West bengal elections: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के तहत बुधवार को 142 सीटों पर मतदान होना है। चुनाव आयोग ने इस बार सुरक्षा के बेहद सख्त इंतजाम किए हैं। 7 जिलों में होने वाली वोटिंग के लिए केंद्रीय बलों के 3.5 लाख से ज्यादा जवान तैनात किए गए हैं। CRPF, SSB, ITBP, CISF और RPF के जवान हर संवेदनशील इलाके में नजर रखेंगे। सिर्फ कोलकाता में ही करीब 35 हजार जवान तैनात हैं, जबकि पूरे राज्य में 2550 कंपनियां सुरक्षा संभाल रही हैं।
पहली बार NIA की तैनाती
इस बार चुनाव में पहली बार NIA की भी तैनाती की गई है, जो सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाती है। पूरी निगरानी कोलकाता के सेंट्रल कंट्रोल रूम से की जाएगी, जहां से हर पोलिंग स्टेशन पर नजर रखी जा रही है। CCTV कैमरों के जरिए लाइव मॉनिटरिंग हो रही है और 6 हजार से ज्यादा क्विक रिस्पॉन्स टीमें किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं। संवेदनशील इलाकों में लगातार गश्त भी जारी है।
West bengal elections: वोटर लिस्ट विवाद बना बड़ा मुद्दा
दूसरे चरण में इस बार वोटर लिस्ट से नाम कटने का मुद्दा काफी बड़ा बन गया है। कई जिलों में लाखों वोट कम हुए हैं, जिससे राजनीतिक माहौल गरमा गया है। नॉर्थ 24 परगना, साउथ 24 परगना, हावड़ा, हुगली और नदिया जैसे जिलों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटे हैं। माना जा रहा है कि करीब 25 सीटों पर इसका सीधा असर चुनाव नतीजों पर पड़ सकता है।
West bengal elections: भवानीपुर सीट पर सबकी नजर
कोलकाता की भवानीपुर सीट सबसे ज्यादा चर्चा में है। यहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी के बीच सीधा मुकाबला है। इस सीट पर भी बड़ी संख्या में वोटर लिस्ट से नाम हटे हैं, जिसे लेकर तृणमूल कांग्रेस सवाल उठा रही है, जबकि बीजेपी इसे गलत बता रही है। पिछले चुनावों के मुकाबले इस बार यहां मुकाबला ज्यादा कड़ा माना जा रहा है।
24 परगना जिलों में हाई वोल्टेज मुकाबला
साउथ और नॉर्थ 24 परगना जिले चुनाव के लिहाज से सबसे अहम माने जा रहे हैं। इन दोनों जिलों की 64 सीटें नतीजों की दिशा तय कर सकती हैं। साउथ 24 परगना में मुस्लिम आबादी ज्यादा होने के कारण यहां सियासी माहौल काफी गरम है। वहीं नदिया जिले में मतुआ और नामशूद्र समुदाय का वोट निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
बीजेपी ने बढ़ाया चुनावी जोर
बीजेपी ने इस बार इन सीटों पर खास फोकस किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और योगी आदित्यनाथ ने जमकर प्रचार किया है। NRC और CAA जैसे मुद्दे भी चुनावी बहस के केंद्र में हैं। वहीं तृणमूल कांग्रेस इन मुद्दों का विरोध करते हुए जनता के बीच जा रही है।
हिंदू और महिला वोटर बन सकते हैं गेमचेंजर
West bengal elections: विशेषज्ञों का मानना है कि इस चरण में हिंदू और महिला वोटर सबसे अहम भूमिका निभा सकते हैं। अगर इनका रुझान थोड़ा भी बदला, तो कई सीटों के नतीजे प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में कड़ी सुरक्षा और सियासी घमासान के बीच होने वाली यह वोटिंग बंगाल की राजनीति के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।
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