UP Trade Show: ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026 में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों की कला, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को एक बड़ा मंच मिला है। 25 से 29 सितंबर तक चल रहे इस आयोजन में देश-विदेश से आने वाले लोग कारीगरों के हाथों से तैयार उत्पादों को देख रहे हैं और उनकी खासियत समझ रहे हैं। इस दौरान आगरा, लखनऊ, भदोही समेत कई जगहों के कारीगरों ने अपने पारंपरिक हुनर को प्रदर्शित किया। प्रदर्शनी में कुछ ऐसे हस्तनिर्मित उत्पाद भी आकर्षण का केंद्र बने, जिन्हें बनाने में कई महीने का समय लगा है।
UP Trade Show: ढाई लाख रुपये का थ्रीडी हैंडमेड कारपेट बना आकर्षण
आगरा से आए रियान भाई ने बताया कि उन्होंने हाथ से तैयार किया हुआ एक थ्रीडी कारपेट प्रदर्शनी में लगाया है। इसमें किसी मशीन का इस्तेमाल नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि कारपेट में लगी अलग-अलग आकृतियां और मूर्तियां उनके कारखाने में तैयार की गई हैं।उनके अनुसार, यह काम केवल सजावट का सामान नहीं है, बल्कि एक पारंपरिक कला है, जिसे कारीगर अपने हाथों से तैयार करते हैं। उन्होंने कहा कि विदेशों में इस तरह की कला को काफी समय से महत्व दिया जाता है, जबकि देश में अभी भी इसे उतनी पहचान नहीं मिल पाई है।रियान के मुताबिक, उनके द्वारा तैयार किए गए एक थ्रीडी कारपेट की कीमत करीब ढाई लाख रुपये है। इसे तैयार करने में करीब 3 से 4 महीने लग सकते हैं। उनके साथ जुड़े कारीगरों को इस काम के जरिए रोजगार भी मिलता है।
कृष्ण और मोर की हैंडमेड तस्वीरें भी खास
प्रदर्शनी में कृष्ण जी की एक हैंडमेड तस्वीर और मोर की कलाकृति भी लोगों का ध्यान खींच रही है। कृष्ण जी की एक कलाकृति की कीमत करीब 1 लाख रुपये बताई गई। वहीं मोर की हैंडमेड कलाकृति की कीमत करीब 35 हजार रुपये है।कारीगरों ने बताया कि हाथ से तैयार होने के कारण इन उत्पादों को बनाने में काफी समय और मेहनत लगती है। सामान्य पेंटिंग से अलग इन कलाकृतियों में थ्रीडी प्रभाव दिखाई देता है। कारपेट में बट्स, मोर, ताजमहल और दूसरी आकृतियां उभरी हुई नजर आती हैं।
दर्शकों ने कहा- बच्चों को नई चीजें देखने का मौका मिलता है
प्रदर्शनी में पहुंची एक महिला दर्शक ने इन कलाकृतियों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि पहली नजर में ही उनकी नजर इस काम पर टिक गई। उनका मानना है कि सरकार को इस तरह के आयोजन लगातार करते रहने चाहिए, ताकि लोगों और खासकर बच्चों को अलग-अलग तरह की कला और नए उत्पादों को देखने और समझने का अवसर मिले।उनके मुताबिक, ऐसे कार्यक्रमों से यह भी पता चलता है कि अलग-अलग क्षेत्रों में किस तरह का काम और विकास हो रहा है।
कारीगर बोले- प्रदर्शनी में जगह मिलना बड़ी मदद
रियान ने कहा कि उन्हें इस आयोजन में हिस्सा लेने का मौका मिलने पर खुशी है। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद दिया। उनका कहना था कि प्रदर्शनी के जरिए उन्हें अपने उत्पादों को लोगों तक पहुंचाने और उनका प्रचार करने के लिए एक जगह मिली है।उन्होंने बताया कि प्रदर्शनी के शुरुआती दिनों में कई लोग उनके स्टॉल पर पहुंचे। लोगों ने उत्पादों को देखा, उनकी तारीफ की और कई लोगों ने उनके कार्ड भी लिए। हालांकि, बातचीत के समय तक कोई बड़ी बिक्री नहीं हुई थी। कारीगरों को उम्मीद थी कि प्रदर्शनी के बाद संभावित ग्राहक आगरा में उनके संपर्कों के जरिए उत्पादों तक पहुंच सकते हैं।
UP Trade Show: छोटे फ्रेम पर तैयार होती है चिकनकारी
