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अर्नब के बाद अब मुरासु का खतरा! बंगाल की खाड़ी से उठे तूफान की पूरी कहानी समझिए

Murasu Cyclone: अर्नब के बाद बंगाल की खाड़ी से उठे अब मुरासु का खतरा!

Murasu Cyclone: आंध्र प्रदेश अभी चक्रवात अर्नब से हुए नुकसान से उबर भी नहीं पाया है कि बंगाल की खाड़ी में एक और चक्रवाती तूफान मुरासु ने चिंता बढ़ा दी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, 1 नवंबर 2026 को बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना गहरा दबाव चक्रवाती तूफान मुरासु में बदल गया। इसके दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट से टकराने की आशंका है। मौसम विभाग ने तेज हवाओं, भारी बारिश और समुद्र में ऊंची लहरों को लेकर चेतावनी जारी की है।

बंगाल की खाड़ी में कैसे बना मुरासु तूफान?

मुरासु की शुरुआत बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्र से हुई थी। समुद्र के ऊपर गर्म और नम हवा के कारण यह सिस्टम धीरे-धीरे मजबूत होता गया। पहले यह अवदाब और फिर गहरे अवदाब में बदला। 1 नवंबर को सुबह 11:30 बजे यह चक्रवाती तूफान बन गया। इसके बाद यह पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ने लगा।

Murasu Cyclone: कहां और कब टकरा सकता है मुरासु?

IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, मुरासु 2 नवंबर को और शक्तिशाली होकर गंभीर चक्रवाती तूफान बन सकता है। इसके 2 नवंबर की रात से 3 नवंबर की सुबह के बीच नेल्लोर और नरसापुर के बीच दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट को पार करने की संभावना है। हालांकि, तूफान का वास्तविक रास्ता और टकराने का समय मौसम विभाग के अगले बुलेटिन के अनुसार बदल सकता है।

कितनी होगी तूफान की रफ्तार?

तूफान के तट पार करने के दौरान 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है। हवा के झोंके 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं। इतनी तेज हवाओं से पेड़, बिजली के खंभे और कमजोर मकानों को नुकसान पहुंच सकता है। समुद्र में ऊंची लहरें उठने और मछुआरों के लिए समुद्र की स्थिति खतरनाक होने की आशंका है।

Murasu Cyclone: किन इलाकों में भारी बारिश का अलर्ट?

मौसम विभाग ने दक्षिण तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा में भारी से बहुत भारी बारिश की आशंका जताई है। कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश भी हो सकती है। तटीय इलाकों में तेज हवाओं और बारिश के कारण जलभराव, सड़क यातायात और बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। ओडिशा के दक्षिणी हिस्सों में भी बारिश को लेकर सतर्कता बरती जा रही है।

अर्नब के बाद दूसरा तूफान क्यों बढ़ा रहा चिंता?

चक्रवात अर्नब ने अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों को प्रभावित किया था। तेज हवाओं और बारिश से कई क्षेत्रों में मकानों, पेड़ों और बिजली व्यवस्था को नुकसान पहुंचा था। अब कुछ ही दिनों के अंतराल पर मुरासु का खतरा सामने आया है। प्रशासन ने तटीय क्षेत्रों में तैयारियां तेज करने और लोगों से मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने की अपील की है। मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी गई है।

 

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