Lakhimpur Kheri: लखीमपुर खीरी जनपद की तहसील मोहम्मदी इन दिनों एक ऐसी समस्या से जूझ रही है, जो किसी भी वक्त एक बड़ी त्रासदी में बदल सकती है। नगर की मुख्य सड़कों पर भारी भरकम ओवरलोड ट्रकों के अनियंत्रित आवागमन ने आम जनजीवन को पूरी तरह से पटरी से उतार दिया है। मोहम्मदी की संकरी सड़कों पर दिन-रात दौड़ने वाले ये ‘सड़क के दानव’ न केवल घंटों लगने वाले जाम का सबब बन रहे हैं, बल्कि सड़कों के ऊपर लटक रहे बिजली के हाई-वोल्टेज तारों को छूकर मौत को खुला आमंत्रण दे रहे हैं। प्रशासन की चुप्पी और परिवहन विभाग की अनदेखी ने मोहम्मदी को एक ‘ट्रैफिक नर्क’ में तब्दील कर दिया है।
मोहम्मदी की सड़कों पर थम गई जिंदगी
मोहम्मदी नगर के प्रमुख मार्ग और चौराहे, जो कभी व्यापारिक चहल-पहल का केंद्र हुआ करते थे, अब भारी ट्रकों के कब्जे में हैं। गन्ने, मौरंग, गिट्टी और लकड़ियों से क्षमता से अधिक लदे ये ट्रक जब नगर की सीमाओं में प्रवेश करते हैं, तो पीछे वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। विडंबना यह है कि इस जाम में गंभीर मरीजों को ले जा रही एम्बुलेंस और स्कूल से घर लौट रहे मासूम बच्चे घंटों फंसे रहते हैं। चीखती एम्बुलेंस के सायरन इन ट्रकों के शोर में दब जाते हैं। ट्रकों की लंबाई और चौड़ाई इतनी अधिक होती है कि सड़कों के किनारे पैदल चलने वाले राहगीरों को भी अपनी जान बचाने के लिए नालियों या दुकानों के भीतर घुसना पड़ता है।
Lakhimpur Kheri: बिजली के तारों और ट्रकों के बीच ‘खतरनाक खेल’
मोहम्मदी नगर में बिजली व्यवस्था के जर्जर तार सड़कों पर काफी नीचे तक लटक रहे हैं। ओवरलोड होने के कारण इन ट्रकों की ऊंचाई मानकों से कहीं ज्यादा होती है। जब ये ट्रक सड़कों से गुजरते हैं, तो ऊपर लटक रहे बिजली के तार इनके ऊपरी हिस्से से रगड़ खाते हुए निकलते हैं। कई बार तारों से निकलने वाली चिंगारियां नीचे चल रहे राहगीरों और दुकानदारों के ऊपर गिरती हैं। अगर कोई तार टूटकर ट्रक की बॉडी या सड़क पर गिर जाए, तो मोहम्मदी के घने बाजार में आग का तांडव मच सकता है। बिजली विभाग इस खतरे को जानकर भी अनजान बना हुआ है, और बिजली के पोल तथा तारों को ऊंचा करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है।
‘नो एंट्री’ के दावों की खुली पोल
आश्चर्य की बात यह है कि शहर के भीतर भारी वाहनों के प्रवेश के लिए ‘नो एंट्री’ के समय निर्धारित होते हैं, लेकिन मोहम्मदी में ऐसा प्रतीत होता है कि कानून केवल कागजों तक सीमित है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि पुलिस और संबंधित विभाग की मिलीभगत से ये ट्रक दिन के उजाले में भी भीड़भाड़ वाले इलाकों से बेखौफ गुजरते हैं। चर्चा आम है कि ओवरलोडिंग के इस काले खेल में कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और ट्रक मालिकों के बीच की साठगांठ ने जनता की सुरक्षा को ताक पर रख दिया है।
मोहम्मदी के स्थानीय व्यापारियों में इस अव्यवस्था को लेकर भारी आक्रोश है। जाम के कारण ग्रामीण इलाकों से आने वाले ग्राहक शहर में रुकने के बजाय सीधे निकल जाना पसंद करते हैं। दुकानों के सामने ट्रकों के खड़े रहने से व्यापार चौपट हो रहा है। इन ट्रकों से निकलने वाला जहरीला धुआं और प्रेशर हॉर्न का शोर बुजुर्गों और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो रहा है। नगर पालिका परिषद और स्थानीय पुलिस प्रशासन एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ रहे हैं। नगर पालिका का कहना है कि यातायात व्यवस्था पुलिस का काम है, जबकि पुलिस संसाधनों की कमी का रोना रोती है। इस खींचतान में पिस केवल मोहम्मदी की जनता रही है। संजय कुमार राठौर की इस विशेष रिपोर्ट के अनुसार, मोहम्मदी नगर इस समय एक ज्वालामुखी पर बैठा है। ओवरलोड ट्रकों की धमक और बिजली के तारों की चिंगारी किसी भी पल एक बड़ी दुर्घटना को अंजाम दे सकती है। क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? मोहम्मदी की जनता अब ‘भरोसा’ नहीं, ‘कार्रवाई’ चाहती है।
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