Health News: आयुर्वेद में हृदय रोगों के लिए अमृत मानी जाने वाली ‘अर्जुन की छाल’ बिहार की आर्थिक प्रगति का नया आधार बनने जा रही है। उत्तरी बिहार में प्रचुर मात्रा में पाए जाने वाले इन पेड़ों के औषधीय और आर्थिक महत्व को देखते हुए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने स्पष्ट किया है कि अर्जुन के पेड़ों का संरक्षण और वैज्ञानिक तरीके से इनका दोहन राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन साबित होगा। इसके लिए बिहार स्टेट मेडिसिनल प्लांट बोर्ड का गठन किया गया है, जो जड़ी-बूटियों के विकास, वैल्यू एडिशन और मार्केटिंग को बढ़ावा देगा। सरकार की योजना कृषि और उद्योग विभाग के साथ मिलकर राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा करने और हर्बल दवा उत्पादन को एक कानूनी और व्यावहारिक रूप देने की है।
Health News: हृदय स्वास्थ्य के लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच
डॉ. पी.वी. रंगनायकुलु जैसे विशेषज्ञों का मानना है कि अर्जुन की छाल दिल के मरीजों के लिए किसी जीवनदान से कम नहीं है। इसके नियमित और संतुलित सेवन से धमनियों में जमा होने वाला हानिकारक कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स कम होने लगते हैं। यह प्रक्रिया हृदय तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियों की कार्यक्षमता को बढ़ाती है, जिससे दिल की गंभीर बीमारियों का खतरा काफी हद तक टल जाता है। यह रक्त संचार को सुचारू बनाकर हृदय की मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करता है।
Health News: कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से लड़ने की शक्ति
लखनऊ स्थित सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिनल एंड एरोमैटिक प्लांट्स के शोध में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि अर्जुन की छाल में ‘अर्जुनिक एसिड’ नामक एक विशेष कंपाउंड होता है। इस तत्व में कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने की अद्भुत क्षमता पाई गई है। यह विशेष रूप से मुख, ओवेरियन और ब्रेस्ट कैंसर की रोकथाम में सहायक है। इसके अलावा इसमें मौजूद ‘कैसुरीनिन’ नामक रासायनिक घटक शरीर में कैंसर सेल्स के विस्तार को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
वजन नियंत्रण और मेटाबॉलिज्म में सुधार
मोटापे और बढ़ते वजन से परेशान लोगों के लिए अर्जुन की छाल का काढ़ा एक बेहतरीन प्राकृतिक उपाय है। यह न केवल पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है बल्कि शरीर के मेटाबॉलिज्म को भी गति देता है। इसमें मौजूद विशेष लिपिड गुण शरीर की अतिरिक्त चर्बी को कम करने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बनाए रखने में मददगार होते हैं। इसके साथ ही यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को इतना मजबूत कर देता है कि संक्रमण और मौसमी बीमारियों का असर शरीर पर कम हो जाता है।
डायबिटीज और अन्य शारीरिक समस्याओं का समाधान
ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में भी अर्जुन की छाल का कोई सानी नहीं है। इसके नियमित उपयोग से मधुमेह के रोगियों को अपना शुगर लेवल बनाए रखने में आसानी होती है। इसके अतिरिक्त, अपनी ठंडी तासीर के कारण यह पेट की गर्मी से होने वाले मुंह के छालों को ठीक करने में भी रामबाण की तरह काम करता है। कान के दर्द और संक्रमण जैसी समस्याओं में इसके एंटीमाइक्रोबियल गुण तुरंत राहत पहुंचाते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों की यह सलाह हमेशा याद रखनी चाहिए कि इसकी ठंडी प्रकृति के कारण इसका उपयोग बिना डॉक्टरी परामर्श के नहीं करना चाहिए।
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