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खीरी के किसान गुजरात में सीखेंगे ‘वेस्ट टू वेल्थ’ के गुर, CDO की पहल से पलिया के 25 कृषक हुए रवाना

Lakhimpur Kheri

Lakhimpur Kheri: लखीमपुर खीरी जनपद के कृषि इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। लखीमपुर खीरी, जो अपनी गन्ने की मिठास के लिए प्रसिद्ध है, अब केले की खेती के क्षेत्र में भी नए कीर्तिमान स्थापित करने की ओर अग्रसर है। जनपद के मुख्य विकास अधिकारी (CDO) अभिषेक कुमार की एक दूरदर्शी पहल ने विकासखंड पलिया के किसानों के लिए समृद्धि के नए द्वार खोल दिए हैं। शुक्रवार को विकास भवन परिसर से सीडीओ ने पलिया ब्लॉक के 25 प्रगतिशील किसानों के एक दल को गुजरात के लिए एक्सपोजर विजिट (अध्ययन यात्रा) पर रवाना किया।

बस के भीतर पहुंचे सीडीओ

रवानगी का नजारा तब बेहद खास हो गया जब सीडीओ अभिषेक कुमार प्रोटोकॉल छोड़कर खुद किसानों की बस के भीतर दाखिल हुए। उन्होंने प्रत्येक किसान से हाथ मिलाकर उनका परिचय लिया और यात्रा के उद्देश्य को स्पष्ट किया। उन्होंने किसानों से कहा, “आप केवल यात्री बनकर नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण लेकर गुजरात जा रहे हैं। वहां की बारीकियों को समझना और उसे अपने खेतों में उतारना ही इस यात्रा की वास्तविक सफलता होगी।” सीडीओ के इस सरल व्यवहार ने किसानों के मनोबल को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया।

आपको बता दें कि लखीमपुर खीरी के तराई क्षेत्रों, विशेषकर पलिया में केले की बड़े पैमाने पर खेती होती है। लेकिन फसल कटाई के बाद जो तने (Pseudo Stem) बच जाते हैं, वे किसानों के लिए एक बड़ी समस्या बन जाते हैं। किसान इन्हें खेतों से हटवाने के लिए मजदूरों को पैसा देते हैं या इन्हें जला देते हैं, जिससे पर्यावरण को भी नुकसान होता है। सीडीओ अभिषेक कुमार की इस पहल का मुख्य केंद्र ‘केले के तने से कमाई’ करना है। गुजरात की उन्नत प्रयोगशालाओं और प्रसंस्करण केंद्रों (Processing Units) में यह किसान सीखेंगे कि कैसे…

  • फाइबर निष्कर्षण: तने से रेशा निकालकर उसे कपड़ा और हस्तशिल्प उद्योग को बेचा जा सके।
  • तरल जैविक खाद: तने के अंदर मौजूद खनिज युक्त रस से बेहतरीन जैविक खाद तैयार करना।
  • हस्तशिल्प निर्माण: बचे हुए रेशों से चटाई, टोकरियाँ और बैग तैयार कर बाजार में उतारना।

Lakhimpur Kheri: 150 परिवारों के जीवन में आएगा बदलाव

प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, यह केवल 25 किसानों की यात्रा नहीं है, बल्कि एक व्यापक परियोजना का हिस्सा है। इस पूरी योजना से 50 चयनित किसान और 100 स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाएं लाभान्वित होंगी। मास्टर ट्रेनर: गुजरात से लौटकर ये 25 किसान अपने क्षेत्र के अन्य 25 किसानों को प्रशिक्षित करेंगे। जबकि महिला सशक्तिकरण: 100 महिलाएं रेशे से उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण लेंगी, जिससे ग्रामीण स्तर पर कुटीर उद्योगों की श्रृंखला तैयार होगी।

तकनीक को गांव-गांव पहुंचाने की प्रेरणा

सीडीओ ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि यह तकनीक फाइलों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने किसानों को प्रेरित किया कि वे वापस आकर अपने अनुभवों को गांव की चौपालों पर साझा करें। लक्ष्य यह है कि आने वाले समय में पलिया ब्लॉक का हर वह किसान जो केले की खेती करता है, वह तने को फेंके नहीं बल्कि उसे बेचकर या प्रोसेस करके अतिरिक्त आय अर्जित करे।

Report By: संजय कुमार राठौर   

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