US Iran Talks: अप्रैल में अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुई बातचीत के दौरान अमेरिका को आशंका थी कि इजराइल, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ को निशाना बना सकता है। इसी खतरे को देखते हुए अमेरिका ने मध्य-पूर्व के कुछ सहयोगी देशों के जरिए तेहरान को सतर्क रहने का संदेश भेजा।न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका को चिंता थी कि अगर दोनों प्रमुख वार्ताकारों की हत्या हो जाती, तो युद्धविराम और शांति वार्ता पूरी तरह प्रभावित हो सकती थी। उस समय ट्रम्प प्रशासन होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौता कराने की कोशिशों में लगा था।
पाकिस्तान में भी था हमले का खतरा
रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान में होने वाली एक बैठक से पहले भी ईरानी प्रतिनिधिमंडल पर हमले की आशंका जताई गई थी। इसी वजह से पाकिस्तान ने ईरानी विमान को लड़ाकू विमानों की सुरक्षा के साथ इस्लामाबाद तक पहुंचाया।वापसी के दौरान भी सुरक्षा अलर्ट मिलने पर विमान की मशहद में आपातकालीन लैंडिंग कराई गई। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल सड़क मार्ग से तेहरान पहुंचा।

US Iran Talks: पिछले 24 घंटे के बड़े अपडेट
पिछले 24 घंटों में ईरान से जुड़े कई अहम घटनाक्रम सामने आए हैं। दोहा में हुई बातचीत के बाद कतर ने बताया कि पूर्व सुप्रीम लीडर के अंतिम संस्कार के बाद अमेरिका और ईरान के बीच अगले दौर की वार्ता जल्द शुरू होगी। वहीं, ईरान ने संयुक्त राष्ट्र (UN) में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया है कि इजराइल ने सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई को जान से मारने की धमकी दी है। दूसरी ओर, अंतिम संस्कार से पहले ईरान ने पूरे देश में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। सरकार का दावा है कि इस कार्यक्रम में करीब 2 करोड़ लोग और 30 देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसी बीच ईरान ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि होर्मुज स्ट्रेट उसके नियंत्रण वाला क्षेत्र है और वहां किसी भी अमेरिकी दखल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही सभी जहाजों को तय समुद्री मार्ग का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, ईरान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को फोर्डो, नतांज और इस्फहान स्थित परमाणु ठिकानों पर प्रवेश देने से भी इनकार कर दिया है।
6 दिन तक चलेगा अंतिम संस्कार
मोजतबा खामेनेई का अंतिम संस्कार 4 जुलाई से 9 जुलाई तक चलेगा। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, यह देश के इतिहास के सबसे बड़े राजकीय अंतिम संस्कारों में से एक होगा।सरकार का अनुमान है कि समारोह में 1.5 करोड़ से 2 करोड़ लोगों की मौजूदगी रहेगी। इसी को देखते हुए पूरे देश में हाई अलर्ट लागू कर दिया गया है।इस कार्यक्रम में 30 से अधिक देशों के नेता और प्रतिनिधि शामिल होंगे, जबकि 90 देशों के धार्मिक प्रतिनिधियों के आने की भी जानकारी दी गई है। पाकिस्तान, रूस और चीन समेत कई देशों ने अपने प्रतिनिधिमंडल भेजने की पुष्टि की है।
ताबूत को हमले वाली जगह ले जाया गया
गुरुवार को खामेनेई का ताबूत उस स्थान पर ले जाया गया, जहां 28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल के हवाई हमले में उनकी मौत हुई थी।ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, यह कार्यक्रम बिना किसी पूर्व सूचना के आयोजित किया गया।इसके बाद 4 और 5 जुलाई को तेहरान में दो दिन तक सार्वजनिक अंतिम विदाई होगी। पहले दिन लोग अंतिम दर्शन करेंगे, जबकि दूसरे दिन नमाज-ए-जनाजा और अंतिम यात्रा निकाली जाएगी।प्रशासन का अनुमान है कि अंतिम विदाई में 1.2 करोड़ से 2 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं। भारी भीड़ को देखते हुए कई अलग-अलग मार्गों से अंतिम यात्रा निकालने और मेट्रो व बस सेवाओं को पूरी क्षमता से चलाने की तैयारी की गई है।
पाकिस्तान के गृह मंत्री पहुंचे ईरान
पाकिस्तान के गृह मंत्री सैयद मोहसिन नकवी शुक्रवार को खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने ईरान पहुंचे।ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने बताया कि अंतिम संस्कार में 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के भी कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना जताई गई है।पाकिस्तान में लगभग 20% आबादी शिया मुसलमानों की मानी जाती है। इनमें से बड़ी संख्या अली खामेनेई को अपना आध्यात्मिक नेता मानती थी। उनकी हत्या के बाद पाकिस्तान के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए, जिनमें 23 लोगों की मौत हो गई थी।
परमाणु नीति बदलने की उठी मांग
इजराइल की ओर से मोजतबा खामेनेई को जान से मारने की धमकी मिलने के बाद ईरान में परमाणु नीति की समीक्षा की मांग तेज हो गई है।ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रवक्ता इब्राहिम रेजाई ने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए ईरान को अपनी परमाणु नीति और अमेरिका के साथ हुए मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) की शर्तों पर दोबारा विचार करना चाहिए।उन्होंने कहा कि समझौते के अनुच्छेद-8 के तहत ईरान ने परमाणु हथियार नहीं बनाने का वादा किया था, लेकिन इजराइल की हालिया धमकियों के बाद इस नीति की समीक्षा जरूरी हो गई है।इससे पहले ईरान, मोजतबा खामेनेई को मिली धमकी को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इजराइल के खिलाफ शिकायत भी दर्ज करा चुका है।
ताबूत पर रखा गया लाल झंडा
विदाई समारोह के दौरान खामेनेई के ताबूत पर मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह का लाल झंडा रखा गया।शिया परंपरा में लाल झंडा शहादत, बलिदान और अन्याय के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक माना जाता है।विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रतीक इमाम हुसैन की करबला में हुई शहादत से जुड़ा हुआ है। ईरानी नेतृत्व खामेनेई की मौत को भी उसी तरह की शहादत के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।खामेनेई का अंतिम संस्कार 9 जुलाई को मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह परिसर में किया जाएगा।
युद्ध शुरू होने के बाद इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कार्यवाहक कमांडर अहमद वहीदी पहली बार सार्वजनिक रूप से नजर आए।वे गुरुवार शाम तेहरान में पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को श्रद्धांजलि देने पहुंचे।खामेनेई का ताबूत दक्षिणी तेहरान स्थित इमाम खोमैनी हुसैनिया के पास बने समारोह स्थल पर लाया गया, जहां अहमद वहीदी सहित कई वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों ने उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की।








