आईपीएल के बाद शेर-ए-पंजाब टी20 लीग में मचाया तहलका

Prabhsimran Singh:

Prabhsimran Singh: भारत के जाने-माने और उभरते हुए स्टार बल्लेबाज प्रभसिमरन सिंह ने आईपीएल के बाद अब नई टी20 लीग पंजाब टी20 लीग में तहलका मचा दिया है। शेर-ए-पंजाब टी20 लीग में जालंधर वॉरियर्स की तरफ से खेलते हुए प्रभसिमरन सिंह ने मात्र चार मैचों में अनगिनत रिकॉर्ड बना दिए हैं। खेले गए चार मुकाबलों में प्रभसिमरन सिंह ने दो मुकाबलों में अर्धशतक लगाया है और दो मुकाबलों में ताबड़तोड़ शतक लगाया है। हालांकि, चौथे मैच में भी वे अपना तीसरा शतक लगाने से चूक गए। चौथे मैच में लुधियाना लायंस के खिलाफ 90 रनों की पारी खेलकर प्रभसिमरन आउट हो गए।

Prabhsimran Singh: प्रभसिमरन ने चार मैचों में मारे 25 छक्के और 39 चौके-

जानकारी के अनुसार, इस प्रदर्शन से प्रभसिमरन सिंह के टीम इंडिया की प्लेइंग इलेवन में शामिल होने के रास्ते खुल गए हैं। इन चार मैचों में उन्होंने 401 रन बनाए हैं। वहीं, बाउंड्री की बात करें तो प्रभसिमरन सिंह के बल्ले से 39 चौके और 25 करारे छक्के निकले।

Prabhsimran Singh: क्या अफगानिस्तान सीरीज में प्रभसिमरन को मिलेगा मौका-

भारत बनाम अफगानिस्तान टी20 सीरीज की शुरुआत 13 सितंबर से होने वाली है। इस सीरीज की मेजबानी अफगानिस्तान कर रहा है। बीते कुछ दिनों में भारतीय टीम में कई बदलाव हो गए हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि प्रभसिमरन सिंह को इतने शानदार प्रदर्शन के बाद भी टीम में शामिल नहीं किया गया है, लेकिन इससे उनके प्रदर्शन को नहीं मापा जा सकता। कई दिग्गजों का यह मानना है कि प्रभसिमरन सिंह अगर इसी तरह प्रदर्शन करते रहे तो वह जल्द ही भारतीय जर्सी में भी खेलते हुए दिखाई देंगे।

दोनों टीमों की प्लेइंग इलेवन-

जालंधर वॉरियर्स प्लेइंग इलेवन-

प्रभसिमरन सिंह (कप्तान और विकेटकीपर), विश्वनाथ सिंह, हरजस सिंह टंडन, गौरव मारकन, आर्यन यादव, उमेश गिल, मयंक गुप्ता, सुखदीप बाजवा, अभिनव राकेश शर्मा, इमैनजोत सिंह चहल और गुरविंदर सिंह भुल्लर।

लुधियाना लायंस प्लेइंग इलेवन-

कार्तिक शर्मा, अभिजीत गर्ग, तरणवीर सिंह रंधावा, सलिल अरोड़ा (विकेटकीपर), अर्जुन राजपूत, साहिल भास्कर, जसिंदर सिंह, कार्तिक चड्ढा, माधव पथानिया, अर्शदीप सिंह (कप्तान) और लवकीरत सिंह।

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केंद्रीय कैबिनेट में होगा विस्तार? 2027 से पहले यूपी के इन चेहरों पर BJP की नजर

Union Cabinet Expansion:

Union Cabinet Expansion: उत्तर प्रदेश में 2027 की विधानसभा चुनावी जंग से पहले केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हैं। अगर कैबिनेट में फेरबदल या विस्तार होता है, तो सबसे ज्यादा नजर उत्तर प्रदेश के हिस्से पर रहेगी। वजह साफ है—लोकसभा में सबसे ज्यादा सीटें देने वाला राज्य यूपी अगले विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी के लिए सबसे अहम राजनीतिक मैदान है। ऐसे में संभावित विस्तार को केवल प्रशासनिक फेरबदल के तौर पर नहीं, बल्कि क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरण साधने की कवायद के तौर पर भी देखा जा रहा है। हालांकि, अभी तक जिन नामों की चर्चा है, उनमें से किसी को लेकर आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है।

