H-1B and OPT Fees: अमेरिका में पढ़ाई और नौकरी का सपना देख रहे लाखों भारतीय छात्रों और टेक प्रोफेशनल्स के लिए चिंता बढ़ सकती है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन H-1B वर्क वीजा और F-1 वीजा के तहत मिलने वाले Optional Practical Training (OPT) पर नए शुल्क लगाने की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित फीस लागू होने पर अमेरिका में पढ़ाई और करियर बनाने की लागत काफी बढ़ सकती है।
H-1B and OPT Fees: H-1B और OPT पर नए शुल्क की तैयारी-
न्यूयॉर्क की इमीग्रेशन कानूनी फर्म फ्रैगोमेन के अनुसार, OPT शुल्क से जुड़ा प्रस्ताव 20 अगस्त को और H-1B याचिकाओं से संबंधित प्रस्ताव 19 अगस्त को समीक्षा के लिए Office of Management and Budget (OMB) को भेजा गया है। फिलहाल प्रस्तावित शुल्क की आधिकारिक राशि सार्वजनिक नहीं हुई है। हालांकि, रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि OPT आवेदनों पर शुल्क 100,000 डॉलर तक हो सकता है। यदि ऐसा होता है तो अमेरिका में पढ़ रहे विदेशी छात्रों पर इसका बड़ा आर्थिक असर पड़ सकता है।
H-1B and OPT Fees: भारतीयों पर क्यों पड़ेगा सबसे ज्यादा असर-
अमेरिकी H-1B वीजा कार्यक्रम में भारतीय प्रोफेशनल्स की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। USCIS के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024 में स्वीकृत H-1B याचिकाओं में भारतीय नागरिकों की हिस्सेदारी करीब 71 फीसदी थी। अमेरिका वीजा शुल्क राष्ट्रीयता के आधार पर तय नहीं करता, लेकिन H-1B में भारतीयों की बड़ी संख्या के कारण किसी भी बड़े शुल्क का असर भारतीय प्रोफेशनल्स और उनसे जुड़े परिवारों पर अधिक पड़ सकता है।
छात्रों की जेब पर पड़ेगा सीधा असर-
H-1B वीजा से जुड़े अनिवार्य सरकारी खर्च का बड़ा हिस्सा आमतौर पर नियोक्ता कंपनी उठाती है। वहीं F-1 छात्र वीजा से H-1B की ओर बढ़ने वाले छात्रों के लिए OPT आवेदन व्यक्तिगत खर्च बन सकता है। वर्तमान में Form I-765 के जरिए OPT आवेदन की ऑनलाइन फीस 470 डॉलर और ऑफलाइन आवेदन की फीस 520 डॉलर है। भारतीय मुद्रा में यह रकम लगभग 39,000 रुपये और 43,000 रुपये के आसपास बैठती है। ऐसे में यदि OPT शुल्क में बड़ी बढ़ोतरी की जाती है, तो अमेरिका में पढ़ाई पूरी करने के बाद वहीं काम करने की योजना बना रहे अंतरराष्ट्रीय छात्रों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
पहले भी 100,000 डॉलर की फीस को लेकर हुआ था विवाद-
इससे पहले ट्रंप प्रशासन ने कुछ नई H-1B याचिकाओं पर 100,000 डॉलर के एकमुश्त शुल्क का प्रावधान किया था। हालांकि, मैसाचुसेट्स की संघीय जिला अदालत ने 8 जून को इस नियम को गैरकानूनी करार देते हुए रद्द कर दिया था। बाद में अपील्स कोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा। अब अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) नए नियामक रास्ते के जरिए शुल्क से जुड़े प्रस्तावों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
भारतीय छात्रों और प्रोफेशनल्स की बढ़ी चिंता-
अगर नए शुल्क लागू होते हैं, तो अमेरिका में उच्च शिक्षा लेने और पढ़ाई के बाद नौकरी करने की योजना बना रहे भारतीय छात्रों के लिए खर्च काफी बढ़ सकता है। वहीं H-1B पर अतिरिक्त शुल्क का असर अमेरिकी कंपनियों और विदेशी टेक प्रोफेशनल्स पर भी पड़ सकता है। हालांकि, अंतिम शुल्क और नियम अभी आधिकारिक रूप से तय नहीं हुए हैं, इसलिए फिलहाल प्रस्तावित रकम को अंतिम शुल्क नहीं माना जा सकता।
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