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यूपी की सड़कों पर अक्टूबर में योगी सरकार का बड़ा एक्शन, 40 दिन में मरम्मत का पूरा अभियान

CM Yogi

उत्तर प्रदेश में अक्टूबर की शुरुआत सड़कों को लेकर एक बड़े अभियान के साथ हुई है। 1 अक्टूबर से 10 नवंबर तक ग्रामीण सड़कों की मरम्मत और बहाली के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके साथ ही बारिश से प्रभावित सड़कों को गड्ढामुक्त करने और त्योहारों से पहले प्रमुख मार्गों को बेहतर स्थिति में लाने पर भी सरकार का फोकस है। खास बात यह है कि इस बार सड़क सुधार को केवल एक सामान्य मरम्मत अभियान की तरह नहीं देखा जा रहा। अलग-अलग विभागों के सड़क नेटवर्क, बारिश से प्रभावित मार्गों और ग्रामीण क्षेत्रों में क्षतिग्रस्त सड़कों को चिन्हित करके समयबद्ध तरीके से काम पूरा कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।

UP News: 1 अक्टूबर से 10 नवंबर तक क्या होने वाला है?
ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल पाइपलाइन बिछाने के दौरान प्रभावित हुई सड़कों की बहाली के लिए 40 दिन का विशेष अभियान शुरू किया गया है। इस दौरान संबंधित अधिकारियों को सड़क की मरम्मत निर्धारित मानकों के अनुसार कराने और नियमित निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। 10 नवंबर के बाद भी सड़क से संबंधित शिकायत मिलने पर संबंधित एजेंसी और जिम्मेदार अभियंता की जवाबदेही तय करने की व्यवस्था बताई गई है। यानी इस अभियान में तीन चीजों पर एक साथ जोर है जिसमे आते हैं काम, समयसीमा और निगरानी।
सिर्फ गांव की सड़क नहीं, पूरे प्रदेश का रोड नेटवर्क फोकस में
सितंबर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोक निर्माण विभाग समेत संबंधित विभागों के साथ सड़क की स्थिति की समीक्षा की थी। इस समीक्षा में बारिश से प्रभावित मार्गों की मरम्मत, गड्ढामुक्त सड़क अभियान और त्योहारों से पहले प्रमुख रास्तों को दुरुस्त करने पर जोर दिया गया। सरकार के मुताबिक प्रदेश में अलग-अलग सरकारी विभागों के अधीन लगभग 4.36 लाख किलोमीटर का सड़क नेटवर्क है। इनमें से करीब 50 हजार किलोमीटर सड़कों को गड्ढामुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। त्योहारों के मद्देनजर 681 प्रमुख मार्गों को प्राथमिकता के लिए चिन्हित किया गया है। इसका मतलब यह है कि सड़क सुधार की मौजूदा कवायद केवल किसी एक जिले या एक तरह की सड़क तक सीमित नहीं है। बड़े मार्गों से लेकर ग्रामीण संपर्क सड़कों तक अलग-अलग स्तर पर काम को गति देने की कोशिश की जा रही है।
UP News: बारिश के बाद सड़कें सबसे बड़ी प्राथमिकता क्यों बनीं?
सितंबर के आखिरी सप्ताह में उत्तर प्रदेश में हुई भारी बारिश ने कई जिलों में सड़क और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को प्रभावित किया। राज्य में 25 से 27 सितंबर के बीच सामान्य से काफी अधिक बारिश दर्ज की गई और कई इलाकों में जलभराव तथा बाढ़ जैसी स्थिति बनी। ऐसे में अक्टूबर का समय सड़क मरम्मत के लिहाज से महत्वपूर्ण हो जाता है। बारिश के बाद गड्ढों और क्षतिग्रस्त हिस्सों को ठीक करना सिर्फ यातायात की सुविधा का मामला नहीं है। इसका सीधा संबंध गांव से बाजार, किसान से मंडी, मरीज से अस्पताल और आम लोगों की रोजाना आवाजाही से है। इसी वजह से सरकार ने त्योहारों से पहले प्रमुख मार्गों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं, ताकि आने वाले दिनों में बढ़ने वाली आवाजाही के दौरान लोगों को परेशानी न हो।

 

ग्रामीण सड़कों की मरम्मत और बहाली के लिए विशेष अभियान चलाए जाने की AI तस्वीर
ग्रामीण सड़कों की मरम्मत और बहाली के लिए विशेष अभियान चलाए जाने की AI तस्वीर

 

