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ट्रम्प ने खारिज किया ईरान का नया समझौता, बोले- यह मंजूर नहीं, अमेरिका ने यूरेनियम रोकने की शर्त रखी

US Iran Tension: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की ओर से भेजे गए नए शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि उन्होंने ईरानी प्रतिनिधियों का जवाब पढ़ा, लेकिन उन्हें यह बिल्कुल पसंद नहीं आया और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। इससे पहले भी ट्रम्प ईरान पर बातचीत के नाम पर समय बिताने और खेल खेलने का आरोप लगा चुके हैं।

ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, तेहरान ने रविवार को पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को नया प्रस्ताव भेजा था। इस प्रस्ताव में युद्ध खत्म करने, फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री सुरक्षा बनाए रखने, प्रतिबंध हटाने और परमाणु कार्यक्रम पर आगे बातचीत करने की बात कही गई थी।

अमेरिका की 14 सूत्रीय शर्तें क्या थीं

अमेरिका ने इस सप्ताह ईरान को 14 बिंदुओं वाला प्रस्ताव भेजा था। इसमें कहा गया था कि ईरान कम से कम 12 साल तक यूरेनियम संवर्धन बंद करे और अपने पास मौजूद लगभग 440 किलो 60% संवर्धित यूरेनियम अमेरिका को सौंप दे।

इसके बदले अमेरिका ने कई राहत देने की पेशकश की थी। इनमें आर्थिक प्रतिबंधों में ढील, ईरान की फ्रीज की गई अरबों डॉलर की संपत्तियों को वापस जारी करना और ईरानी बंदरगाहों पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी हटाना शामिल था।

हालांकि रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और हाईली एनरिच्ड यूरेनियम को पूरी तरह छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि उनका जवाब सकारात्मक और व्यावहारिक है और अब फैसला अमेरिका को करना है। दोनों देशों ने 8 अप्रैल से लागू सीजफायर खत्म होने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

US Iran Tension: पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट

1. तेल की कीमतों में बड़ा उछाल

अमेरिका द्वारा ईरान का प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं। ब्रेंट क्रूड 104 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। होर्मुज स्ट्रेट में तनाव बढ़ने से तेल सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

2. लेबनान में इजराइली हमले तेज

दक्षिणी लेबनान में इजराइल के हमलों में 39 लोगों की मौत हो गई। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक 2 मार्च से अब तक 103 मेडिकल कर्मी मारे जा चुके हैं। कई डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि इजराइल गाजा जैसी रणनीति अपना रहा है।

3. होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही प्रभावित

अमेरिका ने दावा किया कि नाकेबंदी के बाद 65 जहाजों को अपना रास्ता बदलना पड़ा। वहीं कतर, दक्षिण कोरिया और दूसरे देशों के जहाजों को हमलों और रुकावटों का सामना करना पड़ा।

4. ईरान की पश्चिमी देशों को चेतावनी

ईरान ने कहा कि अगर अमेरिका, फ्रांस या ब्रिटेन ने होर्मुज स्ट्रेट में सैन्य दखल बढ़ाया तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। साथ ही अमेरिका के प्रतिबंधों का समर्थन करने वाले देशों को भी चेतावनी दी गई।

5. खाड़ी देशों तक पहुंचा युद्ध का असर

UAE और कुवैत में ड्रोन अलर्ट जारी किए गए। कतर के पास एक मालवाहक जहाज पर हमला हुआ, जबकि UAE ने दावा किया कि उसने दो ईरानी ड्रोन मार गिराए हैं। पूरे क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

नेतन्याहू का दावा: चीन ने ईरान की मदद की

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि चीन ने ईरान को मिसाइल निर्माण में मदद दी। उन्होंने कहा कि चीन ने ईरान को कुछ जरूरी कंपोनेंट्स और तकनीकी सपोर्ट उपलब्ध कराया।

नेतन्याहू ने यह बयान CBS न्यूज के कार्यक्रम 60 मिनट में दिया। हालांकि उन्होंने इससे ज्यादा जानकारी साझा नहीं की। उन्होंने कहा कि ईरान की सैन्य ताकत को कमजोर करना अभी भी इजराइल की बड़ी प्राथमिकता है।

दूसरी तरफ चीन पहले भी ऐसे आरोपों को खारिज कर चुका है। चीन का कहना है कि वह सैन्य और ड्यूल-यूज टेक्नोलॉजी के निर्यात पर सख्त नियंत्रण रखता है।

अमेरिका और इजराइल लंबे समय से दावा करते रहे हैं कि चीन और ईरान के बीच सैन्य और तकनीकी सहयोग मौजूद है। कई रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि चीनी कंपनियां ईरान के मिसाइल कार्यक्रम से जुड़ी तकनीक और सामान की सप्लाई करती रही हैं।