Union Cabinet Expansion: केंद्र में यूपी के 11 मंत्री-

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत यूपी से केंद्र सरकार में फिलहाल 11 मंत्री हैं। इनमें लखनऊ से सांसद और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राज्यसभा सांसद हरदीप सिंह पुरी, आरएलडी प्रमुख जयंत चौधरी समेत कई चेहरे शामिल हैं।राज्य मंत्रियों में जितिन प्रसाद, पंकज चौधरी, अनुप्रिया पटेल, एसपी सिंह बघेल, बीएल वर्मा, कीर्तिवर्धन सिंह और कमलेश पासवान के नाम प्रमुख हैं।यानी यूपी को केंद्र में पहले से ही पर्याप्त प्रतिनिधित्व हासिल है। इसलिए अगर विस्तार होता है तो सवाल सिर्फ संख्या बढ़ाने का नहीं, बल्कि किस क्षेत्र और किस सामाजिक समूह को प्रतिनिधित्व दिया जाए, इसका होगा।

Union Cabinet Expansion: 2027 चुनाव से पहले यूपी क्यों अहम-

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 की शुरुआत में प्रस्तावित हैं। बीजेपी के लिए राज्य इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यूपी का प्रदर्शन राष्ट्रीय राजनीति पर भी सीधा असर डालता है। पार्टी को एक तरफ अपने पारंपरिक समर्थक वर्गों को साधे रखना है, तो दूसरी तरफ गैर-यादव ओबीसी, दलित, ब्राह्मण और अन्य सामाजिक समूहों के बीच अपना आधार मजबूत बनाए रखना है। यही वजह है कि संभावित कैबिनेट विस्तार में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और जातीय संतुलन दोनों को महत्व मिलने की अटकलें लग रही हैं।

2021 में भी यूपी को मिला था अहम प्रतिनिधित्व-

2021 में हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार को यूपी के नजरिए से महत्वपूर्ण माना गया था। 2019 में प्रधानमंत्री समेत यूपी से करीब 10 मंत्री केंद्र में थे। बाद में फेरबदल और विस्तार के बाद यूपी से मंत्रियों की संख्या बढ़ी थी। अब 2027 का विधानसभा चुनाव सामने है। ऐसे में राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि क्या एक बार फिर यूपी को अतिरिक्त प्रतिनिधित्व देकर चुनावी समीकरणों को साधने की कोशिश होगी। हालांकि, पिछली बार की तरह बड़ी संख्या में नए चेहरों को शामिल किया जाएगा, यह अभी कहना जल्दबाजी होगी।

इन नेताओं के नाम चर्चा में-

संभावित नामों में पश्चिमी और मध्य यूपी से कुछ नेताओं की चर्चा है। ब्राह्मण प्रतिनिधित्व के लिहाज से लक्ष्मीकांत वाजपेयी और डॉ. दिनेश शर्मा के नाम राजनीतिक गलियारों में लिए जा रहे हैं। वहीं दलित प्रतिनिधित्व के लिए हाथरस से सांसद अनूप प्रधान वाल्मीकि का नाम चर्चा में बताया जा रहा है।
रुहेलखंड में ओबीसी प्रतिनिधित्व को देखते हुए बरेली से सांसद छत्रपाल सिंह के नाम की भी चर्चा है। वहीं पूर्वांचल से राज्यसभा सांसद आरपीएन सिंह को भी संभावित चेहरों में गिना जा रहा है। हालांकि, इन सभी नामों को फिलहाल सिर्फ राजनीतिक अटकलों के तौर पर देखना चाहिए। अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी नेतृत्व की ओर से ही होगा।

 पंकज चौधरी की भूमिका भी अहम-

महाराजगंज से सांसद पंकज चौधरी फिलहाल केंद्र में राज्य मंत्री हैं और ओबीसी समुदाय से आते हैं। उनके पास केंद्र में मंत्री पद के साथ-साथ पार्टी संगठन में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसे में अगर कैबिनेट में फेरबदल होता है तो पूर्वांचल और ओबीसी प्रतिनिधित्व के समीकरण में उनका फैसला महत्वपूर्ण हो सकता है। अगर पार्टी उन्हें मंत्रिमंडल में बनाए रखती है तो यह पूर्वांचल और ओबीसी समीकरण को जारी रखने का संकेत माना जा सकता है। वहीं अगर कोई बदलाव होता है तो उसी सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को बनाए रखने के लिए किसी दूसरे चेहरे को जगह दिए जाने की संभावना पर चर्चा होगी।

