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योगी सरकार के विकास मॉडल में जुड़ी नई कड़ी, काशी में भारत के पहले अर्बन रोपवे का ट्रायल तेज

CM Yogi Adityanath

काशी की सड़कों पर बढ़ते यातायात दबाव को कम करने और श्रद्धालुओं व पर्यटकों की आवाजाही आसान बनाने की दिशा में बड़ा काम अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। वाराणसी में बन रहे भारत के पहले अर्बन पब्लिक ट्रांसपोर्ट रोपवे का ट्रायल और निर्माण कार्य अंतिम चरण की ओर है। करीब 3.85 किलोमीटर लंबे कैंट-गोदौलिया रोपवे के जरिए काशी में जमीन के ऊपर आधुनिक परिवहन की नई सुविधा तैयार की जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार के कार्यकाल में काशी में सड़क, घाट, पुल और सार्वजनिक परिवहन से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट आगे बढ़े हैं। रोपवे परियोजना को भी काशी की बदलती परिवहन व्यवस्था की अहम कड़ी माना जा रहा है।

UP News: काशी की सड़कों के ऊपर दौड़ेगा यातायात
वाराणसी देश और दुनिया के प्रमुख धार्मिक-पर्यटन केंद्रों में शामिल है। यहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। बढ़ती भीड़ के साथ शहर की व्यस्त और संकरी सड़कों पर यातायात का दबाव भी बढ़ता है। इसी समस्या को देखते हुए कैंट रेलवे स्टेशन से गोदौलिया तक रोपवे तैयार किया जा रहा है। केंद्र सरकार के मुताबिक, इसके शुरू होने के बाद दोनों स्थानों के बीच यात्रा का समय करीब 45 मिनट से घटकर 16 मिनट तक हो सकता है। यानी रेलवे स्टेशन पहुंचने वाले यात्रियों के लिए काशी के प्रमुख इलाकों तक जाने का एक तेज विकल्प तैयार होगा।
योगी सरकार के लिए क्यों खास है यह परियोजना?
काशी में आधुनिक सुविधाओं को बढ़ाने के साथ शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखना भी विकास योजनाओं का अहम हिस्सा रहा है। रोपवे इसी सोच के साथ आगे बढ़ रही परियोजनाओं में शामिल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मार्च 2023 में वाराणसी कैंट से गोदौलिया तक पैसेंजर रोपवे की आधारशिला रखी थी। उस समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी कार्यक्रम में मौजूद थे। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 645 करोड़ रुपये बताई गई थी। इसके बाद परियोजना पर निर्माण का काम आगे बढ़ा और अब इसके अलग-अलग हिस्सों में परीक्षण और अंतिम काम तेजी से चल रहा है।
UP News: 5 स्टेशन, 148 गोंडोला और रोजाना हजारों यात्रियों की क्षमता
इस रोपवे में पांच स्टेशन बनाए जा रहे हैं। इनमें कैंट, काशी विद्यापीठ, रथयात्रा, गिरजाघर और गोदौलिया शामिल हैं। परियोजना में 148 गोंडोला केबिन लगाए जाने हैं। केंद्र सरकार के अनुसार, इसकी क्षमता रोजाना करीब 96 हजार यात्रियों तक की होगी। इससे काशी में आने वाले स्थानीय लोगों के साथ-साथ श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।
India’s First Urban Ropeway in Kashi
India’s First Urban Ropeway in Kashi
ट्रायल रन में परखी जा रही व्यवस्था
अब परियोजना सिर्फ निर्माण तक सीमित नहीं है। इसके अलग-अलग हिस्सों में परीक्षण का काम भी चल रहा है। हालिया निरीक्षणों में अधिकारियों ने स्टेशनों की सुरक्षा व्यवस्था, अंतिम निर्माण, साज-सज्जा और यात्रियों के चढ़ने-उतरने से जुड़ी सुविधाओं की समीक्षा की है। अगस्त 2026 में अधिकारियों ने परियोजना को नवंबर तक पूरा करने की तैयारी की जानकारी दी थी। कैंट स्टेशन से रथयात्रा वाले हिस्से का निर्माण पूरा होने और आगे के स्टेशनों पर संरेखण जांच जैसे काम चलने की बात सामने आई थी। इसका मतलब है कि अब परियोजना के अंतिम चरण में तकनीकी जांच और जरूरी व्यवस्थाओं को पूरा करने पर जोर है।
UP News: बाबा विश्वनाथ जाने वाले श्रद्धालुओं को भी फायदा
रोपवे का गोदौलिया स्टेशन काशी विश्वनाथ मंदिर क्षेत्र के नजदीक है। ऐसे में कैंट रेलवे स्टेशन या शहर के दूसरे हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मंदिर क्षेत्र तक पहुंचना आसान हो सकता है। सरकार ने शुरुआत से ही इस परियोजना को पर्यटकों, तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों की आवाजाही बेहतर करने से जोड़ा है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी रोपवे को काशी में आस्था और आधुनिक तकनीक के मेल से जुड़ी परियोजना बताया था।
काशी की पहचान भी दिखेगी रोपवे स्टेशनों में
यह परियोजना सिर्फ परिवहन सुविधा तक सीमित नहीं रखी जा रही है। स्टेशनों के डिजाइन में काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को भी जगह देने की तैयारी है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ स्टेशनों पर गंगा, नंदी, त्रिशूल, डमरू और काशी की विरासत से जुड़े कलात्मक तत्व दिखाई देंगे। इसका उद्देश्य आधुनिक परिवहन सुविधा के साथ शहर की पहचान को भी जोड़ना है।
UP News: सड़क के साथ हवा में भी बढ़ेगी काशी की कनेक्टिविटी
वाराणसी में हर साल करोड़ों श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में शहर के लिए परिवहन व्यवस्था को मजबूत करना लगातार जरूरी होता जा रहा है। केंद्र सरकार के मुताबिक, बढ़ते पर्यटक दबाव ने शहर के परिवहन नेटवर्क पर भी दबाव बढ़ाया है। ऐसे में रोपवे सड़क यातायात का विकल्प बनकर सामने आ सकता है। खासकर कैंट स्टेशन, शहर के व्यस्त बाजारों और गोदौलिया जैसे इलाकों के बीच आने-जाने वाले यात्रियों के लिए यह सुविधा अहम हो सकती है।
योगी सरकार के काशी मॉडल में एक और बड़ा अध्याय
योगी सरकार के कार्यकाल में काशी में विकास और विरासत को साथ लेकर चलने की नीति पर जोर दिया गया है। रोपवे इसी दिशा में तैयार हो रहा एक आधुनिक परिवहन ढांचा है, जो एक तरफ शहर की पुरानी पहचान के बीच नई तकनीक ला रहा है तो दूसरी तरफ यात्रियों की आवाजाही आसान करने का लक्ष्य रखता है। फिलहाल निर्माण और परीक्षण का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। नवंबर 2026 तक परियोजना पूरी करने की तैयारी की जानकारी सामने आई है, हालांकि आम यात्रियों के लिए नियमित सेवा शुरू होने की अंतिम तारीख की पुष्टि आधिकारिक घोषणा के आधार पर ही की जानी चाहिए। काशी में जब यह रोपवे पूरी तरह शुरू होगा, तब कैंट से गोदौलिया तक का सफर सड़क की भीड़ से अलग एक नए अंदाज में होगा। *योगी सरकार के दौर में काशी के बदलते परिवहन ढांचे में यह परियोजना एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में जुड़ती दिखाई दे रही है।
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