UPITS 2026: ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026 का समापन हो गया। पांच दिनों तक चले इस आयोजन में बड़े उद्योगों, स्टार्टअप्स और नामी ब्रांड्स के साथ उत्तर प्रदेश के छोटे कारोबार और स्थानीय उत्पादों ने भी अपनी अलग पहचान बनाई। कहीं आगरा का मशहूर पेठा लोगों को आकर्षित करता दिखा, तो कहीं मेरठ के पेड़े और कासगंज का प्रसिद्ध कलाकंद लोगों की पसंद बनते नजर आए। ट्रेड शो के समापन के मौके पर खबर इंडिया की संवाददाता कोमल माथुर ने कारोबारियों, स्टॉल संचालकों और विजिटर्स से बातचीत कर जाना कि अपने स्थानीय उत्पादों को इतने बड़े मंच पर प्रदर्शित करने का उनका अनुभव कैसा रहा।
बड़े मंच पर दिखी छोटे कारोबार की बड़ी कहानी
इंडिया एक्सपो मार्ट के हॉल नंबर 16 में पहुंचते ही एक बात साफ नजर आई उत्तर प्रदेश की पहचान सिर्फ बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं है। यहां छोटे कारोबारियों के उत्पाद भी अपनी कहानी खुद बयां कर रहे थे।एक तरफ बड़े ब्रांड्स और स्टार्टअप्स थे, तो दूसरी तरफ ऐसे कारोबारी भी थे जिनके उत्पाद वर्षों से अपने शहर और जिले की पहचान बने हुए हैं।आगरा का पेठा, मथुरा के पेड़े और कासगंज का कलाकंद इसी स्थानीय पहचान की तस्वीर पेश करते नजर आए।इन उत्पादों की खासियत सिर्फ उनका स्वाद नहीं, बल्कि इनके पीछे जुड़ी हुई स्थानीय पहचान और कारोबारियों की मेहनत भी है।

कासगंज के कलाकंद को मिला बड़े बाजार से मिलने का मौका
ट्रेड शो में कासगंज के प्रसिद्ध कलाकंद ने भी लोगों का ध्यान खींचा। कासगंज की स्थानीय पहचान से जुड़े इस पारंपरिक उत्पाद को इतने बड़े मंच पर प्रदर्शित करने का मौका मिला, जहां अलग-अलग शहरों और देशों से आए लोगों की आवाजाही रही।कारोबारियों के लिए यह सिर्फ स्टॉल लगाने का मौका नहीं था। उनके लिए यह अपने जिले के स्वाद और पहचान को नए लोगों तक पहुंचाने का अवसर था।जो कलाकंद अब तक मुख्य रूप से अपने क्षेत्र की पहचान के तौर पर जाना जाता था, वही बड़े ट्रेड शो में नए ग्राहकों और संभावित बाजार के सामने पहुंचा।यही छोटे कारोबार की बड़ी कहानी है स्थानीय हुनर और उत्पाद को बड़ा मंच मिले, तो बाजार की सीमाएं भी बड़ी हो सकती हैं।आगरा का पेठा और मथुरा के पेड़े भी बने आकर्षणआगरा का नाम आते ही पेठे की मिठास याद आ जाती है। वहीं मथुरा के पेड़े भी अपनी अलग पहचान रखते हैं। ट्रेड शो में इन जैसे स्थानीय उत्पादों की मौजूदगी ने यह दिखाया कि यूपी की पहचान उसके बड़े शहरों और उद्योगों के साथ-साथ उसकी स्थानीय विरासत से भी बनती है।स्टॉल पर पहुंचे लोगों ने इन उत्पादों को देखा, उनके बारे में जाना और कारोबारियों से बातचीत भी की।कारोबारियों का कहना था कि ऐसे आयोजनों से उन्हें अपने उत्पादों को उन लोगों तक पहुंचाने का अवसर मिलता है, जो शायद पहले उनके उत्पादों के बारे में जानते तक नहीं थे।
विजिटर्स ने कहा- यहां यूपी की पूरी तस्वीर दिखाई दी
खबर इंडिया की संवाददाता कोमल माथुर ने ट्रेड शो में पहुंचे विजिटर्स से भी बातचीत की।विजिटर्स ने बताया कि एक ही जगह पर उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों के उत्पादों को देखना उनके लिए अलग अनुभव रहा।किसी को मिठाइयों ने आकर्षित किया, तो किसी की नजर स्थानीय हस्तशिल्प और दूसरे उत्पादों पर गई।कई लोगों का कहना था कि ऐसे मंच छोटे कारोबारियों के लिए जरूरी हैं, क्योंकि इससे उन्हें नए ग्राहकों और नए बाजारों से जुड़ने का मौका मिलता है।
