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Ukraine War: क्या नए साल में थमेगा यूक्रेन युद्ध? पुतिन के रुख के बीच दिखे संकेत

Ukraine War को समाप्त करने की दिशा में कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। ट्रंप और जेलेंस्की की मुलाकात के बाद शांति समझौते के संकेत मिले हैं, हालांकि रूस का सख्त रुख अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
ट्रंप ने झोंकी पूरी कूटनीतिक ताकत

Ukraine War: चार साल से यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे युद्ध को खत्म कराने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपना पूरा जोर लगा दिया है। रविवार को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने फ्लोरिडा के पाम बीच स्थित मार-ए-लागो क्लब में डोनाल्ड ट्रंप से मुकालात की। इसके बाद ट्रंप ने संकेत दिए कि यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की दिशा में बड़ा समझौता पूरा होने के बहुत करीब है।

शांति समझौता पूरा होने के करीब

ट्रंप ने भरोसा जताया कि दोनों देश समझौते के काफी करीब, शायद बहुत करीब पहुंच चुके हैं। जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि अमेरिका और यूक्रेन की टीमें अगले ही हफ्ते चर्चा किए गए सभी मुद्दों को अंतिम रूप देने के लिए मिलेंगी। उन्होंने यह भी बताया कि ट्रंप अगले महीने वाशिंगटन में यूक्रेनी और यूरोपीय नेताओं के साथ बैठक करेंगे।

रूस की ओर से क्रेमलिन के प्रवक्ता यूरी उशाकोव ने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत दो कार्य समूहों के जरिए जारी रहेगी। एक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर और दूसरा आर्थिक मामलों पर। इन समूहों की शर्तें करीब जनवरी की शुरुआत में तय होंगी।

Ukraine War: ट्रंप ने झोंकी पूरी कूटनीतिक ताकत
ट्रंप ने झोंकी पूरी कूटनीतिक ताकत

Ukraine War: क्रेमलिन ने बातचीत के ढांचे की जानकारी दी

20 बिंदुओं वाले शांति प्रस्ताव को लेकर हुई बैठक के बाद जेलेंस्की ने बताया, “हमने शांति ढांचे के सभी पहलुओं पर चर्चा की और महत्वपूर्ण प्रगति की। आगे की कार्रवाई के क्रम पर भी सहमति बनी। स्थायी शांति के लिए सुरक्षा गारंटी सबसे अहम है और इस पर काम जारी रहेगा।”

इस बैठक के दौरान ट्रंप और जेलेंस्की ने यूरोपीय नेताओं के साथ एक कॉन्फ्रेंस कॉल भी की। इसमें यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर शामिल थे। यूक्रेन को पश्चिमी यूरोप और कनाडा का मजबूत समर्थन हासिल है, जो ट्रंप पर भी दबाव बना रहे हैं।

वॉन डेर लेयेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ब्लूस्काई’ पर लिखा, “अच्छी प्रगति हुई है, जिसका हमने स्वागत किया।” उन्होंने भी जेलेंस्की की तरह कहा कि किसी भी शांति समझौते के लिए मजबूत और भरोसेमंद सुरक्षा गारंटी सबसे जरूरी है।

अमेरिका और यूरोप की भूमिका तय

गौरतलब है कि इस शांति योजना के तहत पश्चिमी यूरोपीय देश यूक्रेन को सैन्य सहायता देंगे और यूक्रेन चाहता है कि अमेरिका इसे द्विपक्षीय सुरक्षा समझौते के जरिए समर्थन दे। इस सुरक्षा ढांचे की नींव यूक्रेन की यूरोपीय संघ की सदस्यता होगी।

ट्रंप ने सुरक्षा गारंटी के विचार का समर्थन किया, हालांकि इसके विवरण पर उन्होंने कहा, “एक सुरक्षा समझौता होगा। यह मजबूत समझौता होगा। इसमें यूरोपीय देश पूरी तरह शामिल होंगे।” जेलेंस्की से मिलने से पहले ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से एक घंटे से ज्यादा बातचीत की। ट्रंप ने कहा, “पुतिन इसे होते देखना चाहते हैं। मुझे उन पर भरोसा है।”

पुतिन के रुख की चुनौती

उशाकोव के अनुसार, पुतिन ने ट्रंप से कहा कि कीव को साहसिक और जिम्मेदार राजनीतिक फैसला लेना होगा, जो रूस के रुख के अनुरूप हो। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप ने पुतिन से माना कि “यूक्रेन संकट उनकी सबसे बड़ी विदेश नीति चुनौती रहा है।

अपने चुनाव प्रचार के दौरान ट्रंप ने कहा था कि वे सत्ता संभालते ही 24 घंटे में यूक्रेन युद्ध खत्म कर देंगे, लेकिन 11 महीने बाद भी पुतिन के साथ शिखर बैठक, जेलेंस्की से कई मुलाकातों और महीनों की कूटनीति के बावजूद युद्ध जारी है।

नाटो सदस्यता के बिना यूक्रेन को सुरक्षा गारंटी देने के अलावा, डोनबास क्षेत्र का भविष्य भी बड़ी बाधा बना हुआ है। रूस चाहता है कि डोनबास का पूरा इलाका (यहां तक कि जो उसके कब्जे में नहीं है) उसे मिल जाए। एक समय ट्रंप इस पर सहमत दिखे थे, लेकिन जेलेंस्की ने इसे सैन्य मुक्त क्षेत्र बनाने का प्रस्ताव रखा।

समझौते की अनिश्चितता

पुतिन डोनबास को सैन्य ताकत से हासिल करने पर अड़े दिखते हैं। उशाकोव ने चेतावनी दी कि मोर्चे पर बदलते हालात को देखते हुए, यूक्रेनी शासन के हित में होगा कि वह डोनबास पर बिना देरी फैसला करे। जेलेंस्की से मिलने से पहले ट्रंप ने सावधानी भरा बयान दिया था। उन्होंने कहा था, “यह भी संभव है कि यह समझौता पूरा न हो पाए। कुछ हफ्तों में हमें पता चल जाएगा।” शीर्ष नेताओं के बातचीत से यह पता चलता है कि शांति की उम्मीद जगी है, लेकिन रास्ता अभी भी कठिन और अनिश्चितता से भरा है

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