Home » उत्तर प्रदेश » शाहजहांपुर से लखनऊ तक… 7 गोलियां खाकर भी नहीं झुके, अब पद छोड़ा, जानें IAS रिंकू सिंह राही की दिलचस्प कहानी

शाहजहांपुर से लखनऊ तक… 7 गोलियां खाकर भी नहीं झुके, अब पद छोड़ा, जानें IAS रिंकू सिंह राही की दिलचस्प कहानी

IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही
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UP News: उत्तर प्रदेश कैडर के 2022 बैच के IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही ने अचानक इस्तीफा देकर प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। अपने दो पेज के इस्तीफे में उन्होंने साफ तौर पर लिखा है कि उन्हें लंबे समय से कोई पोस्टिंग नहीं दी गई और न ही कोई जिम्मेदारी सौंपी गई। रिंकू सिंह राही ने कहा कि उन्हें लखनऊ स्थित राजस्व परिषद से अटैच तो किया गया, लेकिन जनसेवा का कोई अवसर नहीं मिला। उनका आरोप है कि शाहजहांपुर में SDM रहते हुए हुई कार्रवाई के बाद उन्हें “साइडलाइन” कर दिया गया।

क्या है पूरा मामला?

ट्रेनी IAS के रूप में रिंकू सिंह राही की तैनाती शाहजहांपुर जिले की पुवायां तहसील में SDM के तौर पर हुई थी। जॉइनिंग के बाद निरीक्षण के दौरान उन्होंने कुछ लोगों को सार्वजनिक स्थान पर पेशाब करते देखा और उन्हें मौके पर ही उठक-बैठक लगाने को कहा। इनमें एक व्यक्ति वकील का मुंशी निकला, जिसके बाद वकीलों ने विरोध शुरू कर दिया। मामला बढ़ने पर रिंकू सिंह खुद मौके पर पहुंचे और माफी मांगी। हालात शांत कराने के लिए उन्होंने खुद भी मंच पर कान पकड़कर उठक-बैठक लगाई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद शासन ने उन्हें SDM पद से हटाकर लखनऊ अटैच कर दिया। तब से उन्हें कोई नई फील्ड पोस्टिंग नहीं दी गई।

UP News: इस्तीफे में क्या लिखा?

अपने इस्तीफे में रिंकू सिंह राही ने कहा कि…

* उन्हें लंबे समय से कोई काम नहीं दिया गया
* सिर्फ अटैच रखकर निष्क्रिय किया गया
* वेतन मिल रहा है, लेकिन जनसेवा का मौका नहीं
* कार्रवाई के बाद उन्हें जानबूझकर साइडलाइन किया गया

उन्होंने यह भी इच्छा जताई कि उन्हें समाज कल्याण विभाग में भेजा जाए, जहां वे फिर से लोगों की सेवा कर सकें।

संघर्षों से भरी है रिंकू सिंह की कहानी

20 मई 1982 को अलीगढ़ (हाथरस) के एक साधारण परिवार में जन्मे रिंकू सिंह राही के पिता आटा चक्की चलाते थे। उन्होंने सरकारी स्कूल से पढ़ाई की और फिर NIT जमशेदपुर से बीटेक किया। GATE परीक्षा में उन्होंने ऑल इंडिया 17वीं रैंक हासिल की। 2004 में UPPCS पास करने के बाद वे 2008 में मुजफ्फरनगर में जिला समाज कल्याण अधिकारी बने।2009 में उन्होंने छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति योजना में करोड़ों रुपये के घोटाले का खुलासा किया। इस दौरान उन्हें रिश्वत का ऑफर भी मिला, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया। मार्च 2009 में उन पर जानलेवा हमला हुआ—उन्हें 7 गोलियां मारी गईं, जिसमें सिर पर भी गोलियां लगीं। इस हमले में उनका जबड़ा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ और एक आंख की रोशनी चली गई। हालांकि, वे मौत को मात देकर वापस लौटे।

PCS अधिकारी रहते हुए ही उन्होंने UPSC की तैयारी जारी रखी। लगातार 16 प्रयासों के बाद उन्होंने 2021 में सिविल सेवा परीक्षा पास की और AIR 683 हासिल की। 2022 बैच में उन्हें IAS और उत्तर प्रदेश कैडर मिला।

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