सिर्फ जातीय समीकरण नहीं, क्षेत्रीय संतुलन भी जरूरी-

यूपी जैसे बड़े राज्य में केवल जातीय समीकरण के आधार पर मंत्रियों का चयन करना पर्याप्त नहीं होगा। बीजेपी को पश्चिमी यूपी, अवध, पूर्वांचल, रुहेलखंड और बुंदेलखंड जैसे अलग-अलग क्षेत्रों का संतुलन भी देखना होगा। इसके अलावा महिला प्रतिनिधित्व, सहयोगी दलों की हिस्सेदारी और संगठन में सक्रिय नेताओं को सरकार में जगह देने जैसे पहलू भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। खास तौर पर एनडीए के सहयोगी दलों को प्रतिनिधित्व देना भी बीजेपी की चुनावी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। जयंत चौधरी की मौजूदगी इसका उदाहरण है।

कैबिनेट विस्तार से मिल सकता है चुनावी संदेश-

अगर यूपी से नए चेहरे शामिल किए जाते हैं, तो इसका राजनीतिक संदेश जरूर निकलेगा। पार्टी यह संकेत दे सकती है कि वह अलग-अलग सामाजिक समूहों और क्षेत्रों को केंद्र की सत्ता में प्रतिनिधित्व दे रही है। लेकिन इसका चुनावी असर अपने आप तय नहीं होगा। मतदाता स्थानीय उम्मीदवार, राज्य सरकार का कामकाज, बेरोजगारी, महंगाई, कानून-व्यवस्था, किसान और सामाजिक मुद्दों जैसे कई सवालों पर फैसला करेंगे। इसलिए कैबिनेट विस्तार को 2027 के चुनाव की पूरी रणनीति मानना सही नहीं होगा, लेकिन यह बीजेपी के सामाजिक और क्षेत्रीय संदेश का एक महत्वपूर्ण हिस्सा जरूर बन सकता है।

 असली सवाल संख्या का नहीं, संतुलन का-

संभावित केंद्रीय कैबिनेट विस्तार में उत्तर प्रदेश को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि कितने नए मंत्री बनेंगे, बल्कि यह है कि किस क्षेत्र और किस सामाजिक समीकरण को प्राथमिकता मिलेगी। ब्राह्मण, ओबीसी और दलित प्रतिनिधित्व से लेकर पश्चिमी यूपी, रुहेलखंड और पूर्वांचल तक—हर नाम और हर क्षेत्र के पीछे एक राजनीतिक संदेश छिपा हो सकता है। फिलहाल लक्ष्मीकांत वाजपेयी, दिनेश शर्मा, अनूप प्रधान वाल्मीकि, छत्रपाल सिंह और आरपीएन सिंह जैसे नामों की चर्चा जरूर है, लेकिन अंतिम तस्वीर नेतृत्व के फैसले के बाद ही साफ होगी। 2027 से पहले अगर कैबिनेट विस्तार होता है, तो यह सिर्फ दिल्ली में मंत्रालयों का फेरबदल नहीं होगा—यूपी के लिए यह बीजेपी के चुनावी सामाजिक और क्षेत्रीय गणित का भी संकेत माना जाएगा।

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भोपाल में कलियासोत डैम के 2 गेट खुले, श्योपुर में गुप्तेश्वर मंदिर डूबा; कई नदियां उफान पर

MP Heavy Rain:

MP Heavy Rain: मध्य प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के कारण कई जिलों में नदी और बांध उफान पर हैं। भोपाल में कलियासोत डैम के दो गेट खोलकर पानी छोड़ा गया है। वहीं श्योपुर में अमराल और कूनो नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। गुप्तेश्वर मंदिर पानी में डूब गया है, जबकि … Read more

सांसद निधि का आधा पैसा खर्च न होने पर भड़कीं कंगना रनौत, अधिकारियों को लगाई फटकार

Kangana Ranaut

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यूरिक एसिड को नेचुरल तरीके से कम करने के लिए रूटीन में करें ये बदलाव

Uric Acid:

