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USCIRF की मांग- RSS पर लगे बैन: संघ नेताओं को न मिले सम्मान, 29 अगस्त को न्यूयॉर्क जाएंगे भागवत

RSS को लेकर USCIRF की बड़ी मांग

USCIRF Demands RSS Ban: अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग यानी USCIRF ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। आयोग ने अमेरिकी सरकार से कहा है कि RSS नेताओं को राजनयिक सम्मान नहीं दिया जाना चाहिए और उनके साथ उच्चस्तरीय बैठकें भी नहीं होनी चाहिए।USCIRF के चेयरमैन आसिफ महमूद ने बुधवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी RSS के सदस्य हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि RSS से जुड़े संगठनों ने धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर हमले किए हैं।महमूद का यह बयान RSS प्रमुख मोहन भागवत के प्रस्तावित अमेरिका दौरे से कुछ दिन पहले आया है। भागवत 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन की यात्रा पर जाएंगे।

29 अगस्त को न्यूयॉर्क में कार्यक्रम

मोहन भागवत 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में आयोजित अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग (AHEAD) के ‘यूनिवर्सल ऑननेस सेलिब्रेशंस’ कार्यक्रम में शामिल होंगे।इसी प्रस्तावित यात्रा के बीच USCIRF की ओर से RSS को लेकर यह मांग सामने आई है।USCIRF के कमिश्नर जीन मिल्स ने कहा कि अमेरिकी सरकार को उन RSS सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार करना चाहिए, जिन्हें धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार माना गया है।उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार से जुड़े RSS नेताओं को अमेरिका की ओर से किसी तरह का विशेष सम्मान नहीं दिया जाना चाहिए।

कनाडा में 100 से ज्यादा संगठनों ने भागवत का समर्थन किया

दूसरी ओर, कनाडा के 100 से अधिक संगठनों ने मोहन भागवत के प्रस्तावित कनाडा दौरे का समर्थन किया है। इन संगठनों ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और मंत्रियों को पत्र भेजकर भागवत को देश में आने से रोकने की मांगों को खारिज करने की अपील की है।संगठनों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले स्वतंत्र और विश्वसनीय सबूत होने चाहिए। इसके साथ ही कानून और उचित प्रक्रिया का पालन किया जाना जरूरी है।

भारत को CPC सूची में डालने की सिफारिश

USCIRF कई बार भारत को ‘विशेष चिंता का देश’ यानी Country of Particular Concern (CPC) घोषित करने की सिफारिश कर चुका है।आयोग ने पहली बार 2004 में भारत को CPC सूची में शामिल करने की सिफारिश की थी। इसके बाद 2020 में भी इस मांग को दोहराया गया। 2021 से 2026 के बीच जारी USCIRF की रिपोर्टों में भी भारत को CPC सूची में रखने की सिफारिश की गई।हालांकि, USCIRF की सिफारिश का यह मतलब नहीं है कि अमेरिका ने भारत को आधिकारिक रूप से CPC घोषित कर दिया है।

RSS और RAW पर भी उठा चुका है सवाल

मार्च 2026 में जारी USCIRF की वार्षिक रिपोर्ट में भारत में धार्मिक स्वतंत्रता के कथित उल्लंघनों को लेकर चिंता जताई गई थी। रिपोर्ट में RSS और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) जैसी संस्थाओं के साथ कुछ लोगों पर प्रतिबंध लगाने का समर्थन भी किया गया था।भारत सरकार ने इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया था। भारत का कहना था कि USCIRF संदिग्ध स्रोतों और वैचारिक सोच के आधार पर लगातार देश की नकारात्मक तस्वीर पेश करता है।16 मार्च को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि USCIRF को भारत की चुनिंदा आलोचना करने के बजाय अमेरिका में हिंदू मंदिरों में हुई तोड़फोड़ की घटनाओं पर भी ध्यान देना चाहिए।

क्या है USCIRF?

United States Commission on International Religious Freedom यानी USCIRF अमेरिका की एक स्वतंत्र सरकारी संस्था है। इसकी स्थापना अमेरिकी कांग्रेस ने 1998 के International Religious Freedom Act के तहत की थी।USCIRF के सदस्यों की नियुक्ति अमेरिकी राष्ट्रपति और कांग्रेस के दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों की ओर से होती है। इसका मुख्य काम अलग-अलग देशों में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति पर नजर रखना और अमेरिकी सरकार को सलाह देना है।आयोग किसी देश, संस्था या व्यक्ति पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश कर सकता है, लेकिन ऐसी सिफारिश के आधार पर प्रतिबंध अपने आप लागू नहीं होता। अंतिम फैसला अमेरिकी सरकार करती है। हालांकि, USCIRF की रिपोर्ट और सिफारिशें अमेरिकी विदेश नीति और सरकार के फैसलों को प्रभावित कर सकती हैं।

USCIRF के मुख्य काम
  • अलग-अलग देशों में धार्मिक स्वतंत्रता और धार्मिक उत्पीड़न की स्थिति की निगरानी करना।
  • अपने शोध और जांच के आधार पर हर साल रिपोर्ट जारी करना।
  • अमेरिकी राष्ट्रपति, विदेश मंत्री और कांग्रेस को नीतिगत सुझाव देना।
  • कुछ देशों को ‘विशेष चिंता का देश’ यानी CPC घोषित करने की सिफारिश करना।
  • गैर-सरकारी संगठनों या समूहों के लिए ‘विशेष चिंता वाली संस्था/समूह’ यानी EPC की सिफारिश करना।
  • अमेरिकी सरकार से प्रतिबंध, राजनयिक दबाव या अन्य कार्रवाई करने की सिफारिश करना।

इस तरह USCIRF की ओर से RSS को लेकर की गई मांग एक सिफारिश है। इसे लागू करने का अंतिम अधिकार अमेरिकी सरकार के पास ही है।

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