इस बार सिर्फ पैचवर्क नहीं, सड़क की स्थिति पर लगातार नजर
सड़क मरम्मत को लेकर सरकार का जोर सिर्फ तत्काल गड्ढे भरने तक सीमित नहीं बताया गया है। मुख्यमंत्री की समीक्षा में सड़कों की स्थिति की नियमित निगरानी और बारिश के बाद दोबारा सर्वे कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। ग्रामीण सड़क अभियान में एक और व्यवस्था जोड़ी गई है। जल सारथी ऐप के जरिए ग्रामीण सड़क की स्थिति की फोटो और वीडियो भेजकर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इससे सड़क की स्थिति की जानकारी सीधे डिजिटल माध्यम से संबंधित व्यवस्था तक पहुंच सकती है। यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सड़क की समस्या की जानकारी अब केवल स्थानीय कार्यालय तक शिकायत पहुंचने पर निर्भर नहीं रहती। मौके से तस्वीर और वीडियो भी निगरानी का हिस्सा बन सकते हैं।
UP News: 2011–16 के रिकॉर्ड में सड़क व्यवस्था को लेकर क्या सामने आया था?
उत्तर प्रदेश में सड़क निर्माण और रखरखाव की पुरानी व्यवस्था को समझने के लिए CAG की 2017 रिपोर्ट  Contract Management in Road Works महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इस रिपोर्ट ने 2011 से 2016 के बीच सड़क कार्यों की जांच की थी। CAG के मुताबिक उस अवधि में राज्य सरकार ने PMGSY को छोड़कर विभिन्न सड़कों के निर्माण और रखरखाव पर ₹40,854.63 करोड़ खर्च किए थे। लेकिन ऑडिट में टेंडरिंग प्रक्रिया और ठेका प्रबंधन के कई चरणों में गंभीर अनियमितताएं दर्ज की गईं। रिपोर्ट में सड़क डिजाइन और लागत अनुमान के मूल मानकों का पालन न होने, टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा की कमी तथा सड़क की गुणवत्ता और सरकारी हितों की पर्याप्त सुरक्षा न होने जैसी बातें दर्ज हैं। यही वह पृष्ठभूमि है जिसमें आज की सड़क व्यवस्था को देखना दिलचस्प हो जाता है।
अब सड़क सिर्फ बनाने की नहीं, लगातार मॉनिटर करने की व्यवस्था
मौजूदा अभियान में सरकार ने सड़क की स्थिति की समीक्षा को अलग-अलग स्तरों से जोड़ने की कोशिश की है। एक तरफ मुख्यमंत्री स्तर पर PWD और दूसरे विभागों की समीक्षा हो रही है, दूसरी तरफ प्राथमिकता वाले मार्गों की सूची तैयार की जा रही है। ग्रामीण सड़कों के लिए अलग समयसीमा तय है और वहां डिजिटल शिकायत व्यवस्था भी जोड़ी गई है। इसका असर यह है कि सड़क को केवल “बना दिया गया” वाली परियोजना के रूप में देखने के बजाय उसके रखरखाव और मरम्मत को भी प्रशासनिक जिम्मेदारी का हिस्सा बनाया जा रहा है।
UP News: सड़क से जुड़ा काम अब विकास की रफ्तार से भी जुड़ रहा है
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में सड़क सिर्फ आवागमन का माध्यम नहीं है। सड़क नेटवर्क का सीधा प्रभाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि बाजार, छोटे उद्योग, पर्यटन और शहरों के बीच संपर्क पर पड़ता है । इसलिए अक्टूबर का यह अभियान सिर्फ बारिश के बाद गड्ढे भरने की कवायद नहीं है। एक तरफ सरकार प्रमुख मार्गों को त्योहारों से पहले दुरुस्त करने पर जोर दे रही है, दूसरी तरफ ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क बहाली के लिए निश्चित अवधि तय की गई है।
पुरानी व्यवस्था की कमियों से नई निगरानी व्यवस्था तक
उत्तर प्रदेश में सड़क क्षेत्र की कहानी केवल किलोमीटर बढ़ने की कहानी नहीं है। 2011–16 के CAG ऑडिट में जहां ठेका प्रबंधन, पारदर्शिता और गुणवत्ता को लेकर कमियां दर्ज हुई थीं, वहीं आज सड़क सुधार के काम में लक्ष्य तय करने, प्राथमिक मार्ग चिन्हित करने, वरिष्ठ स्तर पर समीक्षा और डिजिटल शिकायत जैसे तरीकों पर जोर दिखाई देता है। यूपी की सड़कों में यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सड़क का सीधा संबंध प्रदेश की विकास गति से है। बेहतर सड़क का मतलब सिर्फ आसान सफर नहीं, बल्कि गांव की मंडी तक बेहतर पहुंच, कारोबार के लिए बेहतर संपर्क, अस्पताल और स्कूल तक आसान आवाजाही और शहरों के बीच तेज कनेक्टिविटी भी है। अक्टूबर में शुरू हुआ यह अभियान इसी बड़ी तस्वीर का हिस्सा है जिसमें सड़क बने भी, समय पर सुधरे भी और उसकी निगरानी भी होती रहे। यही वह आधार है जिस पर किसी भी बड़े राज्य की विकास व्यवस्था लंबे समय तक टिकती है।

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