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‘लाल कम, भगवा ज्यादा’… अखिलेश के PDA रथ पर मायावती का सीधा हमला, जानिए क्या है मामला?

UP POLITICS: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। बसपा प्रमुख मायावती ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के प्रस्तावित ‘PDA रथ’ के रंग और पार्टी की चुनावी रणनीति को लेकर सवाल खड़े किए हैं। मायावती ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए आरोप लगाया कि रथ में सपा के पारंपरिक लाल रंग की तुलना /85 में भाजपा-आरएसएस से जुड़ा भगवा रंग अधिक दिखाई दे रहा है।

‘गिरगिट की तरह रंग बदल रहे हैं’

मायावती ने कहा कि सपा के ‘PDA रथ’ का रंग चुनावी रणनीति में बदलाव की ओर इशारा करता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह वोटों के स्वार्थ में लगातार रंग बदलने की कोशिश है या फिर सपा प्रमुख का मुस्लिम मतदाताओं से पहले जैसा भरोसा नहीं रहा। मायावती ने इसी संदर्भ में अखिलेश यादव पर ‘गिरगिट की तरह रंग बदलने’ का तंज भी कसा।

UP POLITICS: 24 सितंबर से शुरू होना है PDA रथ अभियान

रिपोर्टों के मुताबिक अखिलेश यादव 24 सितंबर को PDA रथ के जरिए अपने चुनावी अभियान की शुरुआत करने वाले हैं। इसके लिए विशेष रूप से तैयार मल्टी-एक्सल बस का इस्तेमाल किया जाएगा और कार्यक्रम के तहत उनका रायबरेली के हरचंदपुर क्षेत्र में पहुंचने का कार्यक्रम बताया गया है।

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PDA के अर्थ और नीले रंग को लेकर भी निशाना

मायावती ने अपने बयान में PDA की व्याख्या को लेकर भी सपा पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि सपा ने अलग-अलग मौकों पर ‘PD’ की अलग-अलग व्याख्या की है। साथ ही उन्होंने अखिलेश यादव के नीला रंग पहनने को लेकर भी टिप्पणी की और आरोप लगाया कि सपा खुद को अंबेडकरवादी दिखाने की कोशिश कर रही है।

UP POLITICS:  मुस्लिम मतदाताओं को लेकर भी किया दावा

मायावती ने अपने पोस्ट में दावा किया कि पिछले चुनावों में मुस्लिम समाज के बड़े हिस्से के सपा को समर्थन देने के बावजूद भाजपा सत्ता में आने से नहीं रुकी। इसी आधार पर उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मुस्लिम मतदाताओं का सपा से भरोसा कम हो रहा है। हालांकि, यह मायावती का राजनीतिक दावा है, जिसे स्वतंत्र रूप से मतदाताओं की मौजूदा राय का निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।

बसपा को लेकर मायावती ने क्या कहा?

मायावती ने इसके बाद बसपा की राजनीति और अपनी सरकारों के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कानून-व्यवस्था, जनकल्याण और विकास के मुद्दों पर पार्टी के रिकॉर्ड का हवाला दिया। उन्होंने बसपा को ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नीति और अंबेडकरवादी विचारधारा वाली पार्टी बताया। दरअसल, 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यूपी की राजनीति में दलों के बीच सामाजिक समीकरण और वोट आधार को लेकर बयानबाजी तेज हो रही है। मायावती का ताजा हमला भी इसी सियासी खींचतान की कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है।

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