लखनऊ से आई एक महिला ने चिकनकारी के काम के बारे में बताया। उनके अनुसार, यह बेहद मेहनत वाला काम है। छोटे फ्रेम पर कपड़े को लगाकर छोटे-छोटे टांकों के जरिए डिजाइन तैयार किए जाते हैं। इस काम की कीमत करीब 1,500 रुपये से शुरू होती है और डिजाइन, मेहनत और काम के आधार पर यह 10 हजार, 20 हजार और 50 हजार रुपये या इससे अधिक तक पहुंच सकती है।
उन्होंने बताया कि उनकी संस्था ‘साथ सोशल वेलफेयर फाउंडेशन’ के माध्यम से बच्चों को प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण लेने के बाद उन्हीं बच्चों से काम करवाया जाता है और उन्हें वेतन भी दिया जाता है। संस्था में प्रशिक्षक हैं और वह खुद भी प्रशिक्षण देने का काम करती हैं। उन्होंने बताया कि पहले वह प्रशिक्षक के रूप में काम करती थीं, जिसके बाद उन्होंने अपनी संस्था शुरू की।
UP Trade Show: चिकनकारी को और सीधे सरकारी सहयोग की जरूरत
लखनऊ से आए कारीगरों ने बताया कि वर्ष 2023 के मुकाबले इस बार के आयोजन में कई बदलाव देखने को मिले हैं। उन्होंने कहा कि चिकनकारी का काम काफी पुराना है और इसकी शुरुआत मुगल दौर से जुड़ी मानी जाती है। आज यह कला देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई हिस्सों तक पहुंच चुकी है।हालांकि, उनका कहना था कि इस क्षेत्र को अभी और सरकारी सहयोग की जरूरत है। उन्होंने कहा कि योजनाओं और कार्यक्रमों का लाभ ऊपर से नीचे तक पहुंचते-पहुंचते काफी कम हो जाता है। उनके मुताबिक, सरकार को संस्थाओं और कारीगरों से सीधे संपर्क करके उनकी समस्याओं और जरूरतों को समझना चाहिए।
कारीगर ने कहा कि यदि योजनाओं के लिए सीधे स्वयंसेवी संस्थाओं से बात की जाए तो यह पता लगाया जा सकता है कि वास्तविक समस्या क्या है और उसका समाधान किस तरह किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि कई बार ऊपर से मिलने वाली सहायता कई चरणों से गुजरकर कारीगरों तक पहुंचती है, जिससे उनके हिस्से में केवल मेहनत का लाभ बचता है।
एयर प्यूरिफायर प्लांट में खास तकनीक का दावा
प्रदर्शनी में पर्यावरण से जुड़े उत्पाद भी देखने को मिले। यहां एक ऐसा एयर प्यूरिफायर प्लांट दिखाया गया, जिसे घर और छोटे स्थानों के लिए तैयार किया गया है। इसे दो आकारों में उपलब्ध बताया गया। छोटे आकार का मॉडल छोटे स्थानों के लिए और बड़ा मॉडल बड़े क्षेत्र के लिए इस्तेमाल किया जाता है। दोनों को इनडोर उपयोग के लिए बताया गया।उत्पाद से जुड़े प्रतिनिधि ने बताया कि इसमें पांच स्तर की फिल्टर प्रक्रिया है। पहला फिल्टर सामान्य धूल को रोकने का काम करता है, जबकि कार्बन फिल्टर गंध जैसी चीजों को फिल्टर करता है। उनके अनुसार, उत्पाद की खासियत उसका एक अतिरिक्त फिल्टर है, जिसे कंपनी की ओर से सामान्य उत्पादों की तुलना में अधिक क्षमता वाला बताया गया।उन्होंने दावा किया कि इस तकनीक के कारण फिल्टर की उपयोग अवधि बढ़ जाती है और कंपनी की ओर से करीब ढाई साल की गारंटी दी जाती है। उनके अनुसार, फिल्टर हवा से हानिकारक कणों को कम करने में मदद करता है।
UP Trade Show: पौधों की जड़ों से हवा साफ करने का दावा
प्रदर्शनी में लगाए गए पौधों के बारे में बताया गया कि उनकी जड़ों और मिट्टी में विशेष सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। कंपनी के प्रतिनिधि के अनुसार, यह व्यवस्था हवा में मौजूद कुछ कणों को सोखने में मदद करती है।उत्पाद में इस्तेमाल होने वाले मेटल जैसे हिस्से को उन्होंने वेस्ट प्लास्टिक से तैयार बताया। उनके अनुसार, यह सामग्री लंबे समय तक इस्तेमाल की जा सकती है और आसानी से खराब नहीं होती।
स्मार्ट स्नेक प्लांट में ऑटोमैटिक वाटरिंग सिस्टम
