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मौलाना जर्जिस के बाद सपा के पूर्व सांसद एसटी हसन का विवादित बयान बोले- ‘राम-कृष्ण हो सकते है पैगंबर’

मौलाना जर्जिस के बाद सपा के पूर्व सांसद एसटी हसन का विवादित बयान

UP News: उत्तर प्रदेश में भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण को लेकर शुरू हुआ धार्मिक विवाद अब और गहरा गया है। मौलाना जर्जिस अंसारी के विवादित बयान के बाद अब समाजवादी पार्टी (सपा) के पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन का बयान भी चर्चा का विषय बन गया है। दरअसल, आज शनिवार को मुरादाबाद में पत्रकारों से बातचीत के दौरान एसटी हसन ने कहा कि कुछ मुस्लिम विद्वानों का मानना है कि श्रीराम और श्रीकृष्ण दुनिया में आए 1 लाख 24 हजार पैगंबरों में शामिल हो सकते हैं।

क्या बोले एसटी हसन?

मुरादाबाद में मीडिया से बातचीत करते हुए एसटी हसन ने कहा कि कई मुस्लिम स्कॉलर्स का ऐसा मानना है कि हो सकता है श्रीराम और श्रीकृष्ण भी दुनिया में आए 1 लाख 24 हजार पैगंबरों में से रहे हों। इतिहास बहुत पुराना है, इसलिए इस विषय पर कोई अंतिम दावा नहीं किया जा सकता। उन्होंने आगे कहा कि श्रीराम और श्रीकृष्ण दोनों ही महान व्यक्तित्व थे, जिन्होंने मानवता को महत्वपूर्ण संदेश दिए। हालांकि, उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और धार्मिक बहस तेज हो गई है।

UP News: कैसे शुरू हुआ विवाद?

इस विवाद की शुरुआत मौलाना जर्जिस अंसारी के एक बयान से हुई थी। जिन्होंने दावा किया था कि भगवान श्रीकृष्ण मुस्लिम थे और पांच वक्त की नमाज अदा करते थे। उनका कहना था कि इस दावे का आधार श्रीमद्भगवद्गीता का एक श्लोक है। मौलाना के इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश के कई जिलों, जिनमें लखनऊ की हजरतगंज कोतवाली भी शामिल है, में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। विभिन्न हिंदू संगठनों ने बयान का विरोध करते हुए इसे धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताया।

जबकि संस्कृत और धर्मशास्त्र के कई विद्वानों ने मौलाना के दावे को खारिज करते हुए कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता के जिस श्लोक का हवाला दिया गया है, उसकी व्याख्या संदर्भ से हटकर की गई है। उनका कहना है कि संबंधित श्लोक में कहीं भी नमाज, इस्लाम या नमाज की किसी विधि का उल्लेख नहीं है और उसका अर्थ पूरी तरह अलग है।

क्या बोले थे मौलाना जर्जिस अंसारी?

मौलाना जर्जिस अंसारी ने यह बयान 23 जून को झारखंड के देवघर में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान दिया था। उन्होंने कहा था कि भगवान श्रीकृष्ण पांचों वक्त नमाज पढ़ते थे और इसके लिए उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता के छठे अध्याय का हवाला दिया। उन्होंने यह भी कहा कि यदि लोग अपने धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करें तो वे इस्लाम को बेहतर तरीके से समझ पाएंगे। वहीं मौलाना जर्जिस अंसारी के बयान के बाद अब एसटी हसन के समर्थन वाले बयान ने इस विवाद को और राजनीतिक तथा धार्मिक रंग दे दिया है। एक ओर कुछ लोग इसे व्यक्तिगत धार्मिक व्याख्या बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई हिंदू संगठनों और धार्मिक नेताओं ने इसे भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के संबंध में तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का प्रयास बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है। फिलहाल यह मामला राजनीतिक बयानबाजी और कानूनी कार्रवाई, दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

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