छोटे कारोबारी बोले- हमारे जिले की पहचान यहां तक पहुंची
स्थानीय कारोबारियों के लिए सबसे खास बात यह रही कि उनके उत्पाद सिर्फ उनके जिले तक सीमित नहीं रहे।ट्रेड शो में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए विजिटर्स और विदेशी प्रतिनिधियों के बीच अपने उत्पाद को पेश करने का अवसर मिला।कारोबारियों ने बताया कि किसी भी छोटे व्यवसाय के लिए सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ उत्पाद बनाना नहीं, बल्कि उसे सही बाजार तक पहुंचाना भी है।ऐसे में UPITS जैसे मंच उनके लिए नए संपर्क, नए ग्राहक और कारोबार बढ़ाने की संभावनाएं खोल सकते हैं।

गाजियाबाद की महिला उद्यमी ने भी खींचा ध्यान
ट्रेड शो में गाजियाबाद से आई एक महिला उद्यमी भी अपने हाथों से तैयार किए गए अचार बेचती हुई नजर आईं। उन्होंने घर से तैयार होने वाले पारंपरिक स्वाद को कारोबार का रूप देते हुए अपने उत्पादों को UPITS जैसे बड़े मंच पर लोगों के सामने पेश किया। स्टॉल पर आने वाले विजिटर्स ने अचार के अलग-अलग स्वादों के बारे में जानकारी ली और महिला उद्यमी से उनके कारोबार के अनुभव भी जाने। यह तस्वीर इस बात की झलक देती है कि किस तरह घरेलू स्तर पर तैयार होने वाले उत्पाद भी बड़े मंच के जरिए नए ग्राहकों और बाजार तक पहुंच बना सकते हैं।
योगी सरकार की पहल का भी लोगों ने किया जिक्र
बातचीत के दौरान कई लोगों ने उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल का भी जिक्र किया।कारोबारियों और विजिटर्स ने कहा कि स्थानीय उत्पादों और छोटे कारोबारियों को बड़े मंच पर जगह मिलने से उन्हें अपनी पहचान को नए बाजार तक ले जाने का अवसर मिल रहा है।लोगों का कहना था कि अगर स्थानीय उत्पादों को इसी तरह लगातार बड़े प्लेटफॉर्म मिलते रहें, तो छोटे कारोबारी भी अपने कारोबार का विस्तार कर सकते हैं।बच्चों और युवाओं के लिए भी रहा खास अनुभवUPITS सिर्फ कारोबारियों के लिए ही नहीं, बल्कि बच्चों और युवाओं के लिए भी सीखने का मौका बना।विजिटर्स ने बताया कि एक ही जगह पर यूपी के अलग-अलग जिलों के उत्पाद, खान-पान, कला और कारोबार को देखना प्रदेश की विविधता को समझने का अच्छा तरीका रहा।युवाओं के लिए यह भी देखने का मौका रहा कि स्थानीय स्तर पर शुरू किया गया छोटा कारोबार किस तरह बड़े बाजार तक पहुंच सकता है।
यूपी की मिठास अब सिर्फ जिले तक सीमित नहीं
UPITS 2026 से सामने आई तस्वीर में एक तरफ बड़े उद्योग और स्टार्टअप्स दिखाई दिए, तो दूसरी तरफ छोटे कारोबारियों ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।आगरा का पेठा,मथुरा के पेड़े और कासगंज का कलाकंद सिर्फ मिठाइयां नहीं रहे, बल्कि अपने-अपने जिलों की पहचान को बड़े मंच तक लेकर पहुंचे।ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट से सामने आई इस ग्राउंड रिपोर्ट की तस्वीर यही बताती है कि जब स्थानीय उत्पादों को बड़ा मंच मिलता है, तो उनके साथ सिर्फ कारोबार नहीं बढ़ता—उनके जिले की पहचान भी नए लोगों तक पहुंचती है।
अब उम्मीद यही है कि UPITS जैसे मंचों के जरिए यूपी के छोटे कारोबारियों के उत्पाद अपने जिले से निकलकर देश के दूसरे हिस्सों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक अपनी जगह बनाते रहें।
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