पार्टी गिरगिट की तरह अपना रंग बदल लेती है तथा दूसरी पार्टी के बारे में अनाप-शनाप भाषा का भी खूब इस्तेमाल करती रहती है, जो कि सपा का पुराना रवैया है। ऐसे में सर्वसमाज के लोग सपा की संकीर्ण व जातिवादी राजनीति से जरूर सावधान रहें। इसके साथ ही, यह बात भी जग-जाहिर है कि सपा मुखिया अखिलेश यादव अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए अपने पीडीए में से पी को कभी पिछड़ा वर्ग, तो कभी पी को पंडितों का हितकारी बता देते हैं, जबकि इनके बारे में सच्चाई तो यह है कि वे पिछड़े वर्गों में अपनी खुद की जाति के अलावा बाकी पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों तथा अपर कास्ट समाज में से खासकर ब्राह्मण समाज के भी कतई हितैषी नहीं रहे हैं।

इतना ही नहीं, बल्कि इस पार्टी (सपा) की सभी रही सरकारों में दलितों, पिछड़ों, अकलियतों, और अपरकास्ट समाज में से विशेषकर ब्राह्मण समाज का भी काफी शोषण व उत्पीड़न आदि किया गया है, तथा ना ही इनके हितों में कोई भी सकारात्मक कदम उठाए गए हैं, बल्कि इनकी सरकार में वास्तव में केवल गुंडों, बदमाशों, माफियाओं व अन्य अराजक तत्वों का ही भला हुआ है, और साथ ही इनकी सरकार में दिन-छिपने के बाद हमारी बहन-बेटियां भी घर से बाहर नहीं निकल सकती थीं। ऐसे में सर्वसमाज के लोग उत्तर प्रदेश आगामी विधानसभा आम चुनाव में इस पार्टी (सपा) को सत्ता में कतई भी ना आने दें, जो उनके हित में होगा।

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