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान की सख्त चेतावनी

ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा है कि अगर फ्रांस और ब्रिटेन ने होर्मुज स्ट्रेट में अपने युद्धपोत तैनात किए तो ईरान तुरंत और निर्णायक जवाब देगा।उन्होंने कहा कि युद्ध हो या शांति, होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा सुनिश्चित करना केवल ईरान का अधिकार है और किसी दूसरे देश को इसमें हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, फ्रांस का एयरक्राफ्ट कैरियर चार्ल्स डी गॉल क्षेत्र की ओर बढ़ रहा है, जबकि ब्रिटेन भी अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की तैयारी में है।

गरीबाबादी ने आरोप लगाया कि जहाजों की सुरक्षा के नाम पर विदेशी ताकतें क्षेत्र का सैन्यीकरण बढ़ा रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका की कार्रवाइयों का समर्थन करने वाले देशों को भी जवाब का सामना करना पड़ सकता है।होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है।

ईरान और नीदरलैंड के विदेश मंत्रियों की बातचीत

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने नीदरलैंड के विदेश मंत्री टॉम बेरेंडसेन से फोन पर बातचीत की। ईरानी मीडिया के मुताबिक दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय हालात पर चर्चा की।

IRIB की रिपोर्ट के अनुसार बातचीत में हालिया कूटनीतिक घटनाक्रम और क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर विचार साझा किए गए। हालांकि किन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई, इसकी जानकारी नहीं दी गई।इससे पहले अराघची ने मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलात्ती से भी फोन पर बात की थी।

ईरान ने शेयर किया हमले का CCTV वीडियो

भारत में ईरान के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट ने एक CCTV वीडियो शेयर किया है। दावा किया गया कि यह वीडियो जंग के दौरान मार्टर मोस्तफा सदरजादेह रेसलिंग हाउस पर हुए अमेरिका-इजराइल हमले का है।वीडियो में एक इमारत के अंदर धमाकों और अफरा-तफरी जैसे दृश्य दिखाई दे रहे हैं।

अमेरिकी रक्षामंत्री ने हथियार कम पड़ने के दावे को नकारा

अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने उन दावों को खारिज किया है जिनमें कहा गया था कि ईरान युद्ध के कारण अमेरिका के हथियार तेजी से खत्म हो रहे हैं।

दरअसल अमेरिकी नेवी के रिटायर्ड कैप्टन और डेमोक्रेटिक सीनेटर मार्क केली ने CBS को दिए इंटरव्यू में कहा था कि पेंटागन ने उन्हें बताया है कि अमेरिका ने बड़ी मात्रा में हथियार खर्च कर दिए हैं।

इसके जवाब में पीट हेगसेथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मार्क केली पर गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केली पेंटागन की क्लासिफाइड ब्रीफिंग से जुड़ी गलत बातें टीवी पर बता रहे हैं।

मार्क केली ने चेतावनी दी थी कि अगर भविष्य में चीन या किसी दूसरे मोर्चे पर बड़ा संघर्ष हुआ तो अमेरिका कम सुरक्षित स्थिति में होगा। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा हथियार भंडार को फिर से तैयार करने में कई साल लग सकते हैं।

अमेरिका में अब ईरान युद्ध और सैन्य खर्च को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। रिपब्लिकन और डेमोक्रेट नेताओं के बीच इस बात पर मतभेद हैं कि इस युद्ध का अमेरिकी सैन्य ताकत और हथियार भंडार पर कितना असर पड़ा है।

तेल बाजार में बढ़ी चिंता

ट्रम्प द्वारा ईरान का प्रस्ताव ठुकराने के बाद तेल बाजार में बड़ी हलचल देखी गई। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 104 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया।

रविवार देर रात ब्रेंट क्रूड 2.69% बढ़कर 104.01 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 3.24% बढ़कर 98.51 डॉलर प्रति बैरल हो गया।

विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार की सबसे बड़ी चिंता होर्मुज स्ट्रेट को लेकर है, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से सप्लाई प्रभावित होने का खतरा लगातार बढ़ रहा है।

निवेशकों को उम्मीद थी कि दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ेगी, लेकिन ट्रम्प के सख्त रुख के बाद युद्ध खत्म होने की संभावना कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है। इसी वजह से दूसरे बाजारों से तेल खरीद बढ़ी और कीमतों में तेजी दर्ज की गई।

US Iran Tension

ट्रम्प बोले: ईरान का प्रस्ताव स्वीकार नहीं

ईरान ने पाकिस्तानी मध्यस्थों के जरिए अमेरिका के नए सीजफायर प्रस्ताव पर अपना जवाब भेजा था। इसमें खास तौर पर लेबनान सहित पूरे क्षेत्र में युद्ध को हमेशा के लिए खत्म करने पर बातचीत की मांग की गई थी।

लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस प्रस्ताव को तुरंत खारिज करते हुए इसे पूरी तरह अस्वीकार्य बताया। हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं किया कि प्रस्ताव का कौन सा हिस्सा अमेरिका को मंजूर नहीं है।

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