Maharashtra News: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और देश की राजनीति के शांत स्वभाव वाले चेहरों में गिने जाने वाले शिवराज पाटिल का शुक्रवार सुबह निधन हो गया। 90 वर्षीय पाटिल कुछ दिनों से बीमार थे और अपने लातूर स्थित आवास पर उपचार ले रहे थे। सुबह 6:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
परिजनों ने बताया कि अंतिम संस्कार शनिवार को किया जाएगा।
Maharashtra News: लातूर से उठकर राष्ट्रीय राजनीति में स्थापित
1966 में नगर परिषद अध्यक्ष के रूप में सार्वजनिक जीवन की शुरुआत करने वाले पाटिल ने धीरे-धीरे महाराष्ट्र विधानसभा और फिर संसद तक अपनी पहचान को मज़बूत किया।दो बार विधायक बनने के बाद वे विधानसभा के स्पीकर और डिप्टी स्पीकर भी रहे।बाद में वे लातूर से सात बार लोकसभा चुनाव जीतकर राष्ट्रीय राजनीति में एक स्थायी स्थान बना गए।इंदिरा और राजीव गांधी के दौर में उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ मिलीं और वे रक्षा मंत्रालय तक पहुँचे।
Maharashtra News: लोकसभा अध्यक्ष से लेकर गृह मंत्रालय तक संतुलित कार्यशैली
1991 में वे देश के लोकसभा अध्यक्ष बने। सदन के संचालन में उनकी संयमित शैली को व्यापक रूप से सराहा गया।
यूपीए सरकार में 2004 से 2008 तक उन्होंने गृह मंत्री की जिम्मेदारी निभाई।
26/11 के बाद उठाया नैतिक कदम
मुंबई में 2008 के आतंकी हमलों के समय सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठे।घटनाओं के बाद बढ़ती आलोचना के बीच पाटिल ने नैतिक आधार पर पद छोड़ने का निर्णय लिया।ध्यान देने वाली बात यह है कि उनकी आत्मकथा ‘Odyssey of My Life’ में इस घटना का कोई जिक्र नहीं है।
Maharashtra News:राज्यपाल और प्रशासक के रूप में भी निभाई जिम्मेदारियाँ
केंद्र सरकार से हटने के बाद उन्हें पंजाब का राज्यपाल नियुक्त किया गया।इसके अलावा वे कई वर्षों तक चंडीगढ़ के प्रशासक भी रहे।उनकी छवि एक सादगीपूर्ण, शांत और नियमप्रिय प्रशासक की रही।
शीर्ष नेताओं ने जताया दुख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई राष्ट्रीय नेताओं ने उनके निधन पर संवेदना व्यक्त की और उनके लंबे सार्वजनिक जीवन की सराहना की।
Maharashtra News: एक बयान ने खड़ी की थी राष्ट्रीय बहस
2022 में एक कार्यक्रम के दौरान पाटिल ने गीता, कुरान और ईसाई धर्मग्रंथों में जिहाद के संदर्भ पर टिप्पणी की थी, जिसके बाद वे राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गए थे।
उम्मीदों, विवादों और जिम्मेदारियों से भरा रहा पाटिल का सफर
अपने शांत स्वभाव, औपचारिकता और संतुलित राजनीतिक दृष्टिकोण के कारण शिवराज पाटिल को लंबे समय तक एक भरोसेमंद प्रशासक और विचारशील नेता के रूप में देखा गया।उनके निधन के साथ भारतीय राजनीति का एक अनुभवी अध्याय समाप्त हो गया।
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