Uric Acid: यूरिक एसिड बढ़ने पर अक्सर पैर के अंगूठे में अचानक तेज दर्द, जोड़ों में सूजन और अकड़न जैसी समस्याएं होने लगती हैं। हालांकि, यूरिक एसिड अपने आप में कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह शरीर में बनने वाला एक वेस्ट प्रोडक्ट है। शरीर जब प्यूरिन नाम के तत्व को तोड़ता है तो यूरिक एसिड बनता है। आमतौर पर किडनी खून से यूरिक एसिड को फिल्टर करके पेशाब के जरिए शरीर से बाहर निकाल देती है। लेकिन जब शरीर में इसका स्तर बढ़ जाता है या किडनी इसे पर्याप्त मात्रा में बाहर नहीं निकाल पाती, तो परेशानी हो सकती है।यूरिक एसिड को कंट्रोल करने के लिए दवाइयों के साथ-साथ डाइट और डेली रूटीन में बदलाव भी मददगार हो सकते हैं। Dr. Akshay Chugh, Internal Medicine & Metabolic Disorders, Metro Hospital and Heart Institute, Noida के मुताबिक, सही लाइफस्टाइल अपनाकर यूरिक एसिड को मैनेज करने में मदद मिल सकती है।

Uric Acid: पर्याप्त पानी पीने की डालें आदत-

यूरिक एसिड को मैनेज करने के लिए शरीर को हाइड्रेट रखना जरूरी है। पर्याप्त पानी पीने से किडनी को यूरिक एसिड को पेशाब के जरिए बाहर निकालने में मदद मिलती है। इसलिए दिनभर नियमित रूप से पानी पीते रहें और लंबे समय तक खुद को डिहाइड्रेट न होने दें। हालांकि, हर व्यक्ति के लिए पानी की जरूरत अलग हो सकती है। अगर आपको किडनी, हार्ट या किसी अन्य बीमारी की वजह से तरल पदार्थ सीमित करने की सलाह दी गई है, तो पानी की मात्रा डॉक्टर की सलाह के अनुसार रखें।

Uric Acid: हाई-प्यूरिन वाले खाने का सेवन करें सीमित-

यूरिक एसिड बढ़ने पर कुछ ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन कम करना फायदेमंद हो सकता है जिनमें प्यूरिन की मात्रा ज्यादा होती है। ऑर्गन मीट जैसे कलेजी, कुछ मीट और कुछ सीफूड इसके प्रमुख उदाहरण हैं। वहीं, दालों और सब्जियों को बिना वजह पूरी तरह बंद करने की जरूरत नहीं होती। कई पौधों से मिलने वाले खाद्य पदार्थों में प्यूरिन होने के बावजूद उनका असर मीट और सीफूड जैसा नहीं होता। इसलिए अपनी डाइट में बदलाव डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह से करना बेहतर है।

शुगर और मीठे ड्रिंक्स से बनाएं दूरी-

सिर्फ प्यूरिन ही नहीं, ज्यादा फ्रुक्टोज का सेवन भी यूरिक एसिड बढ़ने से जुड़ा हुआ है। पैक्ड फ्रूट जूस, कोल्ड ड्रिंक्स और ज्यादा मीठे सॉफ्ट ड्रिंक्स का सेवन कम करना बेहतर है। बिस्कुट, केक और पेस्ट्री जैसे ज्यादा चीनी वाले प्रोसेस्ड फूड की जगह ताजे फल और संतुलित भोजन को डाइट में शामिल किया जा सकता है।

विटामिन C वाले फलों को डाइट में करें शामिल-

आंवला, संतरा, मौसमी, अमरूद और नींबू जैसे फल विटामिन C के अच्छे स्रोत हैं। इन्हें संतुलित डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है।हालांकि, सिर्फ नींबू पानी पीने से यूरिक एसिड तुरंत कम होने की गारंटी नहीं है। इसे किसी इलाज या डॉक्टर द्वारा दी गई दवा का विकल्प नहीं समझना चाहिए।

शराब का सेवन यूरिक एसिड में बढ़ा सकता है परेशानी-

यूरिक एसिड बढ़ने की स्थिति में शराब का सेवन कम करना या उससे बचना फायदेमंद हो सकता है। खासतौर पर बीयर और कुछ अन्य अल्कोहलिक ड्रिंक्स यूरिक एसिड के स्तर और गाउट अटैक के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। इसलिए अगर आपको बार-बार यूरिक एसिड या गाउट की समस्या होती है तो शराब से दूरी बनाना बेहतर विकल्प हो सकता है।

