Up politics: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी माहौल धीरे-धीरे गर्म होने लगा है। इसी बीच बीजेपी के राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) बृज लाल ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला है। बृज लाल ने आरोप लगाया कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते हैं, सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं की आक्रामक गतिविधियां बढ़ जाती हैं। उन्होंने हाल की कुछ घटनाओं के साथ-साथ सपा शासनकाल की पुरानी घटनाओं का जिक्र करते हुए कानून-व्यवस्था को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश की है।
चुनाव से पहले सपा पर बृज लाल का हमला
बृज लाल ने कहा कि चुनावी मौसम आते ही समाजवादी पार्टी के नेताओं की कथित गुंडागर्दी बढ़ जाती है। उन्होंने संत कबीरनगर की एक घटना का जिक्र करते हुए सपा सांसद पर निषाद समाज की आस्था को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया। बृज लाल का कहना है कि इस तरह की घटनाओं का राजनीतिक असर आने वाले चुनाव में देखने को मिल सकता है।
Up politics: रायबरेली की घटना का भी किया जिक्र
पूर्व DGP ने रायबरेली की एक घटना का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, यहां एक सपा नेता की पुलिस अधिकारियों के साथ बहस हुई और पुलिस के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया। बृज लाल ने आरोप लगाया कि पुलिस ने संयम बरता, जिसके बाद संबंधित लोगों ने पुलिस कार्रवाई के विरोध में धरना दिया। उन्होंने इसे चुनाव के पहले बढ़ती राजनीतिक आक्रामकता से जोड़कर देखा।
2011 के मुरादाबाद कांड को फिर उठाया
बृज लाल ने अपने बयान में 6 जुलाई 2011 को मुरादाबाद के मैनाठेर क्षेत्र में हुई हिंसक घटना का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, एक मामले में पुलिस कार्रवाई के बाद विवाद बढ़ा और पुलिसकर्मियों पर हमला, पथराव तथा आगजनी जैसी घटनाएं हुईं। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान तत्कालीन डीआईजी और उनके सहयोगी अधिकारी पर भी हमला हुआ था।
Up politics: अखिलेश सरकार के फैसले पर उठाए सवाल
बृज लाल ने आरोप लगाया कि 2012 में अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद इस मामले से जुड़े कई मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया हुई। उन्होंने दावा किया कि गंभीर धाराओं वाले एक मामले में भी कार्रवाई वापस लेने का प्रयास किया गया। साथ ही उन्होंने कहा कि बाद में मामला अदालत में चला और 2025 में 16 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। ये सभी दावे बृज लाल के बयान पर आधारित हैं।
2027 में कानून-व्यवस्था बनेगा बड़ा मुद्दा?
बृज लाल ने 2027 के चुनाव को कानून-व्यवस्था के सवाल से जोड़ते हुए जनता को पुराने घटनाक्रम याद रखने की अपील की। उन्होंने अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी और विजय मिश्रा जैसे अपराधियों का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि सपा शासन के दौरान ऐसे प्रभावशाली अपराधियों का दबदबा था। दूसरी ओर, सपा इन आरोपों को राजनीतिक हमले के तौर पर देखती रही है। ऐसे में 2027 के चुनाव से पहले कानून-व्यवस्था और पुराने शासनकाल का रिकॉर्ड यूपी की सियासत में एक बार फिर बड़ा चुनावी मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है।
ये भी पढ़ें…Gold Price: ₹3 लाख के पार जाएगा सोना? जेफरीज का बड़ा अनुमान, 5 सवालों में समझें









