Yogi Adityanath: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि जिन लोगों के मन में भारत के प्रति आस्था और निष्ठा नहीं है, उनके लिए भारत की धरती धर्मशाला नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के आदर्श आज भी समाज को दिशा देते हैं और राष्ट्र की एकता तथा सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने का कार्य करते हैं।
रामकथा में राष्ट्र और संस्कृति का संदेश
राजधानी लखनऊ में आयोजित नौ दिवसीय रामकथा महोत्सव के समापन समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि कथा केवल सुनने का विषय नहीं, बल्कि उसे जीवन में अपनाने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक पूरे भारत को जोड़ने वाले आदर्श हैं। श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल एक धार्मिक आंदोलन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा के सम्मान का प्रतीक था।
Yogi Adityanath: लव जिहाद और भूमि कब्जों पर जताई चिंता
मुख्यमंत्री ने लव जिहाद और भूमि कब्जों को लेकर भी समाज को सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि समाज को ऐसी चुनौतियों के विरुद्ध एकजुट होकर खड़ा होना होगा। उनके अनुसार, नकारात्मक शक्तियां जाति, भाषा और क्षेत्र के नाम पर समाज को विभाजित करने का प्रयास करती हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2020 में इस प्रकार की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सख्त कानून बनाया है, लेकिन व्यापक जनजागरूकता भी जरूरी है।
भगवान राम के आदर्श अपनाने का आह्वान
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिसने भगवान राम को जीवन का आदर्श बनाया, उसका कल्याण हुआ और जिसने उनके मार्ग से विरोध किया, उसे सम्मान नहीं मिला। उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान राम, भगवान शिव और अन्य महापुरुषों के आदर्शों को जीवन में उतारने का आह्वान किया। योगी आदित्यनाथ ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य के योगदान की भी सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने समाज को सकारात्मक दिशा देने का कार्य किया है। उन्होंने राष्ट्र कल्याण और लोकमंगल की कामना के साथ सभी श्रद्धालुओं के सुख, समृद्धि और उन्नति की प्रार्थना की।
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