UP News: राजनीतिक पार्टियों ने उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। इन्हीं तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव एक नई रणनीति पर काम करते दिखाई देते हैं। उनकी यह रणनीति अक्सर उनके व्यवहार और काम में भी दिखाई देती है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार अखिलेश को अहसास हो चुका है कि यदि राज्य की सत्ता में फिर से लौटना है, तो भाजपा को केवल जातीय समीकरणों से मात देना काफी मुश्किल है। यही वजह है कि वे अब जनता के बीच निरंतर यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि समाजवादी पार्टी भी सनातन संस्कृति और हिंदुत्व को गंभीरता से लेती है।
क्या है अखिलेश यादव की छटपटाहट ?
अखिलेश की छटपटाहट यह है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश में हिंदुत्व और सनातन संस्कृति के बड़े ध्वजवाहक बन चुके हैं। इसके साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश में गुंडागर्दी और अपराधों का खात्मा करने के साथ ही चहुमुखी विकास का जो मॉडल पेश किया, वह भी जनता को बेहद पसंद आ रहा है। देश की जनता उन्हें भावी प्रधानमंत्री के तौर पर देख रही है। यही अखिलेश की बड़ी समस्या है कि योगी आदित्यानाथ की बढ़ती लोकप्रियता के सामने कैसे चुनाव में उतरा जाए।
UP News: क्यों असफल हो रही सपा की पारंपरिक राजनीति?
पिछले कुछ महीनों से अखिलेश यादव PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के तहत जातियों को एकजुट कर रहे हैं, लेकिन उन्हें यह भी अहसास है कि अब यूपी की सत्ता में आने के लिए सपा की पारंपरिक राजनीति कारगर साबित नहीं हो पाएगी।यही वजह है कि वे PDA फॉर्मूले के साथ ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ और सनातन को भी अपनी रणनीति का हिस्सा बनाए हुए हैं। राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े विवादों को लेकर अखिलेश कुछ ज्यादा ही मुखर रहे। इसके लिए भाजपा को कटघरे में खड़ा करते रहे। इससे पहले उन्होंने साधु-संतों व शंकराचार्यों के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार के मुद्दे को भी जोर-शोर से उठाकर यही संदेश देने की कोशिश की कि वे हिंदुत्व के प्रति गंभीर हैं।
कैसे धुलेंगे अतीत के गहरे दाग
अखिलेश अपनी नई रणनीति के तहत भले ही हिंदुत्व का चोला पहन लें, लेकिन कहते हैं कि राजनीति में अतीत के गहरे दाग धुलने से भी नहीं धुलते। कौन नहीं जानता है कि सपा के नेता मुस्लिमों को खुश करने के लिए समय-समय पर हिंदुत्व के खिलाफ कैसे बयान देते रहे हैं? फिर अखिलेश के पिता मुलायम सिंह यादव की सरकार ने राम मंदिर के कार सेवकों पर जो गोलियां चलाई थी, उन्हें जनता कैसे भूल जाएगी? जब जनता 1966 में केंद्र की तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार द्वारा गौभक्त साधु-संतों पर गोली चलाये जाने की घटना को आज तक नहीं भूल पाई है, तो 1990 में कार सेवकों पर गोली चलाए जाने की घटना को भला कैसे भूल सकती है? अखिलेश को यह बात भी याद रखनी होगी कि जब राहुल गांधी के जनेऊ धारण करने पर भी जनता का मन नहीं बदला, तो फिर जनता उन पर कैसे भरोसा कर लेगी? खासकर तब जब सपा की राजनीति का आधार ही जातिवाद और मुस्लिम तुष्टिकरण रहा हो। फिर वे जनता को कैसे विश्वास दिला सकेंगे कि योगी राज की तरह सपा शासन में गुंडागर्दी नहीं होगी?
UP News: योगी का मुकाबला करना काफी कठिन
अखिलेश यादव ने जून माह में अयोध्या को ‘सियाराम-धाम’ के रूप में विकसित करने का संकल्प जताया, लेकिन पता नहीं वे कैसा धाम बनाएंगे? अयोध्या में योगी सरकार ने पहले ही करोड़ों-अरबों रुपए के विकास कार्य कर दिये हैं। आज त्योहारों पर अयोध्या लाखों दीपकों से जगमगा उठती है। प्रतिदिन लाखों लोग रामलला के दर्शन कर रहे हैं। अयोध्या ही नहीं बल्कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तो मथुरा और काशी के विकास के लिए भी करोड़ों- अरबों रुपए की सौगात देकर लंबी लकीर खींच दी है। आखिर अखिलेश इस लंबी लकीर को कैसे मिटा पाएंगे?
रिपोर्ट- कोमल माथुर
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