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होर्मुज की नाकेबंदी तोड़कर निकला पाक टैंकर! क्या ट्रंप-शहबाज की ‘डील’ काम आई?

Us Iran war: मध्य पूर्व में होर्मुज स्ट्रेट को लेकर जारी अमेरिका-ईरान तनाव और समुद्री नाकेबंदी के बीच एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है। पाकिस्तान का ‘खैरपुर’ नामक ऑयल टैंकर कुवैत से बड़ी मात्रा में डीजल लेकर सुरक्षित रूप से इस संवेदनशील समुद्री रास्ते को पार कर गया। ऐसे समय में जब इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही बेहद सीमित और जोखिम भरी हो चुकी है, किसी कमर्शियल टैंकर का सुरक्षित निकलना कई सवाल खड़े कर रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह टैंकर पिछले कुछ दिनों से निकलने की कोशिश कर रहा था, लेकिन सुरक्षा कारणों के चलते उसे बार-बार रुकना पड़ा। आखिरकार, इसने ईरान द्वारा स्वीकृत उत्तरी मार्ग अपनाया, जो क्यूशम और लारक द्वीपों के पास से गुजरता है। अब यह जहाज पाकिस्तान के कराची बंदरगाह की ओर बढ़ रहा है और जल्द पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

कुवैत से लोड हुआ तेल

जानकारी के मुताबिक, यह टैंकर 12 अप्रैल को फारस की खाड़ी में पहुंचा था, ठीक उसी समय जब इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत विफल हो गई थी और क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ गया था। इसके बावजूद, जहाज ने कुवैत के मीना अल अहमदी पोर्ट से करीब 5.11 लाख बैरल डीजल लोड किया। शुरुआत में कई बार सुरक्षा कारणों से इसे आगे बढ़ने की अनुमति नहीं मिली, लेकिन अंततः इसे ईरान के नियंत्रण वाले सुरक्षित मार्ग से गुजरने की इजाजत मिल गई।

Us Iran war: विशेष मार्ग से मिली राहत, उठे कूटनीतिक सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने कई कूटनीतिक सवाल भी खड़े कर दिए हैं। जिस तरह से टैंकर को ईरान के मंजूर किए गए मार्ग से सुरक्षित निकासी मिली, उससे यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि क्या पाकिस्तान को कोई विशेष छूट दी गई थी या इसके पीछे कोई समझौता हुआ है। मौजूदा हालात में जहां अधिकतर जहाजों की आवाजाही बाधित है, वहां इस तरह की अनुमति मिलना असामान्य माना जा रहा है।

नाकेबंदी पर कानूनी और आर्थिक बहस तेज

विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। भारत के पूर्व राजनयिक नवदीप सिंह सूरी ने इस स्थिति को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया है। उनका कहना है कि अमेरिका और ईरान द्वारा जहाजों की आवाजाही को बाधित करना नियम-आधारित व्यवस्था का उल्लंघन है, जिसका असर भारत सहित कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।

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