BJP’s march: INDIA ब्लॉक की दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली के बीच भाजपा ने भी देशभर में मोर्चा खोल दिया है। पार्टी ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत दिल्ली समेत कई राज्यों में मार्च निकाल रही है। भाजपा ने विपक्ष की SIR विरोधी रैली पर सवाल उठाते हुए 1984 के सिख विरोधी दंगों और दिल्ली के व्यापारियों को होने वाले संभावित नुकसान का मुद्दा भी उठाया। भाजपा के इस मार्च के पीछे क्या रणनीति है और दोनों पक्षों के बीच टकराव की असली वजह क्या है? सवाल-जवाब में समझिए पूरा मामला।
1. भाजपा ने विपक्ष की रैली के खिलाफ मार्च क्यों निकाला?
INDIA ब्लॉक के नेता 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ रैली कर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि SIR के नाम पर मतदाता सूची से पात्र लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं और चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसके जवाब में भाजपा ने ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ मार्च निकालने का फैसला किया। पार्टी का कहना है कि विपक्ष चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाकर संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को कमजोर कर रहा है। भाजपा इस अभियान के जरिए SIR का समर्थन कर रही है और विपक्ष के ‘वोट चोरी’ के आरोपों को गलत बताकर अपना पक्ष जनता तक पहुंचाना चाहती है।
BJP’s march: 2. दिल्ली में भाजपा का मार्च कहां से कहां तक निकाला गया?
दिल्ली में भाजपा का मार्च केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के नेतृत्व में हरि नगर से तिलक नगर तक निकाला जा रहा है। करीब एक किलोमीटर लंबे इस मार्च में 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ित परिवारों और सिख समुदाय के लोगों के साथ लगभग 5 हजार लोगों के शामिल होने की बात कही गई है। भाजपा ने इस मार्च को विपक्ष की रैली के जवाब के तौर पर पेश किया है। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस ने SIR के विरोध में रैली के लिए 1 नवंबर की तारीख जानबूझकर चुनी, जबकि इसी दिन 1984 में सिख विरोधी हिंसा शुरू हुई थी।

3. भाजपा ने 1984 के सिख विरोधी दंगों का मुद्दा क्यों उठाया?
31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश के कई हिस्सों में सिख विरोधी हिंसा भड़क उठी थी। 1 नवंबर से दिल्ली समेत कई जगहों पर बड़े पैमाने पर हिंसा हुई। इस दौरान सिख समुदाय के लोगों की हत्या की गई, घरों और दुकानों को निशाना बनाया गया।
भाजपा इसी ऐतिहासिक घटना का हवाला देकर कांग्रेस और राहुल गांधी को घेर रही है। पार्टी का कहना है कि जिस दिन सिख विरोधी हिंसा के पीड़ितों को याद किया जाना चाहिए, उस दिन कांग्रेस ने राजनीतिक रैली आयोजित की। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने आरोप लगाया कि गांधी परिवार ने आज तक सिख परिवारों से दिल से माफी नहीं मांगी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है। यह मुद्दा भाजपा के लिए कांग्रेस को उसके पुराने राजनीतिक इतिहास के आधार पर घेरने का भी मौका बन गया है।
BJP’s march: 4. जेपी नड्डा ने राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक पर क्या आरोप लगाए?
जेपी नड्डा ने दिल्ली में व्यापारियों को होने वाले नुकसान का मुद्दा उठाते हुए राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि त्योहारों के समय व्यापारी पूरे साल की कमाई की उम्मीद करते हैं, लेकिन विपक्ष की बड़ी रैली से उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है।
नड्डा के मुताबिक, चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने राहुल गांधी को चार बार पत्र लिखकर बड़े प्रदर्शन से बचने की अपील की थी। उन्होंने दावा किया कि रैली के कारण दिल्ली के व्यापारियों को करीब 10 हजार करोड़ रुपये के नुकसान की आशंका है। नड्डा ने INDIA ब्लॉक के नेताओं से सवाल किया कि क्या वे भी इस नुकसान के लिए जिम्मेदार हैं? उन्होंने राहुल गांधी पर विदेश जाकर भारत का अपमान करने का आरोप भी लगाया।
5. भाजपा का ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान कब शुरू हुआ?