वजन को धीरे-धीरे करें कंट्रोल-

अगर वजन ज्यादा है तो धीरे-धीरे वजन कम करना यूरिक एसिड को मैनेज करने में मदद कर सकता है। इसके लिए रोजाना पैदल चलना, साइकिल चलाना या योग जैसी शारीरिक गतिविधियों को अपनी दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है। हालांकि, वजन कम करने के लिए क्रैश डाइटिंग या लंबे समय तक भूखे रहने से बचें। बहुत तेजी से वजन घटाने या लंबे समय तक उपवास करने से कुछ परिस्थितियों में यूरिक एसिड अस्थायी रूप से बढ़ सकता है।

फाइबर से भरपूर चीजों को दें डाइट में जगह-

ओट्स, दलिया, सब्जियां, खीरा और गाजर जैसे फाइबर वाले खाद्य पदार्थ संतुलित डाइट का हिस्सा हो सकते हैं। इनसे वजन और ओवर-ऑल मेटाबॉलिक हेल्थ को मैनेज करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि फाइबर सीधे खून से यूरिक एसिड को सोखकर बाहर निकाल देता है। यूरिक एसिड को कंट्रोल करने में पूरी डाइट और लाइफस्टाइल का योगदान महत्वपूर्ण है।

यूरिक एसिड बढ़ा है तो इन बातों का रखें ध्यान-

यूरिक एसिड की समस्या होने पर अचानक बहुत लंबा उपवास करने से बचें और रात का खाना हल्का रखने की कोशिश करें। सोने से करीब 2 से 3 घंटे पहले खाना खत्म करना भी एक अच्छी आदत हो सकती है। इसके साथ ही डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय-समय पर यूरिक एसिड की जांच करवाते रहें। अगर पैर के अंगूठे या किसी जोड़ में अचानक तेज दर्द, लालिमा और सूजन हो तो खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें।

सिर्फ डाइट पर निर्भर न रहें-

यूरिक एसिड बढ़ने के पीछे खान-पान के अलावा वजन, किडनी की कार्यप्रणाली, जेनेटिक्स और कुछ दवाओं समेत कई कारण हो सकते हैं। इसलिए केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहना सही नहीं है। अगर यूरिक एसिड लगातार बढ़ा हुआ है या गाउट के अटैक बार-बार हो रहे हैं, तो डॉक्टर से जांच और उचित इलाज कराना जरूरी है। लाइफस्टाइल में बदलाव दवाइयों के साथ मददगार हो सकते हैं, लेकिन डॉक्टर द्वारा दी गई दवा को अपनी मर्जी से बंद नहीं करना चाहिए।

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Google Android Update:

Google Android Update: Google ने सितंबर का नया Android अपडेट जारी कर दिया है। इस बार कंपनी ने मैसेजिंग, AI और Accessibility से जुड़े कई नए फीचर्स पेश किए हैं। Google ने Gemini के साथ-साथ Messages और Find Hub में भी कई बदलाव किए हैं। इनमें एक ऐसा फीचर शामिल है, जिसकी मदद से बिना इंटरनेट कनेक्शन वाले सामान की लोकेशन भी सेव की जा सकेगी। इसके अलावा Motion Assist चलती कार या बस में फोन इस्तेमाल करते समय होने वाली मोशन सिकनेस को कम करने में मदद करेगा। वहीं Google Messages में चैट थीम और Google Keep की चेकलिस्ट शेयर करने जैसे फीचर्स भी जोड़े गए हैं। हालांकि, कुछ फीचर्स का रोलआउट अभी बाकी है।

Google Android Update: Find Hub में अब याद रहेगी जरूरी सामान की जगह-

अब Android के Find Hub में ऐसे सामान की लोकेशन भी सेव की जा सकेगी, जिनमें इंटरनेट कनेक्शन नहीं है। उदाहरण के लिए अगर आपको पासपोर्ट या कोई जरूरी दस्तावेज रखने की जगह याद नहीं रहती, तो उसकी लोकेशन Find Hub में सेव कर सकते हैं।सामान को आसानी से पहचानने के लिए उसकी फोटो भी सेव करने का विकल्प मिलेगा। बाद में Find Hub खोलकर देखा जा सकेगा कि सामान को आखिरी बार कहां रखा गया था।

