Bihar NDA Politics: बिहार में विधान परिषद चुनाव के बाद सत्तारूढ़ NDA गठबंधन के अंदर राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। इसकी वजह दो निर्दलीय उम्मीदवारों का भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होना है। खास बात यह है कि इन दोनों ने विधान परिषद चुनाव में जनता दल यूनाइटेड (JDU) के उम्मीदवारों को हराया था। शनिवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात करने के बाद दोनों निर्दलीय उम्मीदवारों ने BJP की सदस्यता ले ली।इस घटनाक्रम के बाद JDU नेता आनंद पुष्कर ने नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने BJP के कुछ नेताओं पर गठबंधन की जिम्मेदारी नहीं निभाने का आरोप लगाया है। अब इस मामले को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या बिहार में NDA के सहयोगी दलों के बीच सब कुछ ठीक चल रहा है? आइए जानते हैं पूरा मामला।
Bihar NDA Politics: BJP में शामिल हुए दोनों निर्दलीय उम्मीदवार कौन हैं?
बिहार विधान परिषद की दो सीटों पर हुए चुनाव में JDU को निर्दलीय उम्मीदवारों के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार राहुल राज ने JDU के प्रत्याशी आनंद पुष्कर को हराया था। वहीं, तिरहुत स्नातक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार बंशीधर ब्रजवासी ने JDU के अभिषेक झा को मात दी थी।इन दोनों उम्मीदवारों की जीत से JDU को पहले ही झटका लगा था। अब चुनाव के बाद दोनों का BJP में शामिल होना NDA के अंदर राजनीतिक तालमेल को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।
आनंद पुष्कर ने BJP नेताओं पर क्या आरोप लगाए?
सारण शिक्षक सीट से JDU के उम्मीदवार रहे आनंद पुष्कर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने BJP सांसद राजीव प्रताप रूडी और मोतिहारी के सांसद राधा मोहन सिंह की भूमिका पर सवाल उठाए।आनंद पुष्कर का कहना है कि गठबंधन के तहत हुए चुनावों में BJP के कुछ नेताओं ने JDU उम्मीदवारों को जरूरी सहयोग नहीं दिया। उन्होंने सवाल किया कि क्या गठबंधन की जिम्मेदारी सिर्फ उसी समय याद आती है, जब BJP नेताओं को अपने चुनाव के लिए वोट मांगने होते हैं?उन्होंने कहा कि BJP के नेता अपने चुनाव प्रचार के दौरान नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में हुए विकास कार्यों का जिक्र करते हैं और उनके नाम पर लोगों से वोट मांगते हैं। लेकिन जब JDU उम्मीदवारों को समर्थन देने की बारी आती है, तो वही सहयोग और प्रतिबद्धता नजर नहीं आती।
Bihar NDA Politics: मौजूदा MLC को लेकर क्या था पूरा विवाद?
आनंद पुष्कर ने चुनाव प्रचार के दौरान हुई बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें लगातार भरोसा दिलाया गया था कि मौजूदा विधान परिषद सदस्य को चुनाव लड़ने से रोक लिया जाएगा। साथ ही, यह भी कहा गया था कि वह गठबंधन के फैसले को मान लेंगे।हालांकि, पुष्कर के मुताबिक ऐसा नहीं हुआ। मौजूदा MLC ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने का फैसला कर लिया।इस पर उन्होंने सवाल उठाया कि जब उन्हें पहले उम्मीदवार के चुनाव से पीछे हटने का भरोसा दिया गया था, तो बाद में परिस्थितियां कैसे बदल गईं? उन्होंने यह संदेह भी जताया कि निर्दलीय उम्मीदवार को चुनाव के बाद BJP में शामिल कराने की योजना पहले से ही तैयार थी।
चुनाव प्रचार में भी सहयोग नहीं मिलने का दावा
आनंद पुष्कर ने चुनाव प्रचार के दौरान सहयोग की कमी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बताया कि NDA की बैठक में सभी नेताओं ने मिलकर फैसला किया था कि वे स्कूलों में जाएंगे, शिक्षकों से मिलेंगे और गठबंधन के उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार करेंगे।लेकिन उनके आरोप के अनुसार, BJP के कई सांसदों और विधायकों ने इस फैसले पर काम नहीं किया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के बीच जिस तरह के प्रचार और समर्थन की उम्मीद थी, वह जमीन पर देखने को नहीं मिला।
Bihar NDA Politics: नीतीश कुमार और JDU के प्रति जताया भरोसा
BJP नेताओं की भूमिका पर नाराजगी जाहिर करने के बावजूद आनंद पुष्कर ने JDU और नीतीश कुमार के प्रति अपनी निष्ठा साफ की है।उन्होंने खुद को पार्टी का पुराना कार्यकर्ता बताते हुए कहा कि वह पहले भी JDU के साथ थे, आज भी पार्टी के साथ हैं और आगे भी जुड़े रहेंगे। इसके साथ ही उन्होंने बिहार के विकास में नीतीश कुमार के योगदान की तारीफ की।
क्या NDA के सहयोगी दलों के बीच बढ़ रही है दूरी?
बिहार में सामने आए इस पूरे मामले में दो प्रमुख बातें हैं। पहली, विधान परिषद चुनाव में JDU उम्मीदवारों को हराने वाले दोनों निर्दलीय प्रत्याशियों का चुनाव के बाद BJP में शामिल होना। दूसरी, आनंद पुष्कर का आरोप कि चुनाव के दौरान गठबंधन के कुछ नेताओं ने JDU उम्मीदवारों को जरूरी समर्थन नहीं दिया।इस घटनाक्रम ने NDA के अंदर सहयोगी दलों के बीच आपसी तालमेल, चुनाव प्रचार में एक-दूसरे को समर्थन देने और गठबंधन के फैसलों को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। हालांकि, इस विवाद से गठबंधन के भीतर बढ़ती दूरी को लेकर सवाल जरूर उठने लगे हैं।