प्रदर्शनी में स्नेक प्लांट का एक स्मार्ट मॉडल भी दिखाया गया। इसमें दो चेंबर हैं। एक मॉडल में सामान्य तरीके से करीब 10 से 15 दिन के अंतर पर पानी देने की जरूरत बताई गई, जबकि दूसरे मॉडल के नीचे पानी का टैंक, सेंसर और स्प्रिंकलर लगा है।प्रतिनिधि के अनुसार, मिट्टी में नमी कम होने पर सेंसर इसे पहचानता है और सिस्टम अपने आप पानी देना शुरू कर देता है। दोनों मॉडल के फीचर लगभग समान बताए गए, लेकिन उनके आकार और कवरेज क्षेत्र में अंतर है।इसमें एयर क्वालिटी की निगरानी के लिए सेंसर भी लगाया गया है। प्रतिनिधि ने बताया कि हवा की गुणवत्ता के आधार पर सिस्टम का रंग बदलता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि अलग-अलग स्तर पर अलग रंग दिखाई देते हैं। ऑटोमेटिक मोड में एयर क्वालिटी एक तय स्तर से नीचे जाने पर सिस्टम बंद हो जाता है और स्तर बढ़ने पर फिर से काम शुरू कर देता है।
UP Trade Show: उत्पादों को विदेश तक ले जाने की तैयारी
कंपनी के प्रतिनिधि ने बताया कि फिलहाल उनके उत्पाद भारत के बाहर नहीं भेजे गए हैं, लेकिन भविष्य में इन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की योजना है। उन्होंने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी अपने उत्पाद उपलब्ध कराने की योजना का जिक्र किया।
UP Trade Show: आगरा के हस्तशिल्प को वैश्विक पहचान मिलने की उम्मीद
आगरा से आए अन्य कारीगरों ने भी प्रदर्शनी में अपने हस्तनिर्मित उत्पादों का प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि उत्पादों में ऊपर से ही नहीं, बल्कि अंदर से भी हाथ का काम किया जाता है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी में पहुंचने का तत्काल लाभ भले ही स्पष्ट नहीं दिख रहा हो, लेकिन भविष्य में इसकी पहचान और व्यापारिक संपर्क मिलने की उम्मीद है।
आगरा के कारीगरों का कहना था कि उनके क्षेत्र की कई पारंपरिक कलाएं लंबे समय से लोगों के बीच मौजूद हैं, लेकिन उन्हें देश में भी उतनी पहचान नहीं मिल पाई है। अब ऐसे आयोजनों के जरिए इन्हें बड़े बाजार तक पहुंचने का अवसर मिल रहा है। एक कारीगर ने बताया कि उनका कारोबार काफी पुराना है और उनके परिवार की कई पीढ़ियां इस काम से जुड़ी रही हैं। उनके उत्पाद विदेशों तक भी जाते रहे हैं।
कारीगरों ने कहा- ऐसे आयोजन लगातार होने चाहिए
प्रदर्शनी में मौजूद कारीगरों ने कहा कि ऐसे आयोजन स्थानीय कला और कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। उनका मानना है कि यदि अलग-अलग जिलों के पारंपरिक उत्पादों को इसी तरह बड़े मंच मिलते रहें तो कारीगरों को नए ग्राहक, बाजार और पहचान मिल सकती है।इस आयोजन में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के उत्पादों को प्रदर्शित किया जा रहा है। आधिकारिक और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, आगरा समेत कई जिलों के हस्तशिल्प, कालीन, चमड़े के सामान, जरी-जरदोजी, हस्तनिर्मित वस्तुएं और अन्य स्थानीय उत्पाद यहां प्रदर्शित किए गए हैं।
UP Trade Show: कारीगरों ने योगी आदित्यनाथ को दिया धन्यवाद
रियान समेत कई कारीगरों ने आयोजन के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताया। उनका कहना था कि उन्हें अपने उत्पादों को लोगों तक पहुंचाने के लिए एक मंच मिला है। उन्होंने ऐसे आयोजनों को आगे भी आयोजित करने और खासकर आगरा में भी इस तरह के कार्यक्रम होने की इच्छा जताई।कुछ कारीगरों ने सरकार से अपनी समस्याओं पर सीधे ध्यान देने की मांग भी की। उनका कहना था कि पारंपरिक कारीगरी को आगे बढ़ाने के लिए योजनाओं के साथ-साथ जमीनी स्तर पर कारीगरों और संस्थाओं से सीधा संवाद जरूरी है।यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026 को राज्य के स्थानीय उत्पादों और कारोबार को देश-विदेश के बाजारों से जोड़ने के मंच के तौर पर आयोजित किया जा रहा है। इस साल आयोजन में 75 जिलों के उत्पादों और अलग-अलग क्षेत्रों के उद्यमियों व कारीगरों की भागीदारी है।
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