Google Android Update: Motion Assist से सफर में कम होगी चक्कर आने की समस्या-

चलती कार या बस में फोन देखने पर कई लोगों को चक्कर आने या जी मिचलाने की समस्या होती है। Google का Motion Assist फीचर इसी परेशानी को कम करने के लिए बनाया गया है। यह फीचर स्क्रीन पर छोटे-छोटे बबल्स दिखाता है, जो गाड़ी और शरीर की मूवमेंट के हिसाब से स्क्रीन पर चलते हैं। इसका उद्देश्य आंखों और शरीर को मिलने वाले मूवमेंट सिग्नल्स के बीच के अंतर को कम करना है। यह सुविधा Android 17 के लिए है और इसे धीरे-धीरे रोलआउट किया जा रहा है।

Guided Vision में Gemini बताएगा कैमरे के सामने क्या है-

Google ने कम दिखाई देने वाले यूजर्स के लिए Guided Vision फीचर भी पेश किया है। Gemini Live की मदद से कैमरे को किसी ऑब्जेक्ट की तरफ करने पर Gemini आवाज के जरिए बता सकता है कि कैमरे के सामने क्या मौजूद है। इस फीचर को इस्तेमाल करने के लिए Settings में जाकर Accessibility Shortcuts में Guided Vision का शॉर्टकट सेट किया जा सकता है।

Google Messages में अब सीधे शेयर करें Keep की चेकलिस्ट-

अब Google Messages में बातचीत के दौरान Google Keep के नोट्स और चेकलिस्ट भी सीधे शेयर किए जा सकेंगे। यह फीचर खासतौर पर ग्रुप चैट में काफी काम आ सकता है। ग्रुप में मौजूद दूसरे लोग भी शेयर की गई चेकलिस्ट में बदलाव कर सकेंगे। इसे इस्तेमाल करने के लिए किसी चैट को खोलें, (+) बटन पर टैप करें और Google Keep के ‘येलो’ बल्ब आइकन को चुनें।

Google Messages में चैट को दें अपनी पसंद की थीम-

Google Messages में अब यूजर्स को अलग-अलग चैट के लिए अलग थीम लगाने का विकल्प मिलेगा। इसमें चैट का कलर, वॉलपेपर और अपनी पसंद की फोटो लगाने की सुविधा शामिल है। खास बात यह है कि चुनी गई थीम या फोटो सिर्फ आपको दिखाई देगी। सामने वाले व्यक्ति की चैट में इसका बदलाव नहीं होगा। यह सेटिंग पूरे Messages ऐप पर लागू होने के बजाय सिर्फ उस खास चैट तक सीमित रहेगी। चैट थीम लगाने के लिए कोई भी चैट खोलें और ऊपर दाईं तरफ दिए गए तीन डॉट्स पर टैप करें। इसके बाद Chat Theme में जाकर अपनी पसंद का कलर, वॉलपेपर या फोटो चुन सकते हैं।

Android यूजर्स के लिए कितना खास है यह अपडेट-

Google का यह नया अपडेट AI, Accessibility और रोजमर्रा के इस्तेमाल से जुड़े कई उपयोगी फीचर्स लेकर आया है। Find Hub का नया फीचर जरूरी सामान की जगह याद रखने में मदद करेगा, जबकि Motion Assist सफर के दौरान फोन इस्तेमाल करने वाले यूजर्स के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। हालांकि, सभी फीचर्स का रोलआउट हर डिवाइस पर एक साथ नहीं हुआ है। ऐसे में कुछ यूजर्स को इन सुविधाओं का इस्तेमाल करने के लिए अभी थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है।

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AK-203 के लिए भारत में बनेगा गोला-बारूद, अडाणी डिफेंस से 5 साल का करार

AK-203 Ammunition:

AK-203 Ammunition: भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक अहम समझौता हुआ है। अडाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस और इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड (IRRPL) के बीच पांच साल के लिए करार हुआ है। इस समझौते के तहत भारत में निर्मित 7.62×39 एमएम स्मॉल-कैलिबर गोला-बारूद की आपूर्ति की जाएगी। इसका इस्तेमाल देश … Read more