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‘वंदे मातरम का विरोध देश की भावनाओं का अपमान’, कांग्रेस पर बरसे राजनाथ और नड्डा

Vande Mataram Opposition:

Vande Mataram Opposition: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस के वंदे मातरम को लेकर लिए गए फैसले पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गीत का सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य है। वहीं, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाए हैं।

Vande Mataram Opposition: राजनाथ सिंह ने कांग्रेस के फैसले को बताया गंभीर-

राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी वीडियो संदेश में कहा कि कांग्रेस द्वारा वंदे मातरम के सम्मान से इनकार करना संवैधानिक दृष्टि से गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि संसद से पारित कानून सभी नागरिकों के लिए बाध्यकारी होते हैं।उन्होंने कहा कि यदि कोई राष्ट्रीय गीत का सम्मान करने से इनकार करता है तो उसकी देशभक्ति और संविधान के प्रति निष्ठा पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

Vande Mataram Opposition: 1937 के प्रस्ताव का कांग्रेस ने दिया हवाला-

दरअसल, कांग्रेस ने वर्ष 1937 में पारित अपने एक प्रस्ताव का हवाला देते हुए वंदे मातरम के शुरुआती दो छंद गाने का निर्णय लिया है। कांग्रेस का कहना है कि उस समय यह फैसला महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और रवींद्रनाथ टैगोर जैसे नेताओं की सहमति से लिया गया था। राजनाथ सिंह ने कांग्रेस के इस तर्क पर पलटवार करते हुए कहा कि 1937 का प्रस्ताव मुस्लिम लीग की कट्टरपंथी मांगों के आगे झुककर पारित किया गया था और आगे चलकर देश को इसका खामियाजा विभाजन के रूप में भुगतना पड़ा।

‘कांग्रेस का फैसला असंवैधानिक और निंदनीय’-

रक्षा मंत्री ने कांग्रेस के फैसले को असंवैधानिक और निंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि कट्टरपंथी तत्वों के आगे समझौता करना हमेशा देश के लिए घातक रहा है। राजनाथ सिंह के मुताबिक, कांग्रेस का मौजूदा रुख भविष्य में गंभीर राजनीतिक संकट पैदा कर सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि वंदे मातरम का विरोध करके कांग्रेस ने अपने खतरनाक इरादे देश के सामने जाहिर कर दिए हैं।

वंदे मातरम को लेकर संसद में भी हुआ था विवाद-

हाल ही में संसद के मानसून सत्र में राष्ट्र-गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया गया था। इस दौरान विपक्ष ने जोरदार हंगामा करते हुए सदन से वॉकआउट किया था। विधेयक का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान वैधानिक दर्जा और सुरक्षा प्रदान करना है। विधेयक संसद के दोनों सदनों से पारित हो चुका है

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