भाजपा ने विपक्ष के वोट चोरी के आरोपों और SIR के विरोध के जवाब में यह अभियान शुरू किया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 22 अक्टूबर 2026 से इसकी तैयारियां और संगठनात्मक निर्देश जारी किए गए थे। 23 अक्टूबर को इसकी देशव्यापी रूपरेखा सामने आई। अभियान का पहला चरण 22 अक्टूबर से 5 नवंबर तक चलना है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पार्टी की राज्य इकाइयों को इस अभियान के तहत कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। शुरुआत में इस अभियान का नारा ‘लोकतंत्र बचाओ, भीड़तंत्र हटाओ’ रखा गया था। बाद में इसमें बदलाव कर ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ कर दिया गया।

BJP’s march: 6. भाजपा ने किन राज्यों में मार्च निकाला?
भाजपा ने दिल्ली के अलावा दूसरे राज्यों में भी इस अभियान के तहत कार्यक्रम आयोजित किए। दिल्ली: केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के नेतृत्व में हरि नगर से तिलक नगर तक मार्च। हरियाणा: भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने रोहतक में मार्च निकाला। हिमाचल प्रदेश: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में शिमला में मार्च आयोजित किया गया। इसका समापन चौरा मैदान में रैली के साथ होना है। महाराष्ट्र: मुंबई के बोरीवली में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में भाजपा ने मार्च निकाला।
7. SIR को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच विवाद क्या है?
SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची की जांच करना, उसमें जरूरी सुधार करना और पात्र मतदाताओं के नाम शामिल करना है। भाजपा का कहना है कि मतदाता सूची को दुरुस्त करना जरूरी है और चुनाव आयोग इसी प्रक्रिया के तहत काम कर रहा है। पार्टी विपक्ष पर बिना आधार चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने का आरोप लगा रही है।
वहीं, विपक्षी दलों की चिंता है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हट सकते हैं। राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई नेता चुनाव आयोग पर वोट चोरी और मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोप लगाते रहे हैं। इस तरह विवाद सिर्फ SIR की प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाता अधिकारों और चुनावी निष्पक्षता को लेकर भी दोनों पक्ष आमने-सामने हैं।
BJP’s march: 8. भाजपा के मार्च के पीछे क्या है सियासी रणनीति?
भाजपा का यह अभियान विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के साथ-साथ राजनीतिक मुद्दों को नए सिरे से सामने रखने की कोशिश भी है। पार्टी SIR को सही ठहराकर चुनाव आयोग का बचाव कर रही है और कांग्रेस को 1984 के सिख विरोधी दंगों की याद दिलाकर घेर रही है। वहीं, व्यापारियों के संभावित नुकसान का मुद्दा उठाकर भाजपा विपक्ष की रैली को आम लोगों और कारोबारियों की परेशानी से जोड़ना चाहती है। दूसरी तरफ INDIA ब्लॉक SIR के मुद्दे को मतदाता अधिकारों और लोकतंत्र की रक्षा से जोड़ रहा है। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच टकराव अब केवल मतदाता सूची के पुनरीक्षण तक सीमित नहीं रह गया है। यह राजनीतिक नैरेटिव और जनता के बीच अपनी बात मजबूत करने की लड़ाई भी बन गया है।
देश में सियासी टकराव जारी
दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA ब्लॉक की रैली और उसके जवाब में भाजपा का देशव्यापी मार्च दिखाता है कि SIR का मुद्दा अब बड़ा राजनीतिक टकराव बन चुका है। विपक्ष इसे मतदाता अधिकारों से जोड़ रहा है, जबकि भाजपा इसे चुनाव आयोग और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विपक्ष के हमले के जवाब के रूप में पेश कर रही है। 1984 के सिख विरोधी दंगों और व्यापारियों के नुकसान का मुद्दा उठाकर भाजपा ने इस राजनीतिक लड़ाई को और व्यापक बनाने की कोशिश की है।
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