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यूपी चुनाव से पहले सपा-कांग्रेस में पश्चिमी यूपी की सीटों का पेंच क्यों फंसा? पूरा विश्लेषण

Up Politics

Up Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत तेज हो गई है। दोनों दलों ने पिछले लोकसभा चुनाव में साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, लेकिन विधानसभा चुनाव में सीटों का बंटवारा आसान नहीं दिख रहा है। कांग्रेस ने 172 सीटों पर अपनी दावेदारी पेश की है, जबकि सपा कांग्रेस को इससे काफी कम सीटें देने के पक्ष में बताई जा रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कई सीटों को लेकर दोनों दलों के बीच पेच फंसा हुआ है।

कांग्रेस ने सपा से मांगीं 172 सीटें

कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से 172 सीटों पर अपनी दावेदारी पेश की है। पार्टी ने इन सीटों को चार श्रेणियों में बांटकर समाजवादी पार्टी को सूची सौंपी है। इनमें 75 सीटें कांग्रेस की पहली प्राथमिकता में शामिल हैं। पार्टी का मानना है कि इन सीटों पर उसका संगठन और चुनावी संभावनाएं बेहतर हैं। हालांकि, कांग्रेस ने सीटों की किसी निश्चित संख्या पर अंतिम रूप से अड़ने के बजाय गठबंधन में सम्मानजनक हिस्सेदारी की बात कही है।

Up Politics: सपा 50 से 60 सीटें देने के पक्ष में

कांग्रेस की 172 सीटों की मांग के मुकाबले समाजवादी पार्टी उसे 50 से 60 सीटें देने के पक्ष में बताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, सपा के प्रस्ताव में अवध और बुंदेलखंड की सीटों की संख्या अधिक रहने की संभावना है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को 12 से 14 सीटें देने की चर्चा भी सामने आई है। हालांकि, सीटों की संख्या और क्षेत्र को लेकर अभी अंतिम सहमति नहीं बनी है।

पश्चिमी यूपी की मुस्लिम बहुल सीटों पर कांग्रेस का दावा

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सहारनपुर, मुरादाबाद, रामपुर, बिजनौर, मेरठ, अमरोहा और संभल जैसे जिलों की कई सीटों पर कांग्रेस ने दावा किया है। कांग्रेस की रणनीति में मुस्लिम और दलित मतदाताओं की अच्छी-खासी मौजूदगी वाली सीटें महत्वपूर्ण हैं। पार्टी इन क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक पकड़ और स्थानीय संगठन के आधार पर हिस्सेदारी चाहती है। वहीं, सपा भी इन सीटों पर अपना मजबूत जनाधार होने का दावा करती रही है। इसी वजह से सीटों के चयन को लेकर बातचीत महत्वपूर्ण हो गई है।

Up Politics: 2024 लोकसभा चुनाव के नतीजों का असर

2024 के लोकसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में मिलकर चुनाव लड़ा था। समाजवादी पार्टी ने 37 और कांग्रेस ने छह लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी। इस प्रदर्शन के बाद कांग्रेस गठबंधन में अपनी भूमिका को पहले से अधिक मजबूत मान रही है। वहीं, सपा विधानसभा चुनाव में सीटों का बंटवारा अपने चुनावी आकलन और उम्मीदवारों की जीत की संभावनाओं के आधार पर करना चाहती है।

रायबरेली-अमेठी की सीटों पर भी चर्चा

पश्चिमी यूपी के अलावा रायबरेली और अमेठी की विधानसभा सीटों को लेकर भी दोनों दलों के बीच चर्चा है। कांग्रेस इन दोनों जिलों की सभी विधानसभा सीटों पर दावा कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, सपा प्रत्येक जिले में कांग्रेस को दो-दो सीटें देने के पक्ष में बताई जा रही है। रायबरेली और अमेठी कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र रहे हैं। ऐसे में इन सीटों पर सहमति बनाना गठबंधन की बातचीत का अहम हिस्सा है।

Up Politics: अब सपा की अंतिम सूची का इंतजार

कांग्रेस की ओर से सीटों की दावेदारी वाली सूची सौंपे जाने के बाद अब समाजवादी पार्टी की ओर से अपनी प्राथमिकताओं की सूची दिए जाने की चर्चा है। इसके बाद दोनों दलों के बीच सीटों की संख्या और अलग-अलग क्षेत्रों में दावेदारी पर आगे बातचीत होगी। फिलहाल पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सीटों के बंटवारे को लेकर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। दोनों दलों के बीच होने वाली आगामी बैठकों के बाद ही गठबंधन की तस्वीर साफ हो